इस वायरल बीमारी से डॉक्टर भी हैरान, अगर शरीर में दिखने लगे ये लक्षण तो हो जाए सतर्क !

Ortho Viral Fever : बदलते मौसम के साथ ही इस बार सर्दी जुखाम और बुखार ( Cold and Fever ) के जनक वायरस का स्वरूप बदल गया है। वायरस का स्वरूप बदलने से मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं चिकित्सक भी इस बदले वायरस के कारण हतप्रभ है।

सीकर.

बदलते मौसम के साथ ही इस बार सर्दी जुखाम और बुखार ( Cold and fever ) के जनक वायरस का स्वरूप बदल गया है। वायरस का स्वरूप बदलने से मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं चिकित्सक भी इस बदले वायरस के कारण हतप्रभ है। चिकित्सकों ने बताया कि सर्दी और जुखाम के लिए सामान्यत पांच दिन की दवा की खुराक दी जाती है लेकिन वायरस बदलने से मरीजों को 15 से 30 दिन तक जोड़ों के दर्द के दवा लेनी पड़ रही है। यही कारण है कि चिकित्सकों ने इस बीमारी को आर्थो फीवर ( Ortho viral Fever ) का नाम दे दिया है और इसके आधार पर ही मरीज का उपचार ( Patient treatment ) किया जा रहा है। गौरतलब है कि तापमान में गिरावट आने के बाद भी सरकारी और निजी अस्पताल अभी मरीजों से अटे हुए है जबकि सर्दी की शुरूआत के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम हो जाती है।


चिकनगुनिया और आर्थोफीवर के लक्षण
चिकनगुनिया ( Chikungunya ) और बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं। बुखार के कारण आमतौर पर भी मरीज के शरीर में दर्द होता है, लेकिन चिकनगुनिया से पीडि़त व्यक्ति के पूरे शरीर में काफी दर्द रहता है। मरीज का पूरा शरीर दर्द से टूट रहा होता है। सबसे ज्यादा तकलीफ जोड़ों के दर्द के कारण होती है।डेंगू में दर्द अधिक होने की वजह से ब्लिडिंग और सांस लेने में भी दिक्कत आ सकती है।


डेंगू का वायरस चिकनगुनिया के वायरस से ज्यादा खतरनाक होता है। डेंगू में लगातार गिरते प्लेटलेट्स की वजह से व्यक्ति को बेहद कमजोरी महसूस होती है। जबकि चिकनगुनिया से व्यक्ति 1 से 12 दिन तक पीडि़त रहता है। इसकी वजह से शरीर में कई सालों तक दर्द बना रहता है। चिकनगुनिया के मरीज को जोड़ों में तेज दर्द होता है। यही दर्द डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों को लक्षणों में एक-दूसरे से अलग करता है। कुछ लोगों को इस दर्द से राहत पाने में 6 महीने से 1 साल तक का समय लग जाता है। चिकनगुनिया में हथेलियों और पावों के साथ पूरे शरीर पर रेशैज हो जाते हैं। वहीं, डेंगू में चेहरे और चमड़ी पर लाल रेशैज होते हैं। चिकनगुनिया वायरस का सीधा असर जॉइंट्स पर होता है। जिसकी वजह से लोग दर्द से बेचैन हो जाते है।


आयुर्वेद में उपचार
आयुर्वेद चिकित्सक मधुसूदन जोशी के अनुसार औषधीय गुणों से भरी तुलसी का प्रयोग अमृत के समान है। नीम की गिलोय, सोंठ, छोटी पीपल और गुड़ के साथ तुलसी का काढ़ा बनाकर रोगी को पीने के लिए दें। केवल 3 खुराक में यह घरेलू दवा चिकगुनिया के रोगी को इस बीमारी से छुटकारा दिला सकती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। गिलोय और 7 तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह प्लेटलेट्स का स्तर भी बढ़ाता है। गिलोय की कड़वाहट को कम करने के लिए इसे किसी अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं।


यह सही है कि इस बार बुखार ठीक होने के कई दिन तक जोडों में दर्द की शिकायत वाले मरीज बढ़े हैं। ऐसे मरीजों में हड्डियों व ज्वाइंट में दर्द रहता है। इस प्रकार के मरीज पहली बार सामने आ रहे हैं। वहीं कम तापमान होने के बाद भी डेंगू के मरीज आ रहे हैं। -डा. रघुनाथ चौधरी, फिजीशियन

Show More

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned