GoodNews : अब नहीं जाना पड़ेगा जयपुर-बीकानेर, सीकर के एसके अस्पताल में मिलेगी यह सुविधा

कम्पनी के प्रतिनिधि कल्याण अस्पताल में आएंगे और जल्द ही चयनित जगह का रिनोवेशन करवा मशीन का इंस्टॉलेशन करवाएंगे।

By: vishwanath saini

Published: 22 Aug 2017, 03:41 PM IST

सीकर. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल कल्याण अस्पताल में अब मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर ‘एमआरआई’ मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेज मशीन की सुविधा मिलने लगेगी। चिकित्सा विभाग के साथ अनुबंध होने के बाद मशीन संचालक ने कल्याण अस्पताल में दो जगह का चयन किया है।

अस्पताल परिसर में जगह का चयन होते ही मरीजों को जांच की सुविधा बाजार से आधी दरों पर मिलने लगेगी। अत्याधुनिक हाईस्पीड 1.5 टैक्सला मशीन से रिपोर्ट मिलने से मरीजों को स्टीक और समय पर इलाज मिलेगा। कम्पनी के प्रतिनिधि कल्याण अस्पताल में आएंगे और जल्द ही चयनित जगह का रिनोवेशन करवा मशीन का इंस्टॉलेशन करवाएंगे।

मरीजों को रैफर करने की जरूरत नहीं

कई बार रोगी के शरीर के उत्तकों में हो रहे रोग की पहचान नहीं हो पाती है। एमआरआई में एक्सरे, सोनोग्राफी व सीटी स्कैन की तुलना में स्पष्ट तस्वीरें ली जा सकती हैं। रोगी शरीर के उत्तकों की सभी एंगल के अनुसार तस्वीरें ली जाती है। यह तस्वीरें कम्पयूटर पर स्पष्ट नजर आती हैं और संबंधित रोग की पहचान हो जाती है। दावा है कि मल्टी कलर एमआरआई की रिपोर्ट मरीज को महज दो घंटे में मिलने लगेगी।

इन्हें मिलेगी निशुल्क सुविधा

मशीन संचालक डा. युद्धवीर ने बताया कि निजी लैब पर सामान्यत एक एमआरआई के लिए पांच से सात हजार रुपए तक ले लेते हैं जबकि सीकर में पीपीपी मोड पर संचालित मशीन से यह जांच महज तीन से चार हजार रुपए में हो जाएगी। इसके अलावा एमआरआई की सुविधा बीपीएल, वरिष्ठ नागरिक, भामाशाह कार्ड धारक, आस्था कार्ड धारक, कैदी व एचआईवी पीडि़त को निशुल्क दी जाएगी।

 

 

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मरीज को लिखी डॉक्टर की पर्ची की यह सबसे खास बात हम सबको पता होनी चाहिए

सीकर. मरीज को लिखी चिकित्सक की पर्ची को जेब में डालकर रखना महंगा पड़ सकता है, क्योंकि पर्ची को लेकर नियम बदलने वाले हैं। नए नियमों के मुताबिक चिकित्सक के द्वारा मरीज को उपचार के तौर पर लिखी गई दवा की पर्ची डेढ़ माह बाद स्वत: अवधिपार हो जाएगी। इस पर्ची से मरीज को मेडिकल स्टोर पर से दवा के बगैर खाली हाथ भी लौटना पड़ सकता है।


केंद्रीय औषधि नियंत्रक विभाग ने इस तरह का प्रस्ताव तैयार किया है। जिस पर मुहर लगते ही मेडिकल स्टोर पर बैठे फार्मासिस्ट संबंधित रोगी को वह दवा नहीं दें सकेंगे जो किसी चिकित्सक ने संबंधित रोगी को डेढ़ माह पूर्व परामर्श में लिखी होगी।

लगातार आ रहीं थी शिकायतें

औषधि नियंत्रक अधिकारी मनोज गढ़वाल ने बताया कि प्रस्ताव बनाकर भिजवाया हुआ है। उस पर सरकार की स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। यदि सलाह मान ली जाती है तो किसी भी रोगी को उस पर्ची से मेडिकल स्टोर वाले दवा नहीं दे सकेंगे।


जो पर्ची कम से कम डेढ़ महीने पहले किसी चिकित्सक ने रोगी को दवा लेने के लिए लिखी हो। क्योंकि दवाओं के दुरुपयोग को लेकर कई तहर की शिकायतें विभाग के सामने आ चुकी हैं।


इसलिए तय की पर्ची की समय सीमा
लोग चिकित्सक से एक बार दवा लिखवाने के बाद दोबारा उसी तरह की या उससे मिलती जुलती दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीद रहे हैं। मरीजों को यह लगता है कि जो दवा चिकित्सक से उसे लिखी है।
वह किसी विशेष तकलीफ होने पर ही दी जाती है। वह दवा अब भी वही फायदा उन्हे पहुंचाएगी। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा गलत है और इसलिए पर्ची अवधिपार के लिए समय सीमा को तय किया गया है।

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vishwanath saini Desk
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