मनमर्जी: बिना नोटिस बिजली निगम काट रहा कनेक्शन

गरीब उपभोक्ताओं पर दोहरी मार, कनेक्शन जुड़वाने के लिए भी देना पड़ता है चार्ज

By: Suresh

Published: 17 Mar 2021, 06:10 PM IST

फतेहपुर. एक तरफ तो उपभोक्ता बढ़ी हुई बिजली की दरों से तो परेशान है। वहीं अब बिजली विभाग की मनमर्जी से कई उपभोक्ताओं की परेशानी भी बढ़ रही है। बिजली के बिलों में मार्च में टारगेट का हवाला देकर बिजली विभाग के कर्मचारी रोजाना दर्जनों उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट रहे है। नियमानुसार सात दिन का नोटिस दिए बगैर कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जा सकता है लेकिन नियमों को ताक पर रखकर बिजली विभाग के अधिकारी रोजाना कनेक्शन काट रहे है।

इस खेल में रसूखदार लोग तो बच रहे है लेकिन गरीब उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण इलाकों मे जिन लोगों का 500 रुपए से अधिक व शहरी इलाकें में जिन लोगों का 1000 रुपए से अधिक का बिजली का बिल बकाया है उन उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन बिना किसी पूर्व नोटिस के काटा जा रहा है। इसके बाद बिल जमा करवाने व कनेक्शन जुड़वाने की फीस जमा करवाने पर कनेक्शन वापस जोड़ा जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन लोगों पर अत्यधिक राशि बकाया है उनके कनेक्शन नहीं काटे जा रहे है व जिन लोगों के कम बकाया है उनका कनेक्शन काटा जा रहा है। ऐसे में आम व गरीब उपभोक्ता पर खासा असर देखने को मिल रहा है। कनेक्शन जुड़वाने को लेकर उपभोक्ता को 200 रुपए की रसीद कटवानी जरूरी है। खास बात यह भी है कई उपभोक्ताओं तक तो बिजली का बिल पहुंच भी नहीं रहा है उसके बाद भी उनका कनेक्शन काटा जा रहा है।
विभाग का तर्क: फोन कर दे रहे है सूचना
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता अजीतपाल का कहना है कि उपभोक्ताओं को फोन करके सूचना दी जा रही है। दस महिने किसी के कनेक्शन नहीं काटे थे अब मार्च चल रहा है लोग बिल जमा नहीं करवा रहे है। नियम तो कई है।
उपभोक्ताओं का दर्द
विभाग के द्वारा बिल जमा नहीं करवाने पर कनेक्शन काटने के संबंध में उपभोक्ताओं का कहना है कि कनेक्शन काटने से पहले किसी तरह की सूचना नहीं दी जा रही है। इसके बाद कनेक्शन जुड़वाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
आरोप: गांवों में बिल घरों तक नहीं पहुंचते
बिजली के बिलों को लेकर आ रही शिकायतों के मध्यनजर पत्रिका ने पड़ताल की तो कई जानकारी सामने आई। गांवों में तो आम उपभोक्ता तक बिजली का बिल ही नहीं पहुंच पाता है। बिल वितरण करने वाले लोग गांव में किसी दुकान पर एक साथ बिल रख कर आ जाते है, दुकानदार के सामने व्यक्ति आता है तो उसे बिल दे दिया जाता है। जो सामने नहीं आता उसका बिल वही रह जाता है। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिल ही नहीं पाता है। जब उसका कनेक्शन काटने टीम आती है तो पता चलता है कि इस महीने का बिल बकाया है।

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