सावधान ! प्रदेश में फैल रहे खुरपका मुंहपका रोग से पशुपालन विभाग में हडक़ंप, 6 बार अभियान चलाने के बाद भी नहीं आया काबू में

Vinod Chauhan

Publish: Feb, 15 2018 02:02:13 PM (IST)

Sikar, Rajasthan, India
सावधान ! प्रदेश में फैल रहे खुरपका मुंहपका रोग से पशुपालन विभाग में हडक़ंप, 6 बार अभियान चलाने के बाद भी नहीं आया काबू में

प्रदेश में पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के खुरपका- मुंहपका( एफएमडी) रोग से निदान के लिए अब तक छह बार अभियान चलाया जा चुका है।

सीकर.

प्रदेश में पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के खुरपका- मुंहपका( एफएमडी) रोग से निदान के लिए अब तक छह बार अभियान चलाया जा चुका है। इसके बावजूद प्रदेश में हर वर्ष इस रोग के कई मामले सामने आ रहे हैं। सीकर शहर, चंदपुरा, दासा की ढाणी सहित कई इलाकों में पशुओं में यह बीमारी फैल रही है। पॉली क्लिीनिक में एफएमडी के पीडि़त पशुओं को पशुपालक उपचार के लिए ला रहे हैं। केन्द्र सरकार की ओर से हर साल रोग नियंत्रण के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन पशुओं की संख्या की तुलना में लक्ष्य कम दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण पड़ोसी राज्य हरियाणा व पंजाब से बड़ी संख्या में पशु प्रदेश में लाए जा रहे है। उन पशुओं के साथ ही एफएमडी रोग पहुंच रहा है। रोगी पशुओं से सामान्य पशुओं में भी इस बीमारी का प्रकोप बढऩे का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि सीकर जिले में 16 फरवरी से जिले में छह लाख 60 हजार पांच पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।


स्टेन बदलने के कारण प्रकोप
एफएमडी का वायरस स्टेन बदलने के कारण खतरनाक रूप ले रहा है। हर साल सीकर जिले में पांच से छह हजार तक पशु एफएमडी के चपेट में आ रहे हैं। पशु चिकित्सकों की माने तो एफएमडी टीकाकरण के लिए रिंगनुमा क्षेत्र निर्धारित किया जाता है। जिससे रिंग के दायरे में आने वाले पशु बीमारी से मुक्त हो गए। चिकित्सकों ने बताया कि अब जब कई इलाकों में एफएमडी का प्रकोप नजर आ रहा है। उस इलाके में टीकाकरण होने पर रोग तेजी से फैलेगा। इस कारण टीकाकरण प्रभावी नहीं होगा। वहीं कई जगह तो टीकाकरण के लिए सिरिंज नहीं पहुंच पाई है। ऐसे मे राष्ट्रीय अभियान प्रभावित होगा।


मौसम में यह रोग बढऩे का खतरा
पशुओं में खुरपका मुंहपका रोग का कारण एक वायरस होता है। यह रोग किसी भी उम्र की गाय, भैंस, भेड़ बकरी व उनके बच्चों में हो सकता है। इसके लिए कोई मौसम निश्चित नहीं है। अत्यधिक सर्दी व अत्यधिक गर्मी के मौसम में यह रोग बढऩे का खतरा होता है। यह रोग खतरनाक है। इससे पशुओं की मौत भी हो जाती है। इस रोग की चपेट में आने वाले दुधारू पशुओं का दूध सूख जाता है।


कैसे मिले योजनाओं का लाभ, लक्ष्य दूर
केंद्र सरकार की ओर से दुधारू पशुओं की टैगिंग के लिए शुरू किया अभियान अपने लक्ष्य से कोसो दूर है। पशु पालन विभाग की आधी अधूरी तैयारियों के कारण लक्ष्य हासिल करना तो दूर की बात है, दो माह बाद भी महज साढ़े छह हजार पशुओं का ही पंजीयन हो पाया है। इस वजह से पशुओं को यूनिक आईडी नहीं मिल पा रही है। पशुपालकों को योजनाओं के जरिए लाभ दिलाने की मंशा भी पूरी नहीं हो रही है। गौरतलब है कि एक दिसम्बर 2017 को सीकर जिले में दो लाख 97 हजार 780 दुधारू पशुओं की टैगिंग का लक्ष्य दिया गया था।


शुरू से परेशानी
केन्द्र के निर्देश पर विभाग ने पशुओं के लगाने के लिए टैग तो भेज दिए, लेकिन टैगिंग मशीन ही नहीं भेजी। इस कारण पशुओं की टैगिंग नहीं हो पाई। बाद में टैगिंग शुरू हुई, लेकिन टैगिंग के बाद कैसे फायदा मिलेगा इसकी गाइड लाइन ही नहीं आई। विभागीय अधिकारियों की माने तो लक्ष्य को देखते हुए कर्मचारियों ने अपने परिचित लोगों के पशुओं के टैग तो लगा दिए, लेकिन आने वाले दिनों में अन्य पशुओं की टैगिंग में परेशानी आएगी।


यह थी योजना
टैगिंग के आधार पर दुधारू पशुओं को आधार कार्ड की तरह ही यूनिक टैग नंबर दिए जाएंगे। यूनिक नम्बर मिलने से पशु का पूरा ब्यौरा कम्प्यूटर में एक क्लिक पर सामने आ जाएगा। एक यूनिक नम्बर होने से पशुओं की तस्करी और चोरी पर अंकुश लग जाएगा। गायों में कृ त्रिम गर्भाधान करवाया जा रहा है। ताकिदुधारू और अच्छी नस्ल की गाय तैयार हो सके। केन्द्र सरकार पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ टैग वाले पशुओं को देने का है। इसके लिए प्रतिदिन एक व्यक्ति को 5 पशुओं की टैगिंग करनी थी।


जिले मे एफएमडी सीपी के तहत 26 फरवरी से 26 मार्च तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के लिए जरूरी दवा और सिरिंज आ चुकी है। संस्था के क्षेत्र में 100 प्रतिशत टीकाकरण के लिए कर्मचारियों को पाबंद किया गया है। -डॉ. रसीद अहमद चौहान, नोडल अधिकारी पशुपालन
विभाग सीकर


यूनिक आईडी लगाने के लिए टैगिंग मशीन ही पिछले पखवाड़े में आई है। इस कारण टैगिंग का कार्य प्रभावित हुआ है। इसके अलावा टैग भी कम रहने के कारण लक्ष्य प्रभावित हुआ है। कुछ पशुपालकों में टैग लगाने के बाद दूध सूखने की भ्रांति के कारण परेशानी आ रही है। -बीएल झूरिया, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग सीकर

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