प्याज मंडी में अव्यवस्थाओं की चरपराहट

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार बनी मंडी
उत्तर भारत में केवल प्याज के लिए सबसे बड़ी मंडी

दो वर्ष पहले कराया था 303.3 लाख रुपए का निर्माण अब बना अव्यवस्थाओं का ठिकाना
कमरे, पेयजल टंकी हो रही जर्जर, असामाजिक तत्वों का अड्डा

By: Puran

Published: 01 Mar 2020, 04:47 PM IST

सीकर. सरकारी सब्जबाग कहें या किसानों का दुर्भाग्य। जिले में प्याज उत्पादन में अग्रणी क्षेत्र को देखते हुए सरकार ने उत्तर भारत की सबसे बड़ी प्याज की विशिष्ट मंडी के लिए रसीदपुरा का चयन तो कर लिया लेकिन दो वर्ष पहले 303.3 लाख का जीर्णोद्वार भी करवा दिया। लेकिन पिछले दो वर्ष से इस मंडी सुध तक नहीं ली। नतीजन मंडी परिसर क्षेत्र में अव्यवस्थाओं का ठिकाना बन गया है। उत्तरी भारत की सबसे बड़ी प्याज मंडी बनाने का सपना कागजों में ही रह गया। मंडी परिसर में बने कमरे, प्लेटफार्म और पेयजल टंकी जर्जर होने लगी है। कई जगह तो कमरों के आगे पेड़ तक उग गए हैं। ऐसे में किसानों को इस बार भी प्याज मंडी का फायदा नहीं मिलेगा।

यह है कारण

ग्रामीणों ने बताया कि रसीदपुरा गांव के पास पांच बीघा में तैयार प्याज मंडी को लेकर धोद और दांतारामगढ़ के जनप्रतिनिधियों में खींचतान रही। लोगों की मांग को देखते हुए रसीदपुरा में करोडा़ें के हाइवे फेसीलिटी सेंटर को चिन्हित किया। इसके बाद रसीदपुरा मंडी को फतेहपुर मंडी के अधीन किया बाद में इस मंडी को फिर सीकर मंडी के अधीन कर दिया। बाद में भूखंड आवेदन के लिए समिति की बैठक नहीं हुई। अब बैठक हुई तो सीजन शुरू हो गया। रसीदपुरा क्षेत्र के 40 से ज्यादा गांव और ढाणियों के 50 हजार से ज्यादा किसान प्याज के उत्पादन से सीधे जुड़े हुए हैं। यहां के प्याज की भागीदारी कुल उत्पादन में 30 फीसदी तक रहती है। इसके बावजूद सरकार ने यहां प्याज भंडारण के लिए ढांचे तक नहीं बनवाए हैं।

फेक्ट फाइल
कार्य राशि लाखों में

चबूतरे ढके हुए 182.68
कंकरीट सडक़ 44.46

ट्यूबवैल 04.60
पानी की पाइपलाइन 14.37

चारदिवारी गेट, चैकपोस्ट 34.60
केंटीन व सुविधाएं 03.92

मरम्मत: कार्यालय 18.68
विश्रामगृह, बिल्डिंग, सुविधाएं

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