हवा ने दिया साथ...पतंगबाजों ने जमकर लड़े हवाई युद्ध

By: vishwanath saini

Published: 15 Jan 2018, 06:25 PM IST

Sikar, Rajasthan, India
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सीकर. अलसुबह ही युद्ध के मैदान सज गए! पतंगबाज अपने हथियारों के साथ मोर्चे पर डट गए। हाथों में चरखियां! पतंगों के ढेर! विशेष रणनीतियां बनाई गई! व्यूह रचे गए...और शुरू हो गया दंगल। अलसुबह मोर्चे पर डटे योद्धाओं ने दिनभर हवा में युद्ध लड़े। इन पतंगबाजों की वेशभुषा भी विशेष नजर आई। सिर पर टोपी...गर्म कोट...चद्दर...और भी सर्दी से बचने के कई उपाय। रविवार को सीकर का आसमां पतंगों से आच्छादित रहा।

 

हालांकि सुबह हवा की कम रफ्तार से योद्धा कुछ बैचेन रहे, लेकिन दिन चढऩे के साथ ही हवा ने पतंगबाजों का खूब साथ दिया। दिनभर वो काटा-वो मारा और म्यूजिक के बीच पेच काटने के साथ पतंगबाजों का हौसला भी परवान पर रहा। सुबह की चाय और दोपहर का खाना भी छतों पर ही हुआ। आकाश में ही नहीं बल्कि गली, चौराहे, सडक़ों, तारों, खंबों और पेड़ों तक रंगबिरंगी पतंगें लबालब भरी रही। तेज म्यूजिक के साथ दिनभर पतंगबाज दावपेच आजमाते रहे। दिन चढ़ते तक तो सारा शहर ही सब काम-धंधे छोडकर छतों पर आ जुटा।

 

 

क्या बच्चा, जवान, बुजुर्ग और क्या युवती, हर किसी ने बिंदास होकर पतंगबाजी का लुत्फ उठाया। पतंग काटते ही चीखो-पुकार के साथ जश्न मनाया गया। अगर पतंग कट जाती तो मायूस होने की बजाए और जोश के साथ दूसरी पतंग आकाश पर चढ़ा देते। प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद चाइनीज डोर पर कोई बंदिश न रही। हर किसी के हाथ में चाइनीज डोर की चरखी नजर आई। शहर में भी चारों ओर चाइनीज डोर का जाल बिछा रहा जिसमें राहगीरों एवं दोपहिया वाहन चालकों को बड़ा संभलकर चलना पड़ा। मकर संक्रांति का उल्लास शहर में हर जगह नजर आया। मंदिरों में दर्शन...मांगने वालों को खैरात का दौर भी दिनभर चला।

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