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राजस्थान में यहां गोशालाओं में रोका बाहरी चारा, ​खिला रहे आयुर्वेदिक लड्डू

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की तर्ज पर गोवंश में फैला लम्पी संक्रमण गोवंश पर कहर बनकर टूट रहा है। लम्पी संक्रमण के फैलने की गति को देखते हुए पशुपालकों में भय का माहौल वहीं गोशालाओं में संचालक रोकथाम के प्रयास में जुटे हुए है।

सीकर

Updated: September 14, 2022 11:34:59 am


प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की तर्ज पर गोवंश में फैला लम्पी संक्रमण गोवंश पर कहर बनकर टूट रहा है। लम्पी संक्रमण के फैलने की गति को देखते हुए पशुपालकों में एक ओर जहां भय का माहौल वहीं गोशालाओं में संचालक रोकथाम के प्रयास में जुटे हुए है। हाल यह है कि पशुपालन विभाग ने भी आयुर्वेद और होम्योपैथी दवाओं की दवाओं को लम्पी संक्रमण में कारगर मानना शुरू कर दिया है। अधिकांश गोशाला संचालकों ने जहां खेतों से आने वाले पशुचारे और अन्य खाद्य सामग्री पर रोक लगा दी है वहीं पशुओं पर निगरानी की दोहरी व्यवस्था शुरू कर दी है। खास बात यह है कि गोशाला संचालक अपने स्तर पर ही संक्रमण से बचाव के लिए एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी दवाओं की खरीद कर अपने पशुओं को खिला रहे हैं। गोशालाओं ने अपने पशुओं पर निगरानी रखने के लिए पशुपालन विभाग के अलावा निजी पशु चिकित्सकों की मदद ले ली है। जिसका नतीजा है कि प्रदेश के कई जिलों में कोहराम मचाने वाले लम्पी संक्रमण के कारण पशुओं की मृत्युदर कम है। यही कारण है कि जिले की 141 गोशालाओं में करीब 44 हजार से ज्यादा गोवंश होने के बावजूद इनमें से करीब दो प्रतिशत गोवंश ही लम्पी संक्रमण से ग्रसित हुआ है।

गेट पर छिडक रहे चूना पाउडर, कीटनाशकों का स्प्रे
जिला मुख्यालय की गोपीनाथ गोशाला के में दो हजार से ज्यादा गोवंश है। गोशाला के महामंत्री गोपाल सोमानी ने बताया कि लम्पी संक्रमण के फैलने पर करीब एक माह पहले ही वेक्सीनेशन करवा लिया। जिसका नतीजा हुआ कि गोवंश संक्रमण की चपेट में नहीं आया। अब इस गोवंश को बचाने के लिए संचालक मुख्य गेट और बाड़े में चूने के पाउडर और मक्खी मच्छरों से बचाव के लिए साइपर मेथ्रिन जैसे कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं। गोशाला के पशुओं को केवल फार्म पर होने वाला चारा ही खिलाया जा रहा है वहीं बाहर से आने वाले चारे पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गायों को रोटी, गुड व चारा हाथ से सीधे खिलाने की बजाए ठाण में खिलाने की अनिवार्यता लागू कर दी है।संक्रमित पशुओं के लिए आइसोलेशन सेंटर में अतिरिक्ति स्टॉफ को गायों की देखभाल के लगाया हुआ है। गोशाला संचालको ने पशुओं के लिए बाहर से हरा चारा आने पर रोक लगा दी है।
राजस्थान में यहां गोशालाओं में रोका बाहरी चारा, ​खिला रहे आयुर्वेदिक लड्डू
राजस्थान में यहां गोशालाओं में रोका बाहरी चारा, ​खिला रहे आयुर्वेदिक लड्डू
पशुपालकों में भय, खुद कर रहे प्रयास
पशुपालक रामस्वरूप और रामनाथ सैनी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों में लम्पी संक्रमण को लेकर भय बना हुआ। कई पशुपालक अपने पशुओं को बाहर चरने के लिए नहीं भेज रहे हैं। दूध की बिक्री के जरिए पेटपालने वाले कई पशुपालकों के सभी दूधारू पशुओं की मौत होने के कारण रोजी-रोटी का संकट हो गया है। संक्रमित पशुओं के दूध में तीस से चालीस प्रतिशत तक गिरावट आ गई है। दूधारू पशुओं की मौत होने के कारण दूध की आपूर्ति पर असर पड़ गया है। कई पशुपालकों को गोशाला या पशुपालकों की बजाए खुद के लिए डेयरी से दूध खरीदना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी दूध पीने वाले बछड़ा व बछड़ी को लेकर है। संक्रमण से प्रभावित होने का पूरा खतरा होने के बावजूद मजबूरी में इन्हें संक्रमित पशु का ही दूध पिला रहे हैं। वहीं संक्रमित पशु को दफनाने के लिए पशुपालक अपने स्तर पर व्यवस्था कर रहे हैं।

बढ़ा रहे इम्यूनिटी
पशुपालन विभाग के चन्द्रेश सिंह के अनुसार संक्रमित पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें नियमित रूप से काली मिर्च, हल्दी, सनाय पत्ता सहित अन्य जड़ी बूटियां की तय खुराक खिला रहे हैं। वायरल के असर से संक्रमित पशु में होने वाले बेक्टिरियएल इंफेकशन के लिए एलोपैथी दवाएं दी जाती है। पशुपालन विभाग की मोबाइल टीम के चिकित्सक नियमित रूप से तय गोशाला में जाते हैं और संक्रमित पशुओं की रिकवरी और दवाओं के लिए निर्देश देते हैं। सभी गोशालाओं में संक्रमण से रिकवर होने वाले पशुओं की क्वॉरंटीन सेंटर अलग से बनाया गया है। जहां पन्द्रह से बीस दिन बाद तक रखने के बाद ही नए पशुओं को अन्य पशुओं के साथ रखा जा रहा है।

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