नहीं मिले अनुभव प्रमाण पत्र, अधिकारियों की हठधर्मिता बेरोजगारों पर भारी

नहीं मिले अनुभव  प्रमाण पत्र, अधिकारियों की हठधर्मिता बेरोजगारों पर भारी

Vishwanath Saini | Updated: 25 Jun 2018, 10:47:46 AM (IST) Sikar, Rajasthan, India

लैब सहायक व नर्सिंग भर्ती में कई युवा एनआरएचएम तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से चिकित्सा विभाग में कार्य कर रहे है।


सीकर. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लैब सहायक,नर्सिंग व एएनएम की सीधी भर्ती में अधिकारियों की हठधर्मिता बेरोजगारों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। भर्ती में पहले से संविदा पर अथवा व्यक्तिगत अनुबंध के आधार पर अस्थाई रूप से कार्यरत संविदा कार्मिकों को अनुभव प्रमाण पत्र के लिए युवाओं को भटकना पड़ रहा है। भर्ती की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही अनुभव प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण अब बेरोजगारों के लिए नौकरी की आस भी धूमिल होती नजर आ रही है। लगातार ब्लॉक चिकित्सा कार्यालय से लेकर सीएमएचओ तक चक्कर लगा रहे कार्मिकों में अब धीरे-धीरे विभाग के प्रति गहरा रोष भी है। लैब सहायक व नर्सिंग भर्ती में कई युवा एनआरएचएम तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से चिकित्सा विभाग में कार्य कर रहे है।

 

इसके अलावा कई युवा विभाग में एनजीओ के माध्यम से भी पिछले कई वर्ष से कार्य कर चुके है। ऐसे संविदा कार्मिकों को लगातार काम करने पर एक वर्ष पूण होने पर बोनस अंक के दस अंक, दो वर्ष पूर्ण होने पर 20 अंक व तीन वर्ष पूर्ण होने पर 30 अंक दिए भर्ती में मिलेंगे। इसके लिए संविदा कार्मिकों को ब्लॉक स्तर से अनुभव प्रमाण पत्र प्रमाणित करवा कर मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ऐसे अनुभव प्रमाण पत्र को प्रमाणित कर संयुक्त निदेशक कार्यालय को भेजेगा। वहां से प्रमाणित होने के बाद ही अनुभव प्रमाण पत्र को मान्य माना जाएगा।


नहीं मिले प्रमाण पत्र
लैब सहायक व नर्सिंग की भर्ती की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण ब्लॉक स्तर से भी कई कार्मिकों के अनुभव प्रमाण पत्र प्रमाणित नहीं किए गए है।

 

पेयजल किल्लत को लेकर जताया रोष
अजीतगढ़. कस्बे की बरसों पुरानी पेयजल आपूर्ति सिस्टम को सुधारने के लिए बनाई गई 6 करोड़ की योजना को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। वर्षों पुरानी पाइप लाइन जर्जर हो गई है, जिस कारण जगह-जगह लीकेज, ब्लॉक होने की समस्या बनी रहती है। इसके कारण अक्सर पेयजल किल्लत बनी रहती है। आज से 50 साल पहले कस्बे में 200 नल कनेक्शन थे, जबकि आज 2500 के करीब पहुंच गए हैं। जलदाय विभाग अजीतगढ़ ने तीन साल पहले अजीतगढ़ के लिए छह करोड़, दिवराला के लिए चार करोड़ और मूंडरू के पौने तीन करोड़ का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए मुख्य अभियंता जयपुर भेजी जा चुकी है, लेकिन विभाग ने केवल दिवराला गांव की नई पेयजल स्कीम को ही स्वीकृति दी है। इससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है। उधर अजीतगढ़ के कनिष्ठ अभियंता नूतन प्रकाश सैनी ने बताया कि दिवराला की योजना को ही मंजूरी मिली है जबकि अजीतगढ़ और मंूडरू को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। वहीं विधायक झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि शीघ्र ही अजीतगढ़ कस्बे को भी स्वीकृति की मंजूरी मिलने वाली है।

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