यहां मनोकामना पूरी करने के लिए सिर पर जलती सिगड़ी रख कर आते है भक्त

यहां मनोकामना पूरी करने के लिए सिर पर जलती सिगड़ी रख कर आते है भक्त

Vinod Singh Chouhan | Publish: Apr, 10 2019 05:41:31 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

माता जीण को चुनड़ी ओढ़़ाने बत्तीसी संघ रवाना, पचलंगी पथवारी मेले में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

पचलंगी/नीमकाथाना. कस्बे के झड़ाया सडक़ मार्ग पर स्थित पथवारी माता का मंगलवार को मेला भरा। पापड़ा सीमा पर बत्तीसी संघ के पहुंचने पर मां जीण भक्तों ने कस्बे में संघ का जगह-जगह स्वागत किया। इससे पूर्व बाघोली में संघ की पूजा अर्चना की गई। संघ पचलंगी पथवारी मंदिर में पहुंचने पर संघ के प्रतिनिधि पुजारी रामवतार बडाडरा, लुणाराम कुमावत, गारक्ष धाम के बाबूलाल योगी, सरपंच आशा भावरिया, पांचू राम जागिड़, सुरेश चोटिया सहित महिलाओं व पुरूषों ने मंगल गीत व जीण माता के जयकारों के साथ संघ का स्वागत किया। राणासर, जोधपुरा, बाघोली, पापड़ा, पचलंगी व नयाबास, नीमकाथाना, सिरोही नारनौल तक के यात्रियों का एक जुट होकर रवाना होना ही बत्तीसी का संघ है। यह परम्परा सैकड़ो वर्षों से चली आ रही है। विशाल संघ चैत्र नवरात्री में छठ तिथि को जीणमाता धाम पहुंचता है। पौराणिक काल से चली आ रही परम्परा के अनुसार राणासर के राजपूत परिवार द्वारा चैत्र नवरात्र की छठ तिथि को रात्रि 12 बजे जीणमाता को चुनड़ी ओढ़ाने की रस्म अदा की जाती है। परिवार के ठाकुर कल्याणसिंह तंवर ने बताया कि यह परम्परा पौराणिक काल से चली आ रही है। जिसका निर्वाह परिवार द्वारा अब वे स्वयं कर रहे हैं। इस अवसर पर मशाल जलाये जाते हैं। संघ में जाने वाले लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए पैदल ऊँटगाडिय़ों में व सिर पर जलती हुई सिगड़ी लेकर जीणमाता धामतक पहुंचते हंै।
ऐसी होती है चुनड़ी की रस्म
संघ के मुख्य प्रतिनिधि कल्याण सिंह तंवर,शक्ति सिंह बाघोली,राजेश जोधपुरा ने बताया कि चैत्र नवरात्र की छट को संघ के अलग- अलग 21 प्रतिनिधि जामा चोरासी पहन कर ढफ ताल के साथ बजाते बत्तीसी के हरियाणा व राजस्थान दोनों राज्यों के प्रतिनिधि तलवार लेकर रात 12 बजे जीणमाता मंदिर मे पहुंचते हैं। ।जीणमाता मंदिर पुजारीयों की उपस्थिति में यह रस्म अदा होती है सप्तमी को सुबह बत्तीसी के संघ को पुजारियों द्वारा बाना दिया जाता है।
जीणधाम की ओर बढ़ रहे हैं जत्थे
जीणमाता. मेलो तो माड्यों म्हारी मावड़ी कोई आयो है संदेशों म्हारा पास, मैया क मेला चालस्या। लोकगीत की गूंज के साथ जीणधाम की ओर बढ़ते पदयात्रियों के छोटे-छोटे जत्थे चैत्र नवरात्री मेले की विशेष परम्पराओं के गवाह बन रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर दूर से पैदल चल कर आ रहे भक्तों के चेहरे जीणधाम की सीमा में आते ही चमकने लगते हैं बुधवार से बतीसी संघ के जत्थे भी जीणधाम पहुंचना शुरू हो जाएंगे। इस बीच जीणधाम की सभी धर्मशालाएं श्रद्धालुओं से भरी हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच अशोक ङ्क्षसह शेखावत ने बताया कि मेले में आने वाले भक्तों की विशेष भीड़ के लिए गुरूवार से पेयजल व रोशनी व बेरिकेट्स के अतिरिक्त इंतजाम किये जा रहे है।ं बतीसी संघ के भक्तों के ठहरने के लिए कोछोर तिराहे के पास सफाई व रोशनी की व्यवस्था करवा दी गई है वहीं जत्थों के साथ आने वाले पशुओं के लिए खेळी बनाकर अन्य आवश्यक व्यवस्था करवायी गई है। इस बीच संघ की व्यवस्थाओं के जिला प्रशासन की ओर नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। साथ ही मेला बैठक में बतीसी संघ द्वारा उठाई गई आपत्ति के निवारण के लिए भी प्रयास किये जायेगे। इस बीच सुरक्षा व्यवस्थाओं के मद्देनजर पुलिस उपाधीक्षक कमलसिंह चौहान मय रानाली थानाधिकारी मेला स्थल पर डेरा डाले हुये है।

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