बच्चों का दर्द: सरकार ने किया प्रमोट, लेकिन अगली कक्षा की कैसे करें पढ़ाई

सीकर. कोरोनाकाल अभिभावकों के साथ बच्चों की भी पूरी परीक्षा ले रहा है। सरकार ने भले प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया हो लेकिन अब लॉकडाउन उनका दर्द बढ़ा रहा है।

By: Sachin

Published: 23 May 2021, 10:38 AM IST

सीकर. कोरोनाकाल अभिभावकों के साथ बच्चों की भी पूरी परीक्षा ले रहा है। सरकार ने भले प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को प्रमोट कर दिया हो लेकिन अब लॉकडाउन उनका दर्द बढ़ा रहा है। हर साल मई महीने तक बच्चों को नई कक्षाओं की पुस्तकें मिल जाती थी, लेकिन इस बार 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों की पुस्तकें लॉकडाउन के फेर में अटकी हुई है। दिल्ली के पब्लिशर्स का कहना है कि राजस्थान के लाखों विद्यार्थियों की पुस्तकों के ऑर्डर मार्च व अप्रेल महीने में आ गए थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से माल सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं लॉकडाउन में लेपटॉप व मोबाइल सहित अन्य एसेसरीज की दुकानें भी नहीं खुल रही है और ऑनलाइन शॉपिंग एप पर बुकिंग तो हो रही है लेकिन सप्लाई नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अभिभावकों के साथ बच्चे भी खासे परेशान हैं। लॉकडाउन में बच्चों को स्पोट्र्स की सामग्री भी नहीं मिल पा रही है।

ऐसे समझें बच्चों का दर्द

केस 01: एक महीने पहले दिया ऑर्डर अब तक नहीं आई पुस्तकें
बजाज रोड निवासी प्रणय जैन ने बताया कि पांचवीं क्लास के विद्यार्थियों को इस साल भी प्रमोट कर दिया गया। ऑनलाइन एप के जरिए 20 अप्रेल को छठी कक्षा की पुस्तकों का ऑर्डर दिया था। इसके लिए पैसे भी जमा करवा दिए, लेकिन अभी तक पुस्तक नहीं आई है। पब्लिशर्स का तर्क है कि पुस्तकों का सेट 15 दिन पहले जयपुर भिजवा दिया था।

केस 02: लेपटॉप व मोबाइल भी अटके

जयपुर रोड निवासी कुमोद सिंह ने बताया कि गांव से बच्चों की टीसी कटाकर इस साल ही शहर के एक स्कूल में दाखिला दिलाया था। प्रवेश दिलाने के एक सप्ताह बाद ही लॉकडाउन लग गया। लगातार ऑनलाइन क्लास चल रही है। स्कूलों के लगातार फोन आने पर उसने बच्चों के लिए लेपटॉप व मोबाइल बुक करवा दिए। लेकिन 20 दिन से बुकिंग वाले आइटम नहीं मिले हैं। कंपनी लॉकडाउन में माल फंसने का तर्क दे रही है।

केस 03: स्कूल में बुक्स लेने गए तो कट गया चालान

पिपराली बाईपास निवासी मुकेश कुमावत ने बताया कि पांच दिन पहले स्कूल से लगातार मैसेज आने पर बच्चों के साथ स्कूल चले गए। यहां पहुंचने पर पूरी बुक्स देने के बजाय चार बुक्स दी गई। लौटते समय पुलिस ने चालान भी काट दिया। स्कूल में जब पूरी बुक्स नहीं आने की वजह पूछी तो बताया कि दिल्ली से एक महीने से ट्रांसपोर्ट से बुक्स नहीं आ रही है।

केस 04: सोचा इस बार कैरम खेलेंगे लेकिन बाजार बंद
कक्षा दसवीं की छात्रा पूनम ने बताया कि दो साल से उसके भाई-बहिन पीछे पड़े हुए थे कि इस बार गर्मियों की छुट्टी में कैरम खेलना सीखेंगे। पहले परिजन पढ़ाई प्रभावित होने की वजह से लाए नहीं, अब दुकानें बंद है।

 

स्कूल खुलेंगे तब मिलेगी अंकतालिका
लॉकडाउन लगने के साथ ही सरकार ने बच्चों को प्रमोट करने की घोषणा कर दी। इस बीच सरकारी व निजी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित हो गया। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वैक्सीनेशन से लेकर क्वॉरंटीन सेंटर पर नियुक्त कर दिया गया। ऐसे में बच्चों को प्रमोट की अंकतालिका भी नहीं मिली है। जून के दूसरे सप्ताह तक बच्चों को प्रमोट की अंकतालिका मिलने की संभावना है।


एक्सपर्ट व्यू: पुस्तक दान की भी शुरू हो मुहिम

लॉकडाउन में कई बच्चों को पुस्तकें नहीं मिल पा रही है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए पुस्तक दान की मुहिम शुरू कर सभी शहरों में बुक बैंक बनाए जा सकते हैं। सीनियर विद्यार्थी अपने जूनियर्स को पुस्तकें दे सकते हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा और लॉकडाउन में समस्या से राहत भी मिल सकेगी।
प्रियन लाटा, स्कूल संचालक, सीकर


परेशान नहीं हो, अच्छा वक्त मानकर संस्कारों की सीख दें

माता-पिता भी बच्चों के अच्छे गुरु होते हैं। इस समय बच्चे घरों पर ही है। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को संस्कारों की सीख, इतिहास की रोचक व भौगलिक जानकारी देनी चाहिए। बच्चों की रूचि के हिसाब से पेंटिंग, गीत-संगीत, नृत्य, वाद-विवाद, क्विज आदि की तैयारी कराई जा सकती है। इससे बच्चे की झिझक भी दूर होगी और वह कक्षा में बेहतर परफॉर्म भी करेगा।
अनिल भारद्वाज, शिक्षक व बाल मामलों के विशेषज्ञ

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