स्वास्थ्य बीमा योजना में खाद्य सुरक्षा योजना बन रही परेशानी

स्वास्थ्य बीमा योजना में खाद्य सुरक्षा योजना बन रही परेशानी

Vinod Chauhan | Publish: Sep, 16 2018 11:00:24 AM (IST) Sikar, Rajasthan, India

सीकर. श्रमिकों के संवेदनशील होने का श्रम विभाग का दावा बेमानी है। इसकी बानगी है कि पंजीकृत श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए बनी योजना में अधिकारी रूचि नहीं दिखा रहे है।


सीकर. श्रमिकों के संवेदनशील होने का श्रम विभाग का दावा बेमानी है। इसकी बानगी है कि पंजीकृत श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए बनी योजना में अधिकारी रूचि नहीं दिखा रहे है। नतीजन योजना कागजों में ही सिमट गई है। ऐसे में जिले के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलने वाले स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग भी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निशुल्क इलाज होने का हवाला दे रहा है लेकिन हकीकत यह है खाद्य सुरक्षा योजना से जुडऩे की अनिवार्यता के कारण एक लाख से ज्यादा श्रमिक स्वास्थ्य योजना से वंचित है। जबकि जिले के श्रम विभाग कार्यालय में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या करीब 2.57 लाख है।

पांच व्यक्ति हो सकते लाभान्वित
योजना के तहत एक वर्ष में इस कार्ड से पांच व्यक्तियों तक के परिवार को तीस हजार रुपए का चिकित्सा लाभ मिलता है। पूर्व में यह योजना गरीबी रेखा से नीचे बीपीएल परिवारों के लिए ही लागू थी। योजना में श्रमिकों को श्रम विभाग में पंजीयन करवाने के बाद इंश्योरेंस कंपनी में आवेदन पत्र जमा करवाना होगा।

चार प्रकार के श्रमिक
योजना में नरेगा श्रमिक, निर्माण श्रमिक, बीड़ी श्रमिक तथा स्ट्रीट वैण्डर्स को शामिल किया गया है। जिले में श्रमिकों के कार्ड बनाने की जिम्मेदारी नेशनल इंश्यारेंस कम्पनी को दी गई है। कंपनी ने तीन वर्ष पहले जिले के गांवोंं में कैम्प लगा कर स्मार्ट कार्ड बनाए लेकिन श्रमिकों का कहना है कि कम्पनी ने कई जगह तो केम्प ही नहीं लगाए। ऐसे में योजना कागजों में सिमट गई है।

इनका कहना है:
यह सही है कि बीमा कम्पनी ने पूर्व की सूची के आधार पर ही स्मार्ट कार्ड जारी किए गए थे। अब भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना लागू हो गई है। योजना से वंचित श्रमिकों को संबंधित क्षेत्र के एसडीएम के पास आवेदन लगाने चाहिए।
चैन सिंह शेखावत, सहायक श्रम आयुक्त

जिले में करीब एक लाख पंजीकृत श्रमिक चिकित्सकीय लाभों से वंचित है। खाद्य सुरक्षा योजना की अनिवार्यता के कारण इन श्रमिकों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है।
बृज सुंदर जांगिड़, सीटू

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