पाठकों के दम पर सरकारों से लड़ी जनता के हक की लड़ाई: डॉ. कोठारी

झुंझुनूं और चूरू दोनों जिलों का ही गौरवशाली अतीत रहा है। झुंझुनूं की पहचान जहां शौर्य से है, तो चूरू की पुरामहत्व से।

By: Sachin

Published: 05 Feb 2021, 10:02 PM IST

झुंझुनूं.चूरू. झुंझुनूं और चूरू दोनों जिलों का ही गौरवशाली अतीत रहा है। झुंझुनूं की पहचान जहां शौर्य से है, तो चूरू की पुरामहत्व से। बावजूद आज दोनों ही जिले विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। इसका बड़ा कारण है यहां के जनप्रतिनिधियों का मौन रहना। क्षेत्र के लोगों को चाहिए कि वे अपने जनप्रतिनिधियों को जगाएं। यह उनका कर्तव्य है कि वे विकास के लिए काम करें और यह लोगों का अधिकार है कि वे उनसे काम करवाए। यह बात शुक्रवार को पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी (Rajasthan Patrika Editor Gulab Kothari) ने संवाद सेतु कार्यक्रम (Rajasthan Patrika Samvad Setu) के तहत चूरू व झुंझुनूं जिले के प्रबुद्धजनों से वर्चुअल रूबरू होते हुए कही। पत्रिका के अमृतम जलम (Rajasthan Patrika Amritam Jalam Campaign) सहित अन्य सामाजिक सरोकारों का जिक्र करते हुए कोठारी ने कहा कि इन्हीं के दम पर आज पत्रिका की विश्वसनीयता और साख कायम है। डॉ. कोठारी ने कहा कि पाठकों के इसी विश्वास के दम पर पत्रिका ने जनता के हक की लड़ाई सरकारों से लड़ी है।
झुंझुनूं के पाठकों से संवाद करते हुए कोठारी ने कहा कि राजनीति का वर्तमान स्वरूप ठीक नहीं है। हमें सामूहिक रूप से क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे। यहां के उद्योगपतियों ने कोरोना काल में 1500 करोड़ की सहायता की। सरकार को भी इनके क्षेत्र में कुछ करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। खेतड़ी का ताम्बा उद्योग आज सरकार की इच्छाशक्ति के अभाव में दम तोड़ रहा है। कोर्ट कह चुका है कि हरियाणा के नहरी पानी पर झुंझुनूं का हक है, फिर भी सरकार चुप है। यहां के जनप्रतिनिधि मौन हैं। कोई आवाज नहीं उठा रहा। ऐसे में आम अवाम को आवाज उठानी चाहिए। हम किसके भरोसे बैठे हैं। यदि हमें अपनी माटी का कर्ज चुकाना है, तो पहल भी खुद ही करनी होगी।
चूरू के पाठकों से चर्चा करते हुए कोठारी ने कहा कि बदलाव प्रकृति का नियम है। यदि समय के साथ नहीं बदले, तो पिछड़ जाएंगे। हमें आत्मनिर्भर बनना होगा। क्यों किसी अन्य की मदद के इंतजार में हम रहे। खुद क्यों नहीं पहल कर विकास की एक नई इबारत लिखे। स्थापत्य के लिए विख्यात चूरू के लोग चाहे, तो बिना किसी सरकारी या जनप्रतिनिधियों की मदद के पर्यटन का एक सर्किट बना सकते हैं। हर काम में सरकार की तरफ निर्भरता हमारी परतंत्रता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से आज तक क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया। पर्यटन की दृष्टि से भी चूरू पिछड़ा हुआ है। इस पर सोचने की जरूरत है।

साल में एक पौधा और एक आरटीआइ जरूरी

पत्रिका के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा कि जन समस्याओं और जन हित में हर व्यक्ति आरटीआइ जरूर लगाए। आरटीआइ के रूप में एक शक्तिशाली हथियार लोगों के हाथ में है, लेकिन अफसोस है कि वे इसका इस्तेमाल नहीं करते। वह जाने कि उसके क्षेत्र में कहां क्या हो रहा है। जो हो रहा है, वह फायदे का है या नहीं। साथ ही अपने जन्मदिन पर एक पौधा और एक आरटीआइ जरूर लगाए।


विकास में नींव का पत्थर बना पत्रिका
राजस्थान पत्रिका न केवल विकास के मामले में बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी मील का पत्थर साबित हुआ है। पत्रिका ने पानी, बिजली, स्वास्थ्य, रेल सेवा आदि क्षेत्र में मुहिम चलाकार सरकार और प्रशासन को इन कार्यों के लिए बाध्य किया है। इसी कारण आज चूरू जिला विकास के सोपान तय कर रहा है। बिगड़ता पर्यावरण चिंता का विषय है।

राजेन्द्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष

समस्याओं को प्रमुखता से उठाया
विकास के कार्यों के लिए पत्रिका हमेशा तत्पर रहा है। केवल जनप्रतिनिधियों या सरकार के भरोसे सारे काम नहीं हो सकते। पत्रिका के सामाजिक सरोकार नई पीढ़ी को प्रेरणा देने वाले हैं। पत्रिका ने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता के साथ उठाकर सरकार व प्रशासन को काम करने के लिए मजबूर किया है।

अभिनेष महर्षि, विधायक, रतनगढ़


ताम्र प्रोजेक्ट के लिए पत्रिका का अभियान सराहनीय
खेतड़ी में हिन्दुस्तान कॉपर का बड़ा संयंत्र है। इसे फिर से चलाने के लिए राजस्थान पत्रिका ने अभियान चलाया है। यहां फिर से पूरे संयंत्र चलने चाहिए। खेतड़ी में इतना तांबा है कि अगले सौ साल तक यहां खनन हो सकता है। वापस हजारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। राज्य सरकार पर मैं दबाव बनाऊंगा। केन्द्र पर आमजन व पत्रिका भी दबाव बनाएं।

डॉ जितेन्द्र सिंह, विधायक, खेतड़ी

शिक्षा के क्षेत्र में झुंझुनूं अव्वल
शिक्षा के क्षेत्र में झुंझुनूं बहुत आगे है। हमारे जिले की बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं। विदेश में भी हमारी बेटियां लोहा मनवा रही है। झुंझुनूं में केन्द्रीय विद्यालय तो हैं, लेकिन वहां सीट कम हैं, ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। ताकि हमारी बेटियों को अच्छी शिक्षा मिल सके। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की दरकार है।

प्रियंका चौधरी, बहरीन से, प्रवासी झुंझुनूं

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