अरे ये क्या! राजस्थान के नगर निकायों में लिपिक संभाल रहे हैं अधिशासी अधिकारी का दायित्व

Hey what Clerk is handling the responsibility of the executive officer

प्रदेश के 40 फीसदी से अधिक नगर निकायों में चहेतों के पास आयुक्त व अधिशासी अधिकारी का पदभार
नियम-कायदों को ताक पर रखा

By: Gaurav

Published: 26 Feb 2021, 06:35 PM IST

Hey what Clerk is handling the responsibility of the executive officer

‘कृपा’ से ‘अपात्र’ बन गए ‘पात्र’, संभाल रहे अरबों के सरकारी खजाने की चाबी

सीकर. प्रदेश के 40 फीसदी से अधिक नगर निकायों में अरबों के सरकारी खजाने की चाबी सरकार ने ‘कृपा पात्रों’ को सौंप रखी है। निकायों में आयुक्त व अधिशासी अधिकारी लगाने के मामले में सरकार ने अपने ही नियम-कायदों को ताक पर रखने के साथ उच्च न्यायालय (hight court) के आदेश पर भी गंभीर नहीं है। प्रदेश (rajasthan) के करीब आधे नगर निकायों में प्रमुख पदों पर स्वायत्त शासन विभाग ने कृपा पात्रों को आयुक्त या अधिशासी अधिकारी लगा रखा है। जबकि वेतन श्रृंखला के हिसाब से नगर परिषदों में आयुक्त का पद सीनियर आरएएस के समकक्ष होता है। कई नगर पालिकाओं में तो लिपिक व उसके समकक्ष कर्मचारी अधिशासी अधिकारी का दायित्व संभाल रहे हैं।


उच्च न्यायालय के आदेश पर भी गंभीरता नहीं
राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने पिछले दिनों एक याचिका पर कहा था कि अपात्र अधिकारी निकायों में आयुक्त नहीं बन सकेंगे। केवल राजस्थान नगर पालिका सेवा (प्रशासनिक एवं तकनीकी) नियम-1963 के अनुसार आयुक्त के रूप में परिभाषित योग्यताधारी को ही नियुक्त किया जा सकेगा। हाईकोर्ट ने कहा था कि विशेष परिस्थिति में आयुक्त से इतर किसी व्यक्ति को कार्यभार देने की अपरिहार्यता हो तो यह अवधि पंद्रह दिन से ज्यादा की नहीं होगी, लेकिन सरकार ने इस पर भी गंभीरता नहीं दिखाई है। स्वायत शासन विभाग ने कई निकायों में अपात्रों को जिम्मेदारी दे रखी है।


दो से चार अरब तक का निकायों का बजट
नगर निकायों का वार्षिक बजट दो से चार अरब का होता है। इसके अलावा अरबों रुपए की राशि केन्द्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में प्रति वर्ष प्रदेश के निकायों को मिलती है। महज अमृत योजना में सीकर समेत कई जिलों में दो सौ करोड़ के ज्यादा के कार्य हुए हैं। सीकर नगर परिषद बोर्ड ने इसी माह 3 अरब से ज्यादा का बजट पारित किया है। वित्तीय अधिकार की स्थिति देखे तो नगर परिषद आयुक्त और सभापति 50 लाख से ज्यादा रुपए खर्च कर सकते हैं। भूमि रूपांतरण, निर्माण स्वीकृति सहित विकास कार्यों की स्वीकृति की शक्तियां आयुक्त के पास होती है।


पात्रों को डी ग्रेड, अपात्रों को ए वन
स्वायत शासन विभाग की ओर से राजस्थान नगर पालिका सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति पर नजर डालें तो सामने आता है कि पात्र अधिकारी डी ग्रेड की नगर पालिकाओं में सेवा दे रहे हैं। जबकि आरआइ, टीए, जेईएन सहित सेनेट्री इंस्पेक्टर तक के अधिकारियों को कमिश्नर व आरओ तक के पद पर बैठाया गया है।


पदोन्नति को लेकर भी ढीलपोल
आयुक्त के पद पर पदोन्नति पर भी सरकार की ओर से ढीलपोल रवैया अपनाया जा रहा है। प्रदेश में आयुक्त के 46 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में 34 अधिकारी ही कार्यरत है। 12 पद लम्बे समय से खाली है, जिन्हें पदोन्नति से भरा जा सकता है, लेकिन सरकार इसे लेकर भी गंभीर नहीं है।

बानगी : किस निकाय में कौन संभाल रहा कमिश्नर/आरओ का पद
जालोर, सुमेरपुर, जैतारण, रानी, आबुरोड, शिवगंज - ओए
सांचोर - सेनेट्री इंस्पेक्टर
बाड़मेर- एआरआइ
नागौर- आरआइ
चूरू- टीए
जालोर- ओए
करौली- एईएन
हिंडौन सिटी- जेईएन
सिरोही- एक्सईएन
प्रतापगढ़- एक्सईएन
बांसवाड़ा- एक्सईएन


प्रदेशभर के नगर निकायों का गणित
प्रदेश में कुल निकाय - 213
नगर पालिका द्वितीय श्रेणी-18
नगर परिषद-34
नगर निगम-10
नगर पालिका तृतीय श्रेणी-58
नगर पालिका चतुर्थ श्रेणी-93

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