scriptOnly 10 percent people were able to tell the fundamental rights | पत्रिका सर्वे: 10 फीसदी लोग ही बता पाए मूल अधिकार, 98 फीसदी को नहीं पता कर्तव्य | Patrika News

पत्रिका सर्वे: 10 फीसदी लोग ही बता पाए मूल अधिकार, 98 फीसदी को नहीं पता कर्तव्य

सीकर. कहते हैं कि लोग अधिकारों के लिए तो अड़ जाते हैं लेकिन कर्तव्यों को किनारे रखते हैं, लेकिन हकीकत इससे भी इतर है।

सीकर

Updated: January 26, 2022 06:31:58 pm

सीकर. कहते हैं कि लोग अधिकारों के लिए तो अड़ जाते हैं लेकिन कर्तव्यों को किनारे रखते हैं, लेकिन हकीकत इससे भी इतर है। वास्तव में लोग अपने सभी मूल अधिकार भी नहीं जानते। ये खुलासा पत्रिका के सर्वे में हुआ है। जो गणतंत्र दिवस से पूर्व प्रदेश के सभी 33 जिलों में किया गया। अलग-अलग आयु वर्ग में किए गए सर्वे में सामने आया कि महज 10 फीसदी लोग ही संविधान प्रदत्त सभी मूल अधिकारों की जानकारी रखते हैं। बाकी 90 फीसदी में 40 फीसदी तो एक भी मूल अधिकार नहीं बता पाए। जबकि 50 फीसदी लोगों को मूल अधिकारों की आधी-अधूरी जानकारी थी। मूल कर्तव्यों के प्रति जागरुकता तो बेहद कम निकली। सर्वे में दो फीसदी लोग भी सभी मूल कर्तव्य नहीं गिना पाए।

पत्रिका सर्वे: 10 फीसदी लोग ही बता पाए मूल अधिकार, 98 फीसदी को नहीं पता कर्तव्य
पत्रिका सर्वे: 10 फीसदी लोग ही बता पाए मूल अधिकार, 98 फीसदी को नहीं पता कर्तव्य

ऐसे भी आए जवाब
सर्वे में मूल अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति लोगों की जानकारी बहुत कम सामने आई। ज्यादातर लोगों ने शिक्षा, चिकित्सा, धार्मिक स्वतंत्रता व हड़ताल को मूल अधिकार बताए। जबकि कर्तव्यों के बारे मेंं देश की रक्षा व समाज सेवा जैसे कार्यों को गिनाया।


यों किया सर्वे

प्रदेश के 33 जिलों में हुए सर्वे में हर जिले से 20-20 लोगों से चर्चा की गई। इनमें 11 से 16 तथा 18 से 25 आयु वर्ग केअलावा पांच-पांच महिलाओं व बुजुर्गों को भी शामिल किया गया। लोगों का चयन रैंडम आधार पर किया गया।


युवा सचेत, महिलाएं व बुजुर्ग कम जागरूक
- 18 से 25 आयु वर्ग में 15 फीसदी युवाओं ने सभी मूल अधिकारों व 4 फीसदी ने सभी मूल कर्तव्य गिना दिए।

- 40 फीसदी युवा भी अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में कोई शब्द नहीं बोल पाए। बाकी ने जोड़- तोड़कर गिनाए।
- 11 से 16 आयु वर्ग में दो फीसदी को सभी व 40 फीसदी को दो से चार अधिकारों की जानकारी थी। जबकि मूल कर्तव्यों की जानकारी 20 फीसदी को ही आधी अधूरी थी।

- महिला वर्ग में 50 फीसदी ही मूल अधिकारों व मूल कर्तव्यों के बारे में कुछ बोल पाई। लेकिन, वे भी आधे अधूरे अधिकार व कर्तव्य ही बता पाई।
- बुजुर्गों में 30 फीसदी ही जोड़-तोड़कर मूल अधिकार व कर्तव्य गिनाते नजर आए।

- महिला व बुजुर्ग वर्ग में चार फीसदी ही मूल अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में पूरी समझ वाले सामने आए।

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