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प्रवेशोत्सव के दौर में चार तरह के कार्यक्रम, कैसे बढ़ेगा नामांकन

सेटअप परिवर्तन, डीपीसी, स्थानांतरण और प्रशिक्षण के फेर में उलझा प्रवेशोत्सव

सीकर

Updated: June 27, 2022 12:42:23 pm

रविन्द्र सिंह राठौड़
rajasthanpatrika.com

शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के प्रवेशोत्सव कार्यक्रम को सेटअप परिवर्तन, डीपीसी, स्थानांतरण एवं प्रशिक्षण के फेर में उलझा दिया है। इस तरह के कार्यक्रम के चलते शिक्षकों का आत्मविश्वास भी कम हो रहा है, जिसका प्रवेशोत्सव जैसे कार्यक्रम पर असर पड़ना तय है। बड़ी वजह यह है कि सत्र की शुरूआत के साथ ही सरकार ने स्थानांतरणों का पिटारा खोलने की तैयारी कर ली है। साथ ही डीपीसी की प्रक्रिया शुरू की गई है। इधर, सेटअप परिवर्तन की प्रक्रिया का समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया गया है। आज से शिक्षकों के प्रशिक्षण भी शुरू किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रवेशोत्सव के दौर में चार तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जो प्रवेशोत्सव में बाधा बनेंगे।
प्रवेशोत्सव के दौर में चार तरह के कार्यक्रम, कैसे बढ़ेगा नामांकन
प्रवेशोत्सव के दौर में चार तरह के कार्यक्रम, कैसे बढ़ेगा नामांकन
अधिकारी कर रहे शिक्षा के ढांचे को कमजोर
विभाग का हर कार्यक्रम एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। लेकिन एक निश्चित क्रम के अनुसार सबसे पहले डीपीसी की प्रक्रिया होनी चाहिए थी। उसके बाद सेटअप परिवर्तन तथा अंत में स्थानांतरण होने चाहिए। जिससे पीछे से पद खाली न रहे। लेकिन विभाग के अधिकारी इन पर चिंतन किए बिना कार्यक्रम जारी कर रहे हैं। इससे शिक्षा विभाग का ढांचा भी लगातार कमजोर हो रहा है। क्योंकि हर समय शिक्षक पर सेटअप परिवर्तन, डीपीसी व तबादलों की तलवार लटकी रहती हैं। जिससे आम शिक्षकों में अस्थिरता का भाव उत्पन्न हो रहा है। प्रदेश में इस बार सरकारी स्कूलों के नामांकन पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
नींव अभियान से बदली थी स्कूलों की सूरत
7 साल में प्रदेश की सरकारी स्कूलों में 30 लाख का नामांकन बढ़ा हैं। सत्र 2000 से 2015 तक प्रदेश में लगातार नामांकन में गिरावट आई। लेकिन 2015 में राजस्थान पत्रिका की ओर से मई, जून व जुलाई महीने में चलाए गए नींव अभियान के परिणाम स्वरूप प्रदेश में एक साथ पांच लाख की नामांकन अभिवृद्धि की शपथ के साथ ही शैक्षिक ढांचे की मजबूती के लिए नवाचार के संकल्प लिए गए। उसी का परिणाम है कि शेखावाटी अंचल की सैंकड़ों स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर स्कूल बस, स्पोकन इंग्लिश की कक्षाएं, झूले, कंप्यूटर प्रशिक्षण आदि व्यवस्था हुई है। स्कूलों में गार्डन और वाटिका का निर्माण हुआ है।
कैसे पूरा हो नामांकन में एक करोड़ का लक्ष्य
नींव अभियान का ही परिणाम है कि प्रदेश में नामांकन का आंकड़ा 99.5 लाख तक पहुंच गया। हर शिक्षक और अभिभावक में अंकों को देखकर यह लक्ष्य निर्धारित किया कि सत्र 2022-23 में इस आंकड़े को एक करोड़ के पार किया जाएगा। लोगों में नया जोश और उत्साह था। लेकिन शिक्षा विभाग ने इस प्रवेशोत्सव को प्रशिक्षण, सेटअप परिवर्तन, स्थानांतरण और डीपीसी की भेंट चढ़ा दिया है। ऐसे हालात में यह आशंका हो रही है कि प्रदेश करोड़पति बनने के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएगा।

एक्सपर्ट व्यू....
सबसे पहले बढ़े हुए नामांकन के आधार पर माध्यमिक शिक्षा में स्टाफिंग कर नए पद सृजित किए जाए। उसके बाद संयुक्त निदेशक से लेकर सैकंड़ ग्रेड तक ऊपर से नीचे तक पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण की जाए। तत्पश्चात स्थाई तबादला नीति लागू कर शिक्षकों के सभी संवर्गों के स्थानांतरण किए जावें, अंत में विकल्प के आधार पर सैटअप परिवर्तन की कार्यवाही की जावे। डीपीसी और सेटअप परिवर्तन एक साथ संभव ही नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारी एसी से बाहर निकल कर धरातल पर व्यवहारिक कार्यों को अंजाम दें, शिक्षा के निजीकरण की सोच से बाहर निकल कर शैक्षिक ढांचे की मजबूती की ओर कदम बढ़ाकर समाज को एक बड़ा तौहफा दें।
-उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

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