पुराने जख्म भरे ही नहीं...दूसरी लहर देने लगी दर्द

महाराष्ट्र, दिल्ली व गुजरात सहित अन्य राज्यों से लौटने लगे प्रवासी, पिछली लहर के दौरान प्रदेश में 10 लाख से अधिक प्रवासी आए थे

By: Suresh

Published: 21 Apr 2021, 06:09 PM IST

अजय शर्मा. सीकर. मैं घर से दूर हूं...मैं बहुत मजबूर हूं...काम की तलाश से घर से बहुत दूर निकल आया...लेकिन अब घर लौटना भी जरूरी है। विभिन्न राज्यों में काम की तलाश में गए प्रदेश के कामगार कुछ ऐसे ही दर्द को लेकर अब फिर से अपने गांव की माटी की तरफ लौटने लगे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश, हरियाणा सहित अन्य राज्यों से प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक कामगार पिछले दस दिनों में लौटकर आ गए हैं। इस वजह से प्रदेश में भवन निर्माण से लेकर अन्य क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर काम की मांग बढ़ी है, लेकिन कफ्र्यू होने की वजह से फिर से कामगारों को बेरोजगारी का दर्द मिल रहा है। कोरोना की पहली लहर के दौरान प्रदेश में दस लाख से अधिक कामगार लौटकर आए थे। लगभग आठ से दस महीने बाद जैसे ही स्थिति सामान्य हुई तो कामगार फिर से काम के लिए निकल गए। लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर ने फिर से कामगारों को गहरा दर्द दे दिया है।
सरकार सर्वे में उलझी रही, नहीं मिल सका स्थायी रोजगार
कोरोना की पहली लहर के दौरान कामगारों के घर लौटने पर केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के ख्ूाब दावे किए गए। राज्य सरकार की ओर से ऑनलाइन पंजीयन कराकर सर्वे भी कराया गया। प्रवासी कामगारों से प्रशिक्षण के लिए सर्वे की कवायद भी गई थी। लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो सका।
ऐसे समझें राजस्थान के कामगारों का दर्द
केस-01 महाराष्ट्र में बैठे रहकर क्या करते इसलिए लौट आए
सीकर निवासी कामगार रघुवीर सिंह का कहना है कि महाराष्ट्र में लगातार संक्रमण बढऩे पर लॉकडाउन जैसे हालात बन गए। वहां स्थिति को देखा लेकिन टैक्सटाइल कंपनी वालों ने आने से मना कर दिया। ऐसे में वहां बैठकर खर्चा करने के बजाय घर लौटना ही ठीक समझा। पहले भी कोरोना की वजह से दस महीने तक घर पर खेती का काम किया था।
केस-02: विदेश से छूटी नौकरी अब संभाल रहे खेती
फतेहपुर इलाके के गांव हटवास निवासी सुरेन्द्र काजला पिछले दो साल से दोहा-कतर की एक कंपनी में काम संभाल रहे थे। लेकिन कोरोना की वजह से वतन आना पड़ा। अभी तक कंपनी की ओर से भारत के कामगारों को नहीं बुलाया गया है। ऐसे में उन्होंने खेती शुरू कर दी। इनकी पत्नी बबीता के सीकर के एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी। लेकिन कोरोना की वजह से रोजगार पर संकट आया है। दोनों पति-पत्नी को उम्मीद है कि संकट के बादल छटेंगे तो फिर खुशहाली आएगी।
केस-03 दिल्ली से लौटे अब रोजगार की तलाश
सीकर जिले के 60 से कामगार दिल्ली में कोरियर कंपनी में कार्यरत थे। लेकिन सात दिन का कफ्र्यू लगने की वजह से गांव लौट आए है। कामगार रामचंद व मुकेश का कहना है कि कोरोना की वजह से पहले भी आठ महीने बेरोजगारी का दर्द झेल चुके है। इस बार तो मानस बना लिया है कि पराए शहर में जाने के बजाय अपने शहर में ही कोई व्यवसाय करेंगे।
केस-04: शादियों के सीजन में बेपटरी व्यवसाय
सीएलसी चौक स्थित मिठाई कारोबारी प्रकाश राजपुरोहित का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर ने व्यापारियों के साथ कामगारों की आर्थिक समस्या बढ़ा दी है। कोरोना की पिछली लहर के दौरान जैसे-तैसे गुजारा किया। अब सरकार ने तीन मई तक कफ्र्यू लगा दिया है। व्यापारियों को इससे लाखों रुपए का नुकसान होगा। कई कामगार तो वापस अपने घरों को लौट गए है।

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