विवादों के बीच खाटूश्यामजी मेले की बैठक आज, संक्रमण बड़़ी चुनौती

खाटूश्यामजी. खाटू के लखदातार के दरबार में श्याम भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। मेले के दौरान कड़ी गाइड लाइन की घोषणा के चलते श्रद्धालु पहले ही बाबा के दरबार में निशान अर्पित करने में लगे हैं।

By: Sachin

Published: 05 Mar 2021, 09:21 AM IST

सीकर. खाटूश्यामजी. खाटू के लखदातार के दरबार में श्याम भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। मेले के दौरान कड़ी गाइड लाइन की घोषणा के चलते श्रद्धालु पहले ही बाबा के दरबार में निशान अर्पित करने में लगे हैं। ऐसे में दिन-प्रतिदिन बढ़ती भीड़ प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। एक जरा सी 'चूकÓ यहां कोरोना के संक्रमण को घातक बना सकती है। जिसका असर ना केवल खाटू कस्बे पर होगा। बल्कि देश के सभी कोनों पर नजर आएगा। अब तक की व्यवस्थाओं और इंतजामों की स्थिति देखे तो हर जगह संक्रमण को फैलाने वाली 'चूकÓ नजर आ रही है, जिसे पाटना जिम्मेदारों के वश में नजर नहीं आता है। प्रशासन और जिम्मेदार भले ही गाइड लाइन की पालना करवाने के बड़े दावे करें, लेकिन हकीकत है कि मेले में आस्था का ज्वार श्याम के भरोसे ही आगे बढ़ता है। मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े रहे प्रशासनिक और पुलिस के आला अधिकारी भी यह बात स्वीकार करते रहे हैं। इन अधिकारियों ने पत्र भेजकर समय-समय पर सरकार को भी स्थिति से अवगत करवाया है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

जिगजैग में कैसे रोंकेंग सक्रमण का फैलाव

खाटूश्याम के पिछले वर्ष के मेले के आंकड़ों की स्थिति देखे तो दस दिन में 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। श्रद्धालुओं का आगमन कस्बे में चारों तरफ से होता है। मुख्य रूप से श्रद्धालु रींगस से पदयात्रा करते हुए आते हैं। खास बात यह है कि श्रद्धालु कतार बद्ध ना होकर जत्थों के रूप में श्याम के दरबार में पहुंचते हैं। इन श्रद्धालुओं को चारण मैदान और श्याम बगीची (मुख्य मेला ग्राउंड) में करीब 15 किलोमीटर के जिगजैग से गुजरना पड़ता है। यह जिगजैग बल्लियों और लोहे की पाइप का बना होता है। एक भी संक्रमित व्यक्ति इस जिगजैग में घुस गया तो संक्रमण बेकाबू हो जाएगा।

जांच रिपोर्ट और श्रद्धालुओं की संख्या की कैसे होगी पालना
प्रशासन ने श्याम दर्शन के लिए 72 घंटे पहले की कोरोना जांच आवश्यक की है। खाटू में दर्शन करने के लिए कोलकाता, असम, मुंबई सहित देश के लगभग सभी हिस्सों से श्रद्धालु मेला शुरू होने से पहले ही आ जाते हैं। यह श्रद्धालु दो से तीन दिन का रेल व दूसरे वाहनों से सफर कर खाटू पहुंचते हैं। ऐसे में यह जांच करवा कर भी वहां से आते हैं तो कई श्रद्धालुओं का 72 घंटे का समय तो ट्रेन में ही बीच जाता है। ऐसे में अगर वे सफर के दौरान संक्रमित होकर खाटू पहुंचते हैं तो उनकी जांच रिपोर्ट का क्या फायदा होगा। दूसरा जांच के लिए मेले के दौरान चिकित्सकों की टीम तैनात करने का दावा किया गया है, लेकिन हजारों की संख्या में बाहर से श्रद्धालुओं ने खाटू आकर धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है। उनकी जांच अब कैसे हो सकेगी। इसके अलावा एप के माध्यम से 25 हजार श्रद्धालुओं को ही एक दिन में दर्शन करवाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन पहले के अनुभव देखे जाए तो एकादशी को श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख से ज्यादा होती है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित कैसे किया जा सकेगा। गत एकादशी को भी ऑफ लाइन दर्शन करवा कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया था।


भंडारों पर प्रतिबंध, विकल्प कमजोर

खाटू के मेले में श्रद्धालुओं की सेवा की व्यवस्था सामाजिक संस्थाओं की ओर से भंडारे लगाकर की जाती रही है। लेकिन इस बार भंडारों की प्रशासन की ओर से स्वीकृति नहीं दी गई है। इसके अलावा धर्मशालाओं में चलने वाले भंडारे में भी वहां ठहरने वाले लोगों को ही भोजन करवाने के लिए ही पाबंद किया गया है। लेकिन प्रशासन ने श्रद्धालुओं के भोजन के लिए दूसरा कोई विकल्प तय नहीं किया है। ऐसे में भोजन की तलाश में श्रद्धालुओं को इस बार भटकना पड़ेगा। हालांकि भंडारा लगाने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं इस बार गाडिय़ों में पैकेट बांटने की योजना बना रही है। संस्थाओं से बातचीत में ऐसा सामने आया है।


अव्यवस्थित बाजार बढ़ाएगा परेशानी
खाटू मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग कारोबार करने भी आते हैं। इनके लिए हर बार पंचायत की ओर से दुकानों का अलॉटमेंट किया जाता है। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार नहीं किया गया। लेकिन सैकड़ों की संख्या में फुटकर व्यापारी खाटू पहुंच चुके हैं। वे वहां पर दुकानों के लिए जगह तलाश रहे हैं। कई लोगों ने अपने स्तर पर अपनी दुकान या मकान के सामने उन्हें दुकान लगाने के लिए सरकारी जमीन किराए पर दे दी है। दुकानें सज जाने पर उन्हें हटाना वहां की पालिका के वश में भी नहीं रहेगा।


सुरक्षा ढांचा पहले से कमजोर

खाटू मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखा जाए तो सुरक्षा का ढांचा पहले से कमजोर है। सीकर में पुलिस अधीक्षक रहे गौरव श्रीवास्तव, अखिलेश कुमार सहित कई पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने सरकार को लिखित में पत्र भेजकर इससे अवगत करवाया गया है। अब तक की स्थिति देखे तो 30 से 35 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति वाले इस मेले में पुलिस की ओर से ढाई से तीन हजार जवान तैनात किए जाते हैं। इन जवानों की तैनाती तीन सिफ्टों में होती है। ऐसे में
व्यवस्था में स्काउट, एनसीसी के जवानों के साथ श्याम भक्त संभालते हैं। स्काउट और एनसीसी की जवानों के साथ पिछले वर्ष मंदिर कमेटी की ओर से निजी कंपनी के बाउंसर भी तैनात किए गए थे। दूसरा डोर मेटल डिटेक्टर के साथ हैंड मेटल डिटेक्टर से भी श्रद्धालुओं की जांच की जाती रही है। इस बार हैंड मेटल डिटेक्टर से जांच भी कोरोना का कारण हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा कमजोर हो सकता है।


प्रशासन आज खीेंचेगा मेले का खाका

श्याम वार्षिक फाल्गुन मेला खाटूश्यामजी की व्यवस्थाओं को लेकर मेला मजिस्ट्रेट कार्यालय में शुक्रवार को दोपहर एक बजे बैठक होगी। जिला कलक्टर अविचल चतुर्वेदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे। एडीएक धारासिंह मीणा ने बताया कि बैठक में मेले की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की जाएगी।


सीकर से आज जाएंगी पदयात्राएं
खाटू के बाबा श्याम के निशान चढ़ाने के लिए सीकर शहर से शुक्रवार को दो पदयात्राएं रखना होगी। श्रीश्याम मंदिर सत्संग समिति का दो दिवसीय श्याम महोत्सव गुरुवार से शुरू हुआ। रात को श्याम मंदिर में भजन संध्या का आयोजन किया गया। संयुक्त मंत्री अनिल तोदी ने बताया कि शुक्रवार सुबह श्याम मंदिर से निशान पदयात्रा रवाना होगी। इसके अलावा राधाकिशनपुरा से भी श्रद्धालुओं का जत्था श्याम के निशान चढ़ाने के लिए जाएगा।

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