पंचायत चुनाव होने पर भी प्रशासक राज से आजाद नहीं होगी 'सरपंचाई'

प्रदेश में इस बार चार चरणों में पंचायत चुनाव होने के बाद भी प्रदेश की गांवों की सरकार प्रशासक राज से मुक्त नहीं हो सकेगी।

By: Sachin

Published: 18 Sep 2020, 09:11 AM IST

सीकर. प्रदेश में इस बार चार चरणों में पंचायत चुनाव होने के बाद भी प्रदेश की गांवों की सरकार प्रशासक राज से मुक्त नहीं हो सकेगी। इसके पीछे वजह है जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के अब तक चुनाव नही होना। पंचायत पुनर्गठन के विवादों से फंसने लगे पेंच अब तक पूरी तरह नहीं सुलझ सके है। इस वजह से पिछले सात महीने से गांवों की सरकार प्रशासकों के भरोसे है। पिछले दिनों राज्य निर्वाचन आयोग ने शेष रही 3848 ग्राम पंचायतों के चुनाव की घोषणा कर दी, लेकिन जिला प्रमुख व प्रधानों के चुनाव को लेकर कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में जिला परिषद व पंचायत समिति में प्रशासक राज अभी जारी रहेगा। यदि सरकार की ओर से शेष ग्राम पंचायतों के साथ ही यह चुनाव कराए जाते तो आचार संहिता भी दुबारा नहीं लगानी पड़ती। एक्सपर्ट का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से बजट जिला परिषद व पंचायत समितियों को सीधे जारी किए जाते हैं। ऐसे में सितम्बर-अक्टूबर महीेने में चुने जाने वाली गांवों की सरकार के सामने भी कई तरह की समस्या रहेगी।


कोरोना की वजह से अटकी ग्राम सभा
कोरोना की वजह से प्रदेश की जिन ग्राम पंचायतों में चुनाव हो चुके हैं वहां ग्राम सभा नहीं हो पा रही है। इस कारण गांव-ढाणियों में विकास के नए काम भी नहीं हो पा रहे हैं। ग्राम सभाओं की वजह से नए प्रस्ताव भी ग्राम पंचायत नहीं ले पा रही है।


पहले एक साथ होते चुनाव, अब बदलेगा पूरा गणित
प्रदेश में पिछले चुनाव तक पंचायतीराज संस्थाओं के एक साथ चुनाव होते रहे हैं। कांग्रेस सरकार के राज में अलग-अलग समय में चुनाव होने की वजह से पूरा गणित भी बिगड़ेगा। एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल समय पर चुनाव नहीं होने की वजह से अगले चुनाव का शिड्यूल भी पूरी तरह बिगड़ेगा। ऐसे में पांच साल बाद भी गांव-ढाणियों के लोगों को प्रशासकराज के फेर में उलझना होगा।


फिर दुबारा आचार संहिता से प्रभावित होंगे आमजन के काम
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कलवानिया का कहना है कि पंचायतीराज संस्था ग्रामीण विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। समय पर चुनाव नही होने के कारण आमजन के कई महत्वपूर्ण कार्य बाधित हो रहे है। सरकार को जिला परिषदों एवं पंचायत समितियों के चुनाव भी साथ ही करवाने चाहिए ताकि बार-बार आचार संहिता लगने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकें।

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