खजूर की खेती से मालामाल हो रहा सीकर का यह किसान, जानिए इसकी तकनीक

खजूर की खेती से मालामाल हो रहा सीकर का यह किसान, जानिए इसकी तकनीक

vishwanath saini | Publish: Sep, 05 2018 12:55:50 PM (IST) Sikar, Rajasthan, India

www.patrika.com/sikar-news/

पूरण सिंह शेखावत
सीकर. गहराते जल संकट और खेती में बढ़ती लागत को देखकर धोद इलाके के एक किसान नेमीचंद शर्मा ने रेत के धोरों में पानी की एक-एक बूंद सींचकर 5 बीघा भूमि में खजूर का बाग तैयार कर लिया। महज तीसरे साल में खजूर का बम्पर उत्पादन हासिल कर किसान आस-पास के क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गया है। अतिदोहित क्षेत्र में होने के कारण यहां बागवानी किसी सपने से कम नहीं है। किसान ने बताया कि चार वर्ष पहले उसने पांच बीघा में 15 पौधे खजूर के लगाए तो दूसरे किसानों और लोगों ने कहा कि पीने के पानी के लिए पूरा इलाका तरस रहा है। यहां क्या बाग लगेगा। लेकिन धुन के पक्के नेमीचंद ने किसी की परवाह न करते हुए पौधों की परवरिश की। हालांकि खजूर की खेती के लिए सीकर जिले में किसानों को अनुदान नहीं दिया जाता है।


बूंद-बूंद से बाग तैयार
किसान ने बताया कि इजराइल की ड्रिप सिस्टम पद्धति से बाग खड़ा करने के बाद बड़े पौधे होने पर भी ड्रिप से ही पौधों को सिंचित किया जा रहा है। बूंद-बूंद पानी से सिंचित होने वाले पौधे अच्छी आमदनी देने लगे हैं। फल के गुच्छों को पक्षियों से बचाव के लिए कपड़े की थैलियों से ढककर रखते हैं।

यूं तैयार किया खेत
बकौल किसान उसने सबसे पहले 2750 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से गुजरात से बरफी खजूर किस्म का पौधा मंगवाया। किसान का दावा है कि क्लोन पद्धति से तैयार इस किस्म को लगाने पर किसान को किसी प्रकार की दवा या उर्वरक की जरूरत नहीं होती है। साथ ही इससे तैयार खजूर में गुठली का आकार विदेशी किस्म की बजाए छोटा होता है और कच्चे फल का स्टोरेज 15 दिन तक किया जा सकता है।


लाखों की आमदनी
बाजार भाव में खजूर के दाम अच्छे मिल रहे हैं। 50 से 100 रुपए किलो तक खजूर बिक रहे हैं। किसान ने बताया कि खजूर के पौधों के बीच गेहूं, सरसों, चना के अलावा ग्वार, मूंग और दूसरी फसलों की बिजाई की जा रही है।

25 किलो तक के फलों के गुच्छे

तीन साल पहले खजूर के पौधों पर फलों के गुच्छे लगने शुरू हुए तो रेत के धोरों में मिठास का अनुभव किया। आसपास के लोग उसका बाग देखने आने लगे। तीन साल पहले पौधों पर मीठे फलों के गुच्छे लगने पर फसल के साथ अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। अब तक एक पौधे पर 5 से 25 किलो वजन के खजूर के गुच्छे लग रहे हैं। खजूर के पौधे की उम्र कम से कम 100 साल होती है। ज्यों-ज्यों पौधा बड़ा होता है, फलों के गुच्छे का वजन भी बढ़ता रहता है।

गहराते जल संकट के दौरान खजूर की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा। इससे किसान की आय भी बढ़ जाएगी साथ ही जमीन का पूरा उपयोग होगा।
एसआर कटारिया, उपनिदेशक कृषि खंड सीकर

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