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'दूध देती गाय की मार सह रही सरकार': हादसे बढऩे पर भी लोक परिवहन बस सेवा पर मौन

Rajasthan lok parivhan bus service. विधानसभा चुनाव के दौरान भले ही कांगे्रस ने लोक परिवहन बसों को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की हो, लेकिर सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा ही गायब हो गया।

सीकर

Updated: February 20, 2022 11:41:55 am

अजय शर्मा
सीकर. विधानसभा चुनाव के दौरान भले ही कांगे्रस ने लोक परिवहन बसों को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश की हो, लेकिर सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा ही गायब हो गया। दरअसल, इसके पीछे बड़ी वजह इससे सरकारी खजाना भरना है। लोक परिवहन बसों के जरिए सरकार को हर साल औसतन 36 करोड़ रुपए का टैक्स मिल रहा है। जबकि चार साल में इन बसों से 427 से अधिक हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में 280 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 428 से अधिक लोग घायल हुए। लगातार हादसों की वजह से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। पिछली भाजपा सरकार की ओर से 13 दिसम्बर 2015 से प्रदेश में लोक परिवहन सेवा शुरू की गई थी। उस दौरान भी इसका रोडवेज कर्मचारियों के अलावा विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध किया गया था।

2019 में हुए सबसे ज्यादा हादसे

'दूध देती गाय की लात सह रही सरकार': हादसे बढऩे पर भी लोक परिवहन बस सेवा पर मौन
'दूध देती गाय की लात सह रही सरकार': हादसे बढऩे पर भी लोक परिवहन बस सेवा पर मौन

लोक परिवहन बसों से सबसे ज्यादा 147 हादसे वर्ष 2019 में हुए। इनमें 105 लोगों की मौत हुई, जबकि 172 घायल हुए। वर्ष 2018 में 108 हादसे हुए। इनमें 69 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2020 में 92 हादसों में 50 लोगों की मौत हुई।


सबसे ज्यादा परमिट सीकर जिले में
जयपुर: 66

दौसा: 73
सीकर: 350

अलवर: 55
भरतपुर: 32

अजमेर: 262
जोधपुर: 142

पाली: 48
उदयपुर: 29

चित्तौडगढ़: 49
कोटा: 81

बीकानेर: 269


1706 बसों के चालान, फिर भी लोक परिवहन ले रही जान
साल -- चालान --- जुर्माना ---परमिट निरस्त

2018-19 : 683 --- 56 --- 56.5 --- 17
2019-20: 734 --- 58.24 --- 7

2020-21: 289 --- 31.38 --- 1
(जुर्माना राशि लाखों में)


चुनाव में बनाया मुद्दा, अब जिक्र तक नहीं
सरकार की ओर से तीन साल की उपलब्धियों को लेकर दिसम्बर 2021 में जारी जन घोषणा पत्र की क्रियान्विति रिपोर्ट में लोक परिवहन को लेकर किसी तरह की नीति का जिक्र नहीं है। जबकि सरकार का दावा है कि चुनाव के समय किए गए 70 फीसदी वादे पूरे हो चुके हैं।

लोक परिवहन बसों से हादसे की 3 बड़ी वजह

1. ओवरस्पीड: इन बसों के 65 फीसदी चालन ओवरस्पीड को लेकर हुए हैं। आमजन की ओर से लगातार ओवरस्पीड की शिकायत की जाती रही है। सीकर जिले में 65 से अधिक हादसे चार वर्षों में हो चुके हैं।
2. ओवरलोड: इन बसों के 40 से 45 फीसदी चालन ओवरलोड को लेकर काटे गए। पिछले चार महीने में हुए 20 निरीक्षणों में 13 बसों में तय क्षमता से अधिक सवारी भी मिली है।

3. रोडवेज से आगे रहने की होड़: ओवरटेक हादसों की बड़ी वजह है। रोडवेज कर्मचारियों के कई संगठनों की ओर से कई बार जिला प्रशासन व परिवहन विभाग को शिकायत दी गई कि लोक परिवहन बसें सवारी लेने के फेर में ओवरटेक की कोशिश करती हैं। कई बार इस मुद्दे को लेकर रोडवेज कर्मचारी और लोक परिवहन बस संचालक आमने-सामने हो चुके हैं।

सरकार ले एक्शन : पीडि़त

सीकर निवासी रामप्रसाद ने बताया कि फतेहपुर में हुए हादसे में उसके बेटे श्याम की मौत हो गई थी। सरकार ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से राशि देकर टरका दिया। जबकि सवाल न्याय मिलने का था। सरकार को लोक परिवहन बसों के खिलाफ तत्काल एक्शन लेना चाहिए, जिससे यह दूसरे परिवारों की जिंदगानी को तबाह नहीं करें।


सरकार कराए समीक्षा, फिर परमिट करें रिन्यू

लगातार लोगों की जान जाने के बाद भी सरकार की ओर से इस संबंध में गंभीर नहीं होना चिंता का विषय है। सरकार को पहले पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद ही इनके परमिट रिन्यू किए जाने चाहिए। पिछले चार साल में सीकर जिले में ही लोक परिवहन बसों की वजह से 11 लोगों की जान जा चुकी है।
भंवर सिंह, कर्मचारी नेता, सीकर


जांच अभियान शुरू

लोक परिवहन बसों की लगातार जांच की जा रही है। ओवरस्पीड व फिटनेस के मामले में बसों को जब्त भी किया जाता है। शुक्रवार से ही बड़े स्तर पर सीकर जिले में अभियान शुरू किया है, जो अब नियमित रहेगा।
राजीव कुमार, आरटीओ, सीकर

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