scriptNow the way of career selection of students is changing in the state | प्रदेश में अब विद्यार्थियों का बदल रहा कॅरियर चयन का तरीका | Patrika News

प्रदेश में अब विद्यार्थियों का बदल रहा कॅरियर चयन का तरीका


पहले : अधिकतर स्नातक के बाद चुनते थे कॅरियर की राह
अब : बारहवीं के बाद चार-पांच वर्षीय पाठ्यक्रमों में रुझान बढ़ा
सोशल चेंज

सीकर

Published: August 04, 2021 12:47:26 am


सीकर. बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रदेश में यूथ के कॅरियर चयन का तरीका अब पूरी तरह बदल गया है। पहले डॉक्टरी और इंजीनियरिंग को छोड़ ज्यादातर विद्यार्थियों की पहली पसंद स्नातक की डिग्री होती थी। अब नए-नए पाठ्यक्रमों की वजह से युवा स्नातक के बजाय सीधे अपने मनपंसद कॅरियर के पाठ्यक्रमों को चुन रहे हैं। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों की ओर से पाठ्यक्रमों को लेकर लगातार नवाचार भी किए जा रहे हैं। पिछले तीन सालों में युवाओं ने सबसे ज्यादा कॅरियर के तौर पर शिक्षक के पेशे को चुना है। इसकी वजह नौकरी के सबसे ज्यादा अवसर होना है। एक्सपर्ट की मानें तो बारहवीं के बाद प्रदेश में हर साल लगभग पांच लाख विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला ले रहे हैं।
 रोजगार की नई राहों पर युवा : पांच लाख विद्यार्थी बारहवीं के बाद सीधे प्रोफेशनल कोर्स में ले रहे हैं दाखिला
रोजगार की नई राहों पर युवा : पांच लाख विद्यार्थी बारहवीं के बाद सीधे प्रोफेशनल कोर्स में ले रहे हैं दाखिला
ऐसे समझें पांच कोर्स के जरिए बदलाव
1. पहले स्नातक और बादमें बीएड, अब बारहवीं के बाद ही
प्रदेश में पहले जिन युवाओं को शिक्षक का पेश चुनना होता था वह पहले स्नातक की पढ़ाई करते। इसके बाद बीएड में दाखिला लेते। अब चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू होने से एक साल की बचत भी हो रही है। प्रदेश में इसकी लगभग 40 हजार सीट हैं जो हर साल पूरी भर रही है। प्रवेश परीक्षा देनी होती है।क्रेज क्यों: पिछले चार सालों में 65 हजार से अधिक शिक्षकों को मिल चुकी नियुक्ति। भविष्य में भी तृतीय श्रेणी अध्यापक से लेकर प्रथम श्रेणी व्याख्याता तक भर्तियों की आस।
2. विज्ञान-गणित के विद्यार्थियों की पहली पसंद
पेरामेडिकल कोर्सदस साल पहले पेरामेडिकल पाठ्यक्रमों से युवाओं का मोहभंग हो गया था, अब फिर से क्रेज बढ़ा है। बारहवीं के अंकों के आधार पर विज्ञान के विद्यार्थी दाखिला ले रहे हैं। कई चांस में नीट क्लियर नहीं करने वाले भी इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले रहे हैं।क्रेज क्यों: कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से अब तक पेरामेडिकल पाठ्यक्रमों की तीन भर्ती हो चुकी है। दो बार तो जितने अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लगभग सभी को पात्र घोषित कर दिया गया। चार-पांच साल में काफी भर्ती होने की वजह से युवाओं में क्रेज बढ़ा।
3. कॉमर्स में स्नातक से सोशल डिस्टेंस, प्रोफेशनल कोर्स पर फोकस
कॉमर्स विद्यार्थियों के लिए भी सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बढ़े। विद्यार्थी स्नातक में दाखिला लेने की बजाय प्रोफेशनल कोर्स की तैयारी करना पसंद कर रहा है। कई विद्यार्थी लेखाधिकारी से लेकर बैंकिंग सेक्टर की भर्तियों की तैयारी में जुट रहे। कई संस्थाओं की ओर से कैप्सूल कोर्स शुरू किए गए हैं।क्रेज क्यों: सीए, सीएस सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्स किए विद्यार्थियों के लिए निजी क्षेत्र में अच्छे पैकेज के साथ दोगुने हुए अवसर।
4. प्रशासनिक सेवा: अब बारहवीं के बाद ही तैयारी
भारतीय और राजस्थान प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य तय करने वाले 40 फीसदी युवा अब बारहवीं के साथ इस तरह की एकेडमी में दाखिला ले रहे हैं जहां स्नातक के साथ प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हो सके। हालांकि 60 फीसदी से अधिक युवा सरकारी नौकरी हासिल करने के बाद प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में जुट रहे हैं। क्रेज क्यों: यूपीएससी व आरपीएससी की ओर से लगातार भर्तियों का होना। अब यूपीएससी की तैयारी करने वाले राजस्थान के युवाओं की संख्या छह गुणा तक बढ़ी।
5. कम्प्यूटर व आइटी के नए कोर्स में दािखला
इंजीनियरिंग की कुछ ब्रांच में रोजगार के अवसर भले ही कम हुए हो लेकिन अच्छे संस्थान से इंजीनियरिंग करने की अब भी होड़ मची है। आइआइटी व एनआइटी सहित नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलने पर अब कम्प्यूटर पाठ्यक्रमों को काफी पंसद किया जा रहा है।क्रेज क्यों: सूचना सहायक से लेकर कम्प्यूटर विशेषज्ञों की निजी व सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर बढ़े। लॉकडाउन के बाद इस क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ी हैं।
इन कोर्स का भी क्रेज बढ़ा
पशुधन सहायक
पुस्तकालयाध्यक्ष
नेचुरोथैरपी, योग व आयुर्वेद
पांच वर्षीय लॉ
नर्सिंग
पॉलिटेक्निक
शारीरिक अनुदेशक
विशेष शिक्षा बीएसटीसी
एनटीटी

एक्सपर्ट व्यू
नए पाठ्यक्रमों से निकल रही रोजगार की राहेंआज के दौर में हर युवा पहले अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहता है। इसलिए युवाओं ने कॅरियर चयन का पैटर्न बदल लिया है। अब इतना समय नहीं है कि कॅरियर को तय करने में ही तीन-चार साल का वक्त लगा दें। यूथ कक्षा बारहवीं के बाद ही अपने कॅरियर को लेकर सजग हो रहा है।
इंजीनियर रणजीत सिंह, एक्सपर्ट
समय के साथ पैसे की भी बचत
सभी क्षेत्र के पाठ्यक्रमों में काफी बदलाव आया है। कुछ सालों में सभी विश्वविद्यालयों की ओर से नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। समय की बचत के हिसाब से भी ऐसे पाठ्यक्रमों को चुना जा रहा है। चार वर्षीय बीएड, नर्सिंग, पेरामेडिकल, योग, पुस्तकालयाध्यक्ष, सीए, सीएस, पांचवर्षीय लॉ, विशेष शिक्षा के पाठ्यक्रमों के प्रति रुझान बढ़ा है।
डॉ. अरविन्द भूकर, एक्सपर्ट

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