कमाल की खेती कर रहे हैं ये किसान, कई किसानों ने तो सोचा भी नहीं होगा ऐसा

आइए हम आपको बताते हैं मशरूम मैन मोटाराम और मोती की खेती कर रहे भगवान सहाय बगडिय़ा और हनुमान बगडिय़ा के बारे में।

By: vishwanath saini

Published: 25 Apr 2018, 04:44 PM IST

सीकर.

शेखावाटी अंचल का सीकर जिला कई मायनों में खास हैं। यहां घर-घर में फौजी व गांव-गांव शहीद प्रतिमाएं देखने को मिल जाएंगी। जिला मुख्यालय तो कोचिंग का हब का रूप ले चुका है। सीकर जिले का राजस्थान का सबसे हाइटेक जिला भी कहा जाता है। अब लगे हाथ ही यह भी जान लो कि यहां के युवा व जवान ही नहीं बल्कि किसान भी कमाल के हैं। किसान लीक से हटकर खेती कर रहे हैं। आइए हम आपको बताते हैं मशरूम मैन मोटाराम और मोती की खेती कर रहे भगवान सहाय बगडिय़ा और हनुमान बगडिय़ा के बारे में।

 

सीकर में यहां होती है मोती की खेती ( Moti Ki kheti Sikar )

 

-सीकर जिले के दांतारामगढ़ उपखण्ड के गांव चैनपुरा के पास बगडिय़ा की ढाणी निवासी भगवान सहाय बगडिय़ा व हनुमान बगडिय़ा सीप से मोती तैयार करते हैं।
-ये अपने खेत में पांच हजार सीप का पालन कर रहे हैं, जिनसे 10 हजार मोती तैयार होंगे।
-सीप से तैयार किए गए मोती की अच्छी कीमत मिलती है। बाजार में एक मोती के भाव 300 से 3000 रुपए तक मिल जाते हैं।।
-जयपुर व अन्य जगह जौहरी इन मोतियों के सबसे बड़े खरीदार हैं। एक्पोर्ट बाजार में भी इनकी मांग है।

 

MOTI KI KHETI RAJASTHAN

-ये किसान केरल व नागपुर से सीप मंगवाते हैं। एक सीप में दो मोती के बीज डालकर उन्हें विशेष रूप से तैयार पानी में छोड़ देते हैं।
-खाद व कीटनाशक छिड़काव के बाद मोती को सीप में करीब 24 घंटे तक रखना होता है।
-इसके बाद सीप को जालीनुमा स्टैण्ड में टांगकर पानी में लटकाया जाता है। सीप की लार से मोती पर चमक आ जाती है।
-मोती तैयार करने में करीब दस से बाहर महीने का वक्त लग जाता है।
-इन किसान भाइयों को दावा है कि इन्हें मोती की खेती से 50 लाख से एक करोड़ तक की आय होगी।
-बगडिय़ा किसान भाइयों ने सीप से मोती तैयार करने का प्रशिक्षण नागपुर से लिया।


नानी गांव में हो रही मशरूम की खेती ( Mushroom Ki kheti Sikar )


-सीकर जिला मुख्यालय के नजदीक के गांव नानी मेें किसान मोटाराम मशरूम की खेती कर रहे हैं।
-पिछले 25 साल से मशरूम की खेती कर रहे मोटाराम को राजस्थान के मशरूम मैन के नाम भी जाना जाता है।
-मशरूम से मशहूर हो चुके मोटाराम की मानें तो मशरूम की खेती से सालाना 15 लाख तक कमाई संभव है।
-मोटाराम ने अपने घर पर नर्सरी बना रखी है, जिसमें 16 प्रकार की उन्नत किस्मों के मशरूम तैयार किए जाते हैं।

mushroom

-इनमें ऋषि मशरूम, सिट्रो, सागर काजू, पिंक मशरूम, शाजर काजू, काबुल एंजाई, ब्लैक ईयर, ओयस्टर, डीजेमोर आदि किस्म खास है।
-पांचवी तक पढ़े-लिखे मोटाराम को ये कमाल देखकर कृषि अधिकारी भी अचम्भित हैं।
-मोटाराम ने सोलन स्थित राष्ट्रीय मशरूम अनुसंधान केन्द्र से प्रशिक्षण लिया। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
-मशरूम एक तरह से फफूंद है। इसे साधारण कमरों में 18 डिग्री तापमान के बीच रखना होता है।
-मोटाराम सोलन व सोनीपत से मशरूम के बीज (स्पर्म) लेकर आते हैं। गेहंू की तूड़ी व तापड़ से पिण्ड बनाते हैं।
-इस विशेष पिण्ड में रखे बीज से महज बीस दिन बाद मशरूम की पैदावार शुरू हो जाती है।

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vishwanath saini Desk
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