सीकर में प्रशासन के ऊँचे दावे FAIL , दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर गोवंश

लोगों की निजी रुचि के अभाव में गोवंश का सही रखरखाव और देखभाल नहीं हो पा रहा है।

By: vishwanath saini

Published: 13 Mar 2018, 09:32 AM IST

 

रोलसाहबसर. गायों की देखरेख और सुरक्षा के नाम पर हर माह लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। कुछ प्रशासनिक मशीनरी तो कुछ निजी संस्थाओं द्वारा गायों के लिए खर्च करने और सुरक्षित करने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद गोवंश सडक़ों व बाजारों में दर-दर की ठोकरें खा रहा है। गायों को खाने के लिए न चारा है और न ही पीने के लिए पानी। गायों के सडक़ों पर विचरण करने के कारण सडक़ दुर्घटनाएं प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है। शहरों में भी आवारा पशुओं के कारण रोज यातायात बाधित हो रहा है। गायों की देखभाल के लिए सरकार की तरफ से प्रति वर्ष लाखों रुपए चंदे के रुप में गौशालाओं को दिए जाते हैं लेकिन फिर भी हालात सुधर नहीं रहे हैं।


लोगों की निजी रुचि के अभाव में गोवंश का सही रखरखाव और देखभाल नहीं हो पा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों पर वह बाजार में गोवंश का वितरण रोज देखा जा सकता है। इसके जिम्मेदार सामाजिक संगठन भी हैं जो बार.बार गायों की सुरक्षा के नाम पर विभिन्न निकाय और विभागों व जनता से चंदा एकत्रित करते हैं। इसके बावजूद गायों की स्थिति में सुधार नहीं आया है। दूसरी तरफ केंद्र व राज्य सरकार गायों की सुरक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे करने के साथ ही गौशालाओं में चारे के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं इसके बावजूद भी हजारों गाय धणी धोरी को को तरस रही हैं। भटकते गोवंश को अब किसान भी आवारा पशु मानने लगे हैं यह आवारा पशु कभी खेतों में तो कभी सडक़ पर विचरण करने लगा है यह आवारा पशु सडक़ों कही ट्रकों व बसों से कुचला जा रहा है तो कहीं भूखे.प्यासे दम तोड़ रहा है इनकी सुरक्षा के लिए ना तो प्रशासन ने ध्यान दिया और ना ही कभी सरकार ने कोई ठोस कदम उठाया।

 

govansh

गोशालाओं की टैग लगी गाये भी घूम रही है आवारा
क्षेत्र की विभिन्न गोशालाओं में पल रहे गोवशं के लिए संचालकों को अनुदान की राशि मिलने के बावजूद बेसहारा गोवशं को भटकने के लिए सडक़ों पर खुला छोड़ दिया जाता है। जहां सरकारी कागजों में ये गोवशं गोशालाओं में जरूर पल रहे है, लेकिन हहकीकत में ये सडक़ों पर यूं ही घूमते नजर आते है। खास तौर से फतेहपुर उपखण्ड पर कुछ ऐसे ही हालात है।


भूमि पर अतिक्रमण से बढ़ी समस्या
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है कि चारागाह भूमि पर कब से नहीं कर सकते है और यदि पूर्व में चारागाह भूमि पर कब्जे किए गए हैं तो राजस्व विभाग शीघ्र ही उन्हें हटाने के सख्त आदेश दे रखे हैं चारागाह पंचायत की धरोहर है जो पशुओं की चराई के लिए है लेकिन अब चारागाह की भूमि पर ही अतिक्रमणकारियों की नजरें टिकी हुई है दिनोंदिन इस भूमि गांव में पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे कर लेने के कारण अधिकांश गांव व शहरों में आवारा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

vishwanath saini Desk
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