स्वतंत्रता दिवस विशेष: देश के लिए जान देने वाले शहीदों के परिवार के साथ सरकार का ऐसा मजाक

स्वतंत्रता दिवस विशेष: देश के लिए जान देने वाले शहीदों के परिवार के साथ सरकार का ऐसा मजाक

Naveen Parmuwal | Publish: Aug, 14 2019 05:15:00 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

Independence Day Special Story : सैनिकों की शहादत के समय जब लोगों की भावनाएं उबलती है, तो नेता और सरकार तमाम घोषनाएं कर देती है।

सीकर.

Independence Day Special Story : सैनिकों की शहादत के समय जब लोगों की भावनाएं उबलती है, तो नेता और सरकार तमाम घोषनाएं कर देती है। लेकिन माहौल के शांत होते ही घोषणाओं पर अफसरशाही और सियासत के बादल छा जाते है। देश की हिफाजत में शहीद हुए जवानों के परिजनों ( Martyred Families ) की नौकरी में दोहरे मापदंड सामने आ रहे है। जिनकी वजह से 1971 से 1999 के बीच शहीद हुए राजस्थान के 470 में से केवल मात्र 171 शहीद आश्रित को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है।


गौरतलब है कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनावी साल शहीद परिवारों के आश्रितों को नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नौकरी की आस उलझ गई है। अब मजबूर परिवार नौकरी की आस में सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगाने को मजबूर है।



कारगिल युद्ध ( Kargil War ) के बाद राज्य सरकारों ने शहीद परिवारों की खैर खबर लेना शुरू किया। आश्रित को सरकारी नौकरी देने की घोषणा सन 2002 में कारगिल पैकेज के रूप में हुई। उसके बाद सरकार को कारगिल युद्ध से पूर्व के शहीदों की याद आई और आनन फानन में 1971 से 1999 के शहीद आश्रितों को 1971 के युद्ध के 37 वर्ष बाद एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का नियम सन 2008 में निकाला। लेकिन सता परिवर्तन के बाद शहीद परिवारों की नौकरी की आस अटक गई। पेचीदगीयों के चलते मात्र 171 परिवारों को ही नौकरी का लाभ मिला हैं। 1947 से 1970 तक शहीद आश्रितों को ब्लड रिलेशन के आधार पर नौकरी के आदेश जारी हो चुके है। अब 1971 से 1999 के बीच शहीद परिवार रिलेशन के आधार पर नौकरी की मांग उठा रहे हैं।


शहीद सम्मान यात्रा के दौरान हुई घोषणा
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में सैनिक बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर शहीद सम्मान यात्रा निकाली जो प्रदेश के हर शहीद परिवार तक पहुंची। आजादी के बाद से लेकर अब तक के शहीद सैनिकों के वंचित परिवारों से एक सदस्य को ब्लड रिलेशनशिप के आधार पर नौकरी देने की अनुशंसा की। सरकार ने 3 अक्टूबर 2018 को अधिसूचना जारी कर 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1970 तक के शहीद सैनिकों के परिवार से एक सदस्य को ब्लड रिलेशन के आधार पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी।


पहले नियमों ने ठुकराया
1971 से 1999 तक मिली नियुक्तियों में भी 37 वर्ष बाद नियम निकलने की वजह से बहुत से परिवार नियमों की विसंगतियां के चलते नौकरी से वंचित रह गए। जिनमें शहीद पुत्र की आयु अधिक होने से परिवार सरकारी नौकरी से वंचित रह गए। दत्तक पुत्र नियमों में शामिल नहीं था, जिससे निसंतान शहीद सैनिक के परिवार नौकरी से वंचित रह गए। शहीद के अविवाहित होने पर भाई बहन को नौकरी देने का नियम नहीं था। वीरांगना के पुनर्विवाह विवाह करने के कारण उन वीरांगनाओं की संतानों को नौकरी देने का नियम नहीं होने के कारण बहुत से परिवार वंचित रह गए।

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