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Gulf Country: नौकरी के लिए गए थे परदेस, लेकिन पहुंच गए जेल

खाड़ी की जेलों में बंद है हमारे चार हजार से ज्यादा लोग : अपनों के प्रयास से कुछ लौटे वतन, कइयों का लम्बा हो रहा इंतजार

 

सीकर

Published: May 27, 2022 05:01:10 pm

आशीष जोशी

Gulf Country:सीकर. रोजगार की आस में हर साल लाखों भारतीय Indian खाड़ी देशों का रुख करते हैं, लेकिन वहां के कानून व नियमों की पूरी जानकारी के अभाव में कई लोग सलाखों के पीछे पहुंच जाते हैं। स्थानीय कानूनों के उल्लंघन की वजह से चार हजार से ज्यादा भारतीय खाड़ी देशों की जेलों में बंद है। Indians are lodged in the jails of Gulf countries इनमें शेखावाटी Shekhawati के भी कई कामगार शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) United Arab Emirates की जेलों में सबसे ज्यादा 1480 भारतीय बंद हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में विदेशी जेलों में कुल 8278 भारतीय बंद हैं। इनमें से करीब आधे खाड़ी देशों की जेल में हैं। विदेशी जेलों में कुल 156 भारतीय कैदी उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। इनमें से भी 65 खाड़ी देशों में हैं। हालांकि सरकार और परिजनों के साझा प्रयासों से पिछले पांच वर्ष में चार हजार से ज्यादा भारतीय खाड़ी देशों की जेलों से रिहा भी करवाए गए हैं। दरअसल, कमाई का सपना लेकर लोग खाड़ी देशों में पहुंच तो जाते हैं, लेकिन वहां के सख्त कानून और गलत लोगों के सम्पर्क में आने से कुछ कामगार ऐसे फंसते हैं कि उनकी वतन वापसी में कई साल लग जाते हैं। शेखावाटी के लोगों के लिए सऊदी अरब Saudi Arab, ओमान Oman, कतर katar, मस्कट Muscat, दुबई Dubai, आबुधाबी Abu Dhabi जैसे खाड़ी देश रोजगार का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म समझा जाता है।

Gulf Country: नौकरी के लिए गए थे परदेस, लेकिन पहुंच गए जेल
Gulf Country: नौकरी के लिए गए थे परदेस, लेकिन पहुंच गए जेल

इन 4 मामलों से समझें पीड़ा

केस एक : झुंझुनूं jhunjhunu जिले की खेतड़ी तहसील के बबाई गांव का मनीष कुमार कुवैत गया था। वहां उसके साथी ने एक डिब्बा यह कहकर दिया कि इसमें दवा है। वहां की पुलिस ने डिब्बे की जांच की तो दवा की जगह कुछ ऐसा पदार्थ मिला जो वहां के कानून के अनुसार वैध नहीं था। गिरफ्तार कर कुवैत की मुख्य जेल में डाल दिया गया। छह महीने जेल में रहने के बाद 6 मई 2022 को उसे छोड़ दिया गया। लेकिन जब भारत आने लगा तो उसका वीजा खत्म हो गया। अब वीजा नहीं होने के कारण उसे कुवैत की जलेब जेल में बंद कर रखा है। परिजन उसे वहां से छुड़वाकर भारत लाने की गुहार कर रहे हैं।

केस दो : चूरू churu जिले का राकेश 2012 में कमाने के लिए सऊदी अरब गया था। वहां पर एक्सीडेंट में तीन लोग मारे जाने के बाद से वह सऊदी की जेल में बंद था। करीब चार साल तक जेल में बंद रहने के बाद परिवार और अन्य लोगों के प्रयास से 26 जनवरी 2016 को रिहा होकर घर लौटा।

केस तीन : सीकर Sikar के लोसल कस्बे के पास के गांव का गोविंद कमाने के लिए सऊदी गया था। वहां ड्राइवर का काम करते हुए उससे एक्सीडेंट हो गया और सऊदी के एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहां के नियमानुसार कोर्ट ने उस पर 76 लाख रुपए की राशि क्लेम के रूप में जमा करवाने के आदेश दिए। उसके पास इतने रुपए नहीं थे। उसे जेल में डाल दिया गया। बाद में उसके परिवार, परिचित और क्षेत्र के लोगों ने एक साल तक मुहिम चलाकर 80 लाख एकत्रित किए। 2019 में सऊदी कोर्ट ने बरी किया।

केस चार : वर्ष 2008 में पंजाब Punjab का बलविंदर सिंह Balwinder Singh सऊदी गया था। 2013 में मारपीट के दौरान किसी की जान चली गई। सऊदी की अदालत ने बलविंदर को फांसी की सजा सुनाई। दया याचिका के दौरान कोर्ट ने परिवार को दो करोड़ रुपए ब्लड मनी देने के निर्देश दिए। उसके परिजनों व सामाजिक संगठनों ने मिलकर एक सप्ताह पहले ही दो करोड़ का प्रबंध किया है।

कोंसुली सहायता का प्रावधान लेकिन आसां नहीं वतन वापसी

भारतीय नागरिकों की हिरासत या गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही इन देशों में स्थित भारतीय मिशन/केंद्र उन्हें कोंसुली सहायता प्रदान करता है। कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने में भी मदद करता है। जहां भारतीय समुदाय अधिक संख्या में हैं वहां वकीलों का स्थानीय पैनल भी है। सजायाफ्ता कैदियों के प्रत्यार्वन व स्थानांतरण के लिए भी कार्रवाई की जाती है। जनवरी 2020 से फरवरी 2022 तक बंदी प्रत्यावर्तन अधिनियम 2003 के तहत दो भारतीय नागरिकों को अपनी शेष सजा काटने के लिए श्रीलंका से भारत स्थानांतरित किया गया।

देश- जेलों में बंद भारतीय- उम्र कैद की सजा

संयुक्त अरब अमीरात 1480 05

सऊदी अरब 1392 00

कतर 473 00

ओमान 68 12

कुवैत 458 28

इराक 03 00

ईरान 07 00

बहरीन 163 13

(विदेश मंत्रालय की ओर से एक अप्रेल 2022 को उपलब्ध करवाई गई जानकारी के अनुसार)

एक्सपर्ट व्यू : प्रशिक्षण की व्यवस्था लचर

विदेश जाने वाले कामगारों को वहां के नियम व कानूनों की जानकारी के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। इस वजह से कई कामगार वहां की जेलों में बंद है। सरकार प्रशिक्षण की व्यवस्था बेहतर बनाए तो इस तरह के मामलों पर रोक लग सकती है। केन्द्र व राज्यों की सरकारों ने पांच साल पहले दावा किया था कि खाड़ी देशों में रोजगार के लिए भेजने को सरकार खुद एक पोर्टल बनाएगी। इससे ठगी के मामले भी बंद हो सकते हैं। जो लोग अभी वहां फंसे हैं उनको निकालने के लिए भी सरकार को अपने स्तर पर मजबूत पैरवी करनी चाहिए।

महादेव सिंह, खाड़ी मामलों के एक्सपर्ट,सीकर

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