सीकर में जल हौज के लक्ष्य कम, आवेदन ज्यादा

कियां बणसी हौद, सौढ़ छोटी, लाम्बा पग

By: Puran

Published: 24 Jul 2020, 12:13 PM IST


सीकर। कोरोना काल में हितैषी होने का दंभ भरने वाले अधिकारी ही किसानों की अनदेखी कर रहे हैं इसकी बानगी है कि सीकर जिले को पीएम सिंचाई योजना के तहत महज 265 फार्म पौंड का लक्ष्य दिया गया है जबकि फार्म पौंड के लिए 583 फाइलें बिना अनुमति के धूल फांक रही है। जबकि सीकर जिले में हर साल डेढ से साढे तीन मीटर तक भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। इसके बावजूद पीएम सिंचाई योजना के तहत बेहद कम लक्ष्य दिए जा रहे हैं। यही कारण है कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण योजना के तहत सिंचाई के लिए किसानो के सपने दम तोड रहै हैं।
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यह भी एक कारण
योजना में फार्म पॉन्ड की प्रति इकाई मिलने वाले अनुदान की राशि 90 हजार रुपए या लागत का 50 प्रतिशत होना है ऐसे में खेती से जुडे किसान परिवार मिलकर खुद काम करे तो इसकी लागत काफी कम हो जाती है। इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट और सिंचाई में आने वाली परेशानी को देखते हुए ही किसानों ने योजना के प्रति रुझान दिखाया लेकिन लक्ष्य कम होने से परेशानी बढ गई है।
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यह है योजना
लघु, सीमान्त, एससीएसटी वर्ग को प्राथमिकता देते हुए व जल सरंक्षण को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि विभाग ने खेतों में फार्म पॉन्ड बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत किसान अपने खेत में बारिश का पानी भरने वाले स्थान का चयन करेगा और वहां योजना का लाभ ले सकेगा।
इनका कहना है
योजना के प्रति किसानो का रुझान बढ रहा है लेकिन लक्ष्य कम होने के कारण 583 फाइलें लंबित है। इसके लिए मुख्यालय को अवगत करा दिया है योजना के प्रदेश स्तर पर निर्धारित होते है।
— एसआर कटारिया, उपनिदेशक कृषि
सीकर. कोरोना काल में हितैषी होने का दंभ भरने वाले अधिकारी ही किसानों की अनदेखी कर रहे हैं इसकी बानगी है कि सीकर जिले को पीएम सिंचाई योजना के तहत महज 265 फार्म पौंड का लक्ष्य दिया गया है जबकि फार्म पौंड के लिए 583 फाइलें बिना अनुमति के धूल फांक रही है। जबकि सीकर जिले में हर साल डेढ से साढे तीन मीटर तक भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। इसके बावजूद पीएम सिंचाई योजना के तहत बेहद कम लक्ष्य दिए जा रहे हैं। यही कारण है कि जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण योजना के तहत सिंचाई के लिए किसानो के सपने दम तोड रहै हैं।

यह भी एक कारण
योजना में फार्म पॉन्ड की प्रति इकाई मिलने वाले अनुदान की राशि 90 हजार रुपए या लागत का 50 प्रतिशत होना है ऐसे में खेती से जुडे किसान परिवार मिलकर खुद काम करे तो इसकी लागत काफी कम हो जाती है। इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट और सिंचाई में आने वाली परेशानी को देखते हुए ही किसानों ने योजना के प्रति रुझान दिखाया लेकिन लक्ष्य कम होने से परेशानी बढ गई है।

यह है योजना
लघु, सीमान्त, एससीएसटी वर्ग को प्राथमिकता देते हुए व जल सरंक्षण को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि विभाग ने खेतों में फार्म पॉन्ड बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत किसान अपने खेत में बारिश का पानी भरने वाले स्थान का चयन करेगा और वहां योजना का लाभ ले सकेगा।
इनका कहना है
योजना के प्रति किसानो का रुझान बढ रहा है लेकिन लक्ष्य कम होने के कारण 583 फाइलें लंबित है। इसके लिए मुख्यालय को अवगत करा दिया है योजना के प्रदेश स्तर पर निर्धारित होते है।
एसआर कटारिया, उपनिदेशक कृषि

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