सीकर में अतिक्रमण नहीं हटा पाया प्रशासन,सरकार तक पहुंचाई शिकायत, सचिव के आदेश भी हवा

लेकिन, जब कभी इन गाय-भैंसों के लिए बाहर से चारा जुटाना होता है तो समस्या बढ़ जाती है। क्योंकि ढ़ाणी का रास्ता आठ से दस फीट का है।

By: vishwanath saini

Published: 13 Mar 2018, 10:11 AM IST

सीकर. अतिक्रमण से गांव का रास्ता संकरा होने के कारण किसानों के घर तक चारे की ट्रॉली नहीं पहुंच रही है। ऐसे में उनके पशु भूखे मर रहे हैं और किसान पंचायत से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। जबकि लक्ष्मणगढ़ तहसील के भूमा छोटा गांव के इन किसानों ने रास्ते के अतिक्रमण को हटाने की शिकायत सरकार तक पहुंचा चुके हैं। लेकिन, सालों बीत जाने के बाद भी उनकी पीड़ा का समाधान आज तक नहीं हो पाया है। गांव के इन किसानों का कहना है कि अधिकारी उनका दर्द समझने के बजाय एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। सभी किसान खेती के साथ पशुपालन के धंधे से जुड़े हुए हैं।

लेकिन, जब कभी इन गाय-भैंसों के लिए बाहर से चारा जुटाना होता है तो समस्या बढ़ जाती है। क्योंकि ढ़ाणी का रास्ता आठ से दस फीट का है। जबकि चारे की ट्रॉली की साइज 15-17 फीट होने के कारण वह आगे तक नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में चारा घर से दूर डलवाना पड़ता है। इसके बाद दूसरे छोटे साधन किराए पर कर चारे को घर तक लाना पड़ता है। जिसका खर्चा चारे की कीमत के अलावा ढ़ाई गुना बढ़ जाता है।


शासन सचिव के ये आदेश
राज्य में रास्ते संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए संयुक्त शासन सचिव द्वारा सभी कलक्टरों को निर्देशित किया जा चुका है। जिसमें उल्लेख गया था कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच अभियान चलाकर रास्तों को दुरस्थ किया जाए। रास्ते में अतिक्रमण जैसी एक भी समस्या को लंबित नहीं छोड़ा जाए। क्योंकि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर समस्याओं का समाधान नहीं होने की शिकायत उनके पास पहुंच रही है।

 


घुटने दे रहे जवाब

गांव के बुजुर्ग किसान महावीरप्रसाद बामणोलिया का कहना है कि भूमा छोटा से जाजोद जाने वाला सार्वजनिक कच्चा रास्ता बहुत ज्यादा संकरा है। समस्या को लेकर एसडीएम से मिले थे। उन्होंने अपने स्तर पर मामले को निपटाते हुए तहसीलदार को निर्देशित कर दिया था। तहसीलदार ने ग्राम पंचायत को साधन उपलब्ध कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। ग्राम पंचायत नरेगा के जरिए काम को पूरा करवाने का झांसा दे रही है। पोर्टल के माध्यम से शिकायत आगे तक पहुंचाने के बाद भी किसान रास्ते के लिए परेशानी भुगत रहे हैं। समाधान के लिए चक्कर काटते-काटते घुटने जवाब देने लगे हैं।

vishwanath saini Desk
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