फाग की मस्ती आज से, मंदिरों में लगेगी स्नेह की गुलाल

सीकर. फाल्गुन मास की शुरूआतआज से शुरू हो गई है। इससे पहले शनिवार को पूर्णिमा पर सांस्कृतिक मंडल की ओर से होली खेड़ा में राजकीय होली का डांड विधि-विधान से पूजन कर रोपा गया।

By: Sachin

Updated: 28 Feb 2021, 10:15 AM IST

सीकर. फाल्गुन मास की शुरूआत रविवार यानी आज से हो गई है। इससे पहले शनिवार को पूर्णिमा पर सांस्कृतिक मंडल की ओर से होली खेड़ा में राजकीय होली का डांड विधि-विधान से पूजन कर रोपा गया। इसी के साथ मंदिरों में भी फागोत्सव के आयोजन शुरू हो जाएंगे। भक्त भगवान को स्नेह की अबीर और श्रद्धा का गुलाल लगाएंगे। गली मोहल्लों में चंग की थाप के साथ होली के गीत गाए जाएंगे। होली का दहन 28 मार्च और धुलंड का पर्व 29 मार्च को मनाया जाएगा। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि हिंदू पंचांग का आखिरी महीना फाल्गुन कहलाता है। इस महीने जो पूर्णिमा आती है उसे फाल्गुनी नक्षत्र कहा जाता है। इस माह में कई त्यौहार आते हैं, जिनमें होली प्रमुख है। फाल्गुन माह में आते हैं कई प्रमुख त्यौहारफाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां लक्ष्मी और मां सीता की पूजा की जाती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवजी की आराधना की जाती है। यह दिन महाशिवरात्रि कहलाता है। फाल्गुन मास में चंद्रमा का जन्म माना जाता है। ऐसे में इस माह चंद्रमा की भी अराधना की जाती है।

भगवान कृष्ण की आराधना का विशेष महत्व
इस माह में श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यह बेहद फलदायी मानी गई है। मान्यता है कि फाल्गुन मास में कृष्ण जी के तीनों स्वरूप यानी बाल कृष्ण, युवा कृष्ण और गुरु कृष्ण की अराधना की जाती है। संतान के लिए बाल कृष्ण की, प्रेम के लिए युवा कृष्ण की और ज्ञान और वैराग्य के लिए गुरु कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।


होली का डांडा रोपा
श्रीमाधोपुर. फाल्गुन माह के आगाज के साथ ही माघ पूर्णिमा पर शनिवार को होली के पर्व से एक माह पहले होली का डांडा रोपा गया। पंडित रामावतार शर्मा पंचालीवाले के सान्निध्य में पंचावाली अंडरपास के पास सवा 11बजे वेदमंत्रों के साथ होली के डांडे की पूजा कराने बे बाद पालिकाध्यक्ष हरिनारायण महंत पार्षद श्रवण आचार्य, किशन लाल सोनी, मूलचन्द कुमावत, रविन्द्र ओसवाल, नागर मल लोकनाथका, सुरेश मतंग, भरत पेंटर, शिवपालनाथ योगी, रामावतार महरड़, चेतन खण्डल व पालिका कार्मिकों ने होली का डांडा रोपा। इसके साथ ही फ ाल्गुन मास में चंग की थाप व धमाल के स्वर लहरिया शुरू हो जाएगी। पं. शर्मा ने बताया कि परपंरानुसार जिस स्थान पर होली दहन होता है। वहां बड़ा डांडा लगाया जाता है जो भक्त प्रहलाद का प्रतीक होता है। जिसे होलिका दहन से ठीक पहले इसे सुरक्षित निकाल लिया जाता है।

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