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बस दो कदम दूर...प्रदेश की सरकारी स्कूलें होंगी करोड़पति

 

शिक्षा विभाग ने जारी की रिपोर्ट : 98 लाख तक पहुंचा नामांकन

 

जोधपुर, जयपुर व अलवर की सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा बढ़ा नामांकन, प्रतापगढ़ व झुंझुनूं फिसड्डी

इस साल अब तक प्रदेश में साढ़े नौ लाख बढ़ा नामांकन

सीकर

Published: October 21, 2021 08:08:26 pm

अजय शर्मा

सीकर. प्रदेश की सरकारी स्कूलें नया रेकॉर्ड कायम करने से बस दो कदम दूर हैं। सरकारी स्कूलों का नामांकन 98 लाख तक पहुंच गया है। पिछले सत्र में यह आंकड़ा 8959000 था। इधर, शिक्षा विभाग की टीम दीपावली तक नामांकन को एक करोड़ तक पहुंचाकर खुशियों की आतिशबाजी करने का दावा कर रही है। दरअसल, कोरोनाकाल में कई परिवारों की बिगड़ी आर्थिक स्थितियों ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों को बड़ी संजीवनी दी है। इस साल अब तक सरकारी स्कूलों के नामांकन में साढ़े नौ लाख की बढ़ोतरी हो चुकी है। अभी भी 50 हजार का नामांकन और बढऩे की संभावना है। दीपावली के बाद नामांकन के अंतिम आंकड़े आने पर पिछले कई सालों का रेकार्ड टूटने की उम्मीद जताई जा रही है।
50 हजार विद्यार्थियों का डेटा होना है फीड
50 हजार विद्यार्थियों का डेटा होना है फीड
सबसे ज्यादा 11 वीं में बढ़ा नामांकन

सबसे ज्यादा नामांकन 11 वीं कक्षा में बढ़ा है। इस साल 11 वीं में दो लाख 22 हजार का नामांकन बढ़ा है। जबकि सबसे कम नामांकन कक्षा दो में 4200 ही बढ़ सका है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अमूमन साढ़े चार से छह लाख तक नामांकन बढ़ता है।
इन तीन जिलों में 50 हजार का आंकड़ा पार

नामांकन बढ़ाने में प्रदेश के तीन जिलों ने फिफ्टी लगाई है। इसमें जोधपुर ,जयपुर और अलवर जिला शामिल है। इसके अलावा 11 जिलों में 20 से 32 हजार तक का भी नामंकन बढ़ा है।
प्रतापगढ़ और झुंझूनूं में 12 हजार की बढ़ोतरी

प्रदेश में सबसे कम नामांकन प्रतापगढ़ और झुंझुनूं जिले में बढ़ा है। इन दोनों जिलों में 12-12 हजार का ही नामांकन बढ़ा है। जबकि शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर में नामांकन 21 हजार बढ़ा है।
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नामांकन बढऩे की 4 बड़ी वजह

1. आर्थिक मजबूरी

कोरोनाकाल में हजारों परिवारों को आर्थिक नुकसान हुआ। कई लोगों की नौकरी चली गई तो कई लोगों के वेतन में कटौती हुई। ऐसे परिवारों ने बच्चों का निजी के बजाय सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवाया। ऑनलाइन कक्षाओं के बाद भी निजी में पूरी फीस चुकाने सहित अन्य कारणों की वजह से सरकारी स्कूलों का सहारा लिया।
2. कोरोना गाइडलाइन

जो बच्चे गांव-ढाणियों से शहरों में पढऩे आते हैं उनमें से सैकड़ों विद्यार्थियों ने भी लॉकडाउन के समय में नजदीक के स्कूलों में दाखिला लिया। वहां की पढ़ाई से संतुष्ट होने पर अगली कक्षा में प्रमोट होने पर उसी स्कूल में पढ़ाई जारी रखी।
3. सरकारी स्कूलों में नवाचार

सैकड़ों सरकारी स्कूलों ने वाहन सुविधा के साथ डे्रस सहित अन्य नवाचार किए हैं। इन नवाचारों की वजह से सरकारी स्कूलों के प्रति आमजन में सोच भी बदली है। कोरोना में बच्चों के प्रमोट होने का असर भी नामांकन पर आया है।
4. प्रवासी कामगार

आठ लाख से अधिक कामगार लॉकडाउन के दौरान अपने गांव और शहर आ गए। इनमें से ज्यादातर लोग परिवार को अपने गांव ही छोड़ गए।

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सरकारी स्कूल समाज का विश्वास जीतने में सफल: शिक्षा मंत्री
पहली बार सरकारी स्कूलों में वार्षिकोत्सव व खेल सामग्री के लिए अलग से बजट दिया। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश लेने वालों की लंबी प्रतीक्षा सूची है। सरकारी स्कूल समाज का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं। कोरोनाकाल में भी शिक्षकों ने जिस तरह मेहनत की उसी का नतीता है कि हम साढ़े नौ लाख का नामांकन बढ़ाने में सफल रहे हैं।
गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षामंत्री

एक्सपर्ट व्यू: इस परम्परा को निभाने का शिक्षक लें संकल्प

कोरोनाकाल में भी ग्रामीणों व भामाशाहों ने काफी उत्साह दिखाया। इससे सरकारी स्कूलों में काफी नवाचार हुए हैं। विभाग ने निजी स्कूलों की तर्ज पर ऑनलाइन कक्षाएं भी चलाई। प्रदेशभर में सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर देने की स्थिति में है। अब मासिक टेस्ट के साथ समुदाय से बेहतर जुड़ाव की दिशा में काम करना है। शिक्षकों को इस परम्परा को और आगे बढ़ाने का संकल्प भी लेना होगा।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत

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