scriptFirst bumper announcement of English schools, now rules have to be cha | पहले अंग्रेजी स्कूलों की बंपर घोषणा, अब बदलने पड़े नियम | Patrika News

पहले अंग्रेजी स्कूलों की बंपर घोषणा, अब बदलने पड़े नियम

अजय शर्मा
सीकर. प्रदेश में लगातार बढ़ते अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के क्रेज ने शिक्षा विभाग की चुनौती बढ़ा दी है। सरकार ने भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के जरिए वाहीवाही लूटने के लिए बजट में बंपर घोषणा कर दी।

सीकर

Published: May 30, 2022 02:08:18 pm

अजय शर्मा
सीकर. प्रदेश में लगातार बढ़ते अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के क्रेज ने शिक्षा विभाग की चुनौती बढ़ा दी है। सरकार ने भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के जरिए वाहीवाही लूटने के लिए बजट में बंपर घोषणा कर दी। लेकिन धरातल पर भवन सहित अन्य सुविधाओं वाले हिन्दी मीडियम स्कूल नहीं मिलने पर विभाग ने यूटर्न लिया है। दरअसल, विभाग की ओर एक हजार नए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए सभी जिलों से प्रस्ताव मांगे गए थे। लेकिन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के चयन में आ रही दिक्कतों की वजह से कई जिले अब तक प्रस्ताव ही नहीं भेज सके। ऐसे में अब शिक्षा विभाग ने नियमों में बदलाव करना पड़ा है। पहले पांच हजार की आबादी वाले गांवों में ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल शुरू करने का प्रावधान था। लेकिन विभाग ने अब चार व तीन हजार की आबादी वाले गांवों में भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों शुरू करने की छूट दी है। क्योंकि कई बड़े गांवों में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के विरोध में अभिभावक आ गए। इसके अलावा कई जगह हिन्दी माध्यम स्कूल एक ही होने की वजह से स्कूल चयन में दिक्कत आ रही थी। प्रदेश के सभी जिलों के शहरी क्षेत्रों में विभाग को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए हिन्दी माध्यम स्कूल तलाशना बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में अब विभाग ने भवन सहित अन्य कमी को देखते हुए एक ही स्कूल परिसर में हिन्दी व अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित करने की छूट दी है। इसके तहत पहली पारी में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन हो सकेगा। जबकि दूसरी पारी में हिन्दी माध्यम स्कूलों का संचालन हो सकेगा। गौरतलब है कि सरकार ने बजट में एक हजार नए अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने का ऐलान था। बजट घोषणा को पूरा करने में अब विभाग की सांसे फूल रही है।

पहले अंग्रेजी स्कूलों की बंपर घोषणा, अब बदलने पड़े नियम
पहले अंग्रेजी स्कूलों की बंपर घोषणा, अब बदलने पड़े नियम


प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में इतने खुलने है अंग्रेजी माध्यम स्कूल
अजमेर: 56
अलवर: 37

बांसवाड़ा: 17
बांरा: 17

बाड़मेर: 14
भरतपुर: 29

भीलवाड़ा: 45
बीकानेर: 49

बूंदी: 21
चित्तौडगढ़: 14

चूरू: 42
दौसा: 10

धौलपुर: 13
डूंगरपुर: 14

श्रीेगंगानगर: 31
हनुमानगढ़: 21

जयपुर: 144
जैसलमेर: 10

जालौर: 9
झालावाड़: 13

झुंझुनूं: 28
जोधुपर: 75

करौली: 22
कोटा: 66

नागौर: 32
पाली: 38

प्रतापगढ़: 5
राजसमंद: 17

सवाईमाधोपुर: 10
सीकर: 28

सिरोही: 9
टोंक: 21

उदयपुर: 35


इस नियम में उलझा था शिक्षा विभाग
पहले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए ऐसे हिन्दी माध्यम के स्कूल का चयन किया जाता जहां कम से कम आठ कक्षा कक्ष हो। इसके अलावा भविष्य में आठ कमरे और बनने के लिए खाली जमीन हो। लेकिन अब छूट मिलने से शहरी क्षेत्रों में दो पारियों में स्कूल संचालित होने की छूट मिलने से अच्छे संसाधन वाले स्कूलों को भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाया जा सकता है।


फैक्ट फाइल:

पिछले साल हिन्दी माध्यम के कन्वर्ट स्कूल: 205
इस साल लक्ष्य: 2500

जिला मुख्यालय पर संचालित: 33
पिछले साल तक अंग्रेजी माध्यम में विद्यार्थी: 87 हजार

इस साल प्री-प्राईमरी स्कूल: 33
एक प्री प्राईमरी सेक्शन में विद्यार्थी: 25

प्री प्राईमरी खंड: 3 साल

अंग्रेजी माध्यम स्कूल इसलिए नहीं दे पा रहे पूरी राहत
1. संसाधन: हिन्दी मीडियम के भवनों में संचालन
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए संसाधनों के नाम पर अभी कुछ नहीं है। कई ब्लॉकों में आनन-फानन में अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने पर भामाशाहों की मदद से भवनों की रंगाई-पुताई कराई गई। अभिभावकों का कहना है कि सरकार अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बढ़ावा दें लेकिन उनके हिसाब से भवन भी उपलबध कराए। इतनी संख्या में एक साथ स्कूल खोलने के बजाय प्लानिंग से अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने चाहिए जिससे वह निजी को टक्कर दे सके।


2. स्टाफ: पिछले साल भी रह गए थे पद रिक्त, नई भर्ती का पता नहीं

विभाग अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए अलग से भर्ती अब तक नहीं कर सका है। पिछले साल 345 में से 171 स्कूलों को प्रिसिंल नहीं मिल सके। कई स्कूलों में विषयों के पद भी खाली रह गए। अभिभावकों का कहना है कि सरकार की पहल अच्छी है लेकिन अंग्रेजी माध्यम के हिसाब से स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाए।

जनता बोली, हिन्दी माध्यम लगातार बंद तो फिर कहां पढ़ेंगे बच्चे
दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि विभाग हिन्दी माध्यम के स्कूलों को ही बंद कर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल शुरू कर रहा है। अभिभावकों का कहना है कि विभाग को अंग्रेजी माध्यम संचालित करने है तो फिर अलग से सैपअप तैयार कर शुरू करेंगे। यदि ऐसे ही हिन्दी माध्यम के स्कूल बंद होते रहे तो फिर हिन्दी माध्यम के विद्यार्थी कहां पढ़ाई करेंगे।


पहले: बालिका स्कूलों को बंद करने की तैयारी विरोध हुआ तो बदली नीति

प्रदेशभर में पिछले साल बालिका स्कूलों को बंद कर अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने की तैयारी की गई। इसका प्रदेश के कई जिलों में विरोध हुआ। लगातार प्रदर्शन हुए तो विभाग ने यूटर्न लेते हुए बालिका स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बदलने का प्रस्ताव बदल दिया। अभिभावकों का कहना है कि काफी संघर्ष के बाद अलग से बालिका स्कूल खुले थे। यदि विभाग इनको बंद कर देगा तो बेटियां कहा पढ़ाई करनी जाएगी।

जल्द नए सिरे से भेजेंगे प्रस्ताव: शिक्षा विभाग
विभाग की ओर से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के चयन के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। सीकर शहर में दस अंग्रेजी माध्यम स्कूल नए शुरू होने है। इसके लिए प्रस्ताव मांगे गए है। जिलेभर में 28 नए अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुलने है। नई गाइडलाइन से काफी राहत मिली है।

रामचंद पिलानियां, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सीकर

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