कोर्ट में 15 दिन तक होंगे सिर्फ जरूरी ऑनलाइन काम

राजस्थान के सीकर के सभी न्यायालयों के लिए 15 सितम्बर से एक अक्टूबर तक के लिए केवल अत्यावश्यक कार्य होंगे। वह भी डिजिटल माध्यम से।

By: Sachin

Published: 17 Sep 2020, 02:27 PM IST

सीकर. राजस्थान के सीकर के सभी न्यायालयों के लिए 15 सितम्बर से एक अक्टूबर तक के लिए केवल अत्यावश्यक कार्य होंगे। वह भी डिजिटल माध्यम से। इसके लिए संबंधित अधिवक्ता व पक्षकार को अपना संबंधित न्यायालय की ई-मेल या व्हाट्सएप नम्बर पर पीडीएफ में प्रेषित करना होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने बताया कि ई-मेल पर पीडीएफ से प्राप्त होने वाले प्रकरणों को बिना वास्तविक प्रिन्ट निकाले सी.आई.एस. पर दर्ज किया जाएगा एवं प्रकरणों को यदि अंतरित किया जा रहा है तो सी.आइ.एस में अंतरित करके मूल पीडीएफ फाइल भी संबंधित न्यायालय की ई-मेल पर प्रेषित कर दी जाएगी। सभी न्यायालयों की ओर से एक अक्टूबर तक के सभी प्रकरणों में जारी परिपत्र के अनुसार एक साथ ही आगामी तारीखें दी जाएगी और उसकी सूचना संबंधित बार एसोसिसयेशन एवं जिला न्यायालय की वैबसाईट पर अपलोड करने के लिए भेजी जावेगी। प्रत्येक दिन सी.आई .एस पर भी प्रकरणों की आगामी तारीख दर्ज की जाएगी।

वीडियो कॉंफ्रेसिंग के लिए दो आउटलेट स्थापित

सीकर मुख्यालय पर अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए बार एसोसियेशन रूम एवं बार एसोसिएशन के प्रथम तल पर स्थित मीटिंग हॉल में वीडियों कॉन्फ्रेसिंग की दो आउटलेट स्थापित की जा रही है। अधिवक्ता इनके माध्यम से भी न्यायालयों से जुड़ सकते हैं। सभी न्यायालयों को एनएसटीईपी के मोबाईल सैट उपलब्ध करवा दिए गए हैं। कोविड-19की मॉनेटेरिंग से संबंधित समिति सभी मुख्यालयों पर पहले से ही स्थापित है। समिति न्यायालय परिसर में स्थित स्टाम्प वेण्डरों, केन्टीन, नोटेरी पब्लिक व फोटो कॉपी की दुकान को आवश्यकतानुसार केवल रोटेशनल आधार पर कार्य करने के लिए अनुज्ञात करेगी।

प्रतिवेदन को तय करने के दिए आदेश
सीकर. तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2012 एवं 2013 में पहले नियुक्ति ले चुके शिक्षकों के समान नोशनल परिलाभ देने के मामलें से जुड़ी याचिका का निस्तारण कर उच्च न्यायालय ने पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त, शिक्षा निदेशक को प्रार्थी शिक्षकों को भी पूर्व में नियुक्ति ले चुके अभ्यर्थियों के समान नोशनल परिलाभ देने के प्रतिवेदन को स्वीकार कर उसे आठ सप्ताह तय करने के आदेश दिए है। याचिकाकर्ता कंचन सहित अन्य शिक्षकों की ओर से दायर याचिका में अधिवक्ता संदीप कलवानिया ने बताया कि पंचायती राज विभाग की ओर से विभिन्न जिला परिषदों ने वर्ष 2012 एवं 2013 तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती निकाली थी। प्रार्थी शिक्षक भी तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सम्मिलित हुए थे। उक्त दोनों भर्तियों में आरटेट परीक्षा एवं मुख्य भर्ती परीक्षा में संशोधित परिणाम जारी किए गए। इस कारण अभ्यर्थियों को अलग-अलग समय नियुक्त दी गई। प्रार्थी शिक्षकों को बाद में नियुक्ति दिए जाने के कारण पहले नियुक्ति पा चुके शिक्षकों के वेतन में विसंगति हो रही है। न्यायालय ने समान प्रकरण हेमलता श्रीमाली बनाम स्टेट, सुमन बाई बनाम स्टेट के मामलों में नोशनल परिलाभ पाने का हकदार माना है। जबकि इन्हें वंचित किया जा रहा है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned