रिसर्च: खांसी-जुकाम ही नहीं, बच्चों में बुखार, उल्टी-दस्त व पेट दर्द पर भी हो सकता है कोरोना!

सीकर/मूंडरू. खांसी जुकाम या बुखार के लक्षण पर ही नहीं, बच्चों में बुखार के साथ उल्टी दस्त होने पर भी कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर में बच्चों पर हुए एक शोध में ऐसा पाया गया है।

By: Sachin

Published: 03 Jun 2020, 08:30 AM IST

शंकरलाल शर्मा
सीकर/मूंडरू. खांसी जुकाम या बुखार के लक्षण पर ही नहीं, बच्चों में बुखार के साथ उल्टी दस्त होने पर भी कोरोना वायरस (corona virus) की पुष्टि हुई है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर (SMS Hospital Jaipur) में बच्चों पर हुए एक शोध में ऐसा पाया गया है। जेके लोन अस्पताल के सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेश व डॉ. कविता यादव ने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में यह शोध किया। शोध एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डाक्टर सुधीर भंडारी तथा जेकेलोन अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अशोक गुप्ता के निर्देशन में हुआ। इसमें यह पुष्टि हुई कि बच्चों में बुखार के साथ उल्टी दस्त होने पर भी कोरोना हो सकता है। उन्होंने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में भर्ती बच्चों का एक शोध पत्र वल्र्ड जनरल ऑफ पीडियाट्रिक में भेजा है। डा. यादव के साथ डा टीकम चंद कुमावत, डॉ बलबीर सिंह गुर्जर, डॉ रूचि प्रतिहार भी शोध में शामिल रही।


रोगसूचक के आधार पर शोध

डा. यादव ने बताया कि 20 दिन का एक बच्चा बुखार एवं दस्त की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुआ। उसमें शुरुआती लक्षणों में खांसी या सांस संबंधी दिक्कत नहीं थी। कोरोना जांच में बच्चा पॉजिटिव निकला। तीन अन्य बच्चे भी पेट संबंधी लक्षणों के साथ भर्ती हुए हुए जो जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसका एक कारण यह है कि ऐसे बच्चों में वायरस का इन्फेक्शन पेट के जरिए हुआ हो। पेट में भी वायरस के एसीई 2 रिसेप्टर मिलते हैं। उल्टी-दस्त और पेट दर्द जैसे लक्षण ऐसे चार प्रतिशत बच्चों में मिले। सिर दर्द और बुखार के साथ दौरे आने की भी शिकायत 1.4 प्रतिशत में मिली। गंभीर बच्चों में रक्त के अंदर लिंफोसाइट काउंट और प्लेटलेट काउंट भी कम मिले।

दो महीने में भर्ती बच्चों पर शोध


शोध में 71 बच्चों को शामिल किया गया। अप्रेल व मई महीने में हुए शोध में सामने आया कि अन्य देशों में बच्चों में संक्रमण की दर एक से तीन साल के बच्चों में ज्यादा पाई गई थी। वही जयपुर में दस साल से ज्यादा उम्र के बच्चे 48 फीसदी संक्रमित मिले हैं। दूसरे देशों में जहां कुल केस के 2.2 प्रतिशत ही बच्चे थे।


हमारे बच्चों में क्रॉस इम्यूनिटी ज्यादा

दूसरे देशों में 23 प्रतिशत बच्चों के कोई लक्षण नहीं पाए गए। शोध में सामने आया कि देश में बीसीजी वैक्सीन ज्यादा लगाई जाती है, जिस कारण यहां पर कोरोना वायरस के प्रति हमारी इम्यूनिटी ज्यादा मजबूत है। हमारे यहां दूसरे वायरल इन्फेक्शन भी कॉमन है। जिनके कारण बच्चों में क्रॉस इम्यूनिटी ज्यादा है। बच्चों में इन वायरस के लक्षण ज्यादा दिखाई नहीं देते। शोध में यह भी पाया गया कि पेट के लक्षणों वाले बच्चे ज्यादा गंभीर थे।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned