गांवों में अब नहीं हो रही ‘पंचायती’

जनप्रतिनिधियों के पास वीसी सहित अन्य विकल्प

By: Gaurav

Published: 28 May 2020, 07:28 PM IST

सीकर. कोरोना के फेर में ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा भी लॉकडाउन हो गई है। पिछले दो महीने से प्रदेश की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा नहीं हो पा रही है। इस वजह से ग्रामीणों की विकास की उम्मीदें भी अटकी हुई है। लॉकडाउन के दौर में कई विभागों ने नवाचार की राह अपनाते हुए ऑनलाइन बैठक की है। लेकिन पंचायतीराज विभाग इस दिशा में भी कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया है। हालांकि कई सरपंच व अधिकारी अपने दम पर ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में जुटे है। सरपंचों के सामने दूसरे बड़ी समस्या बजट की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने मास्क, सेनेटाइजर व छिडक़ाव के लिए काफी कम बजट दिया है। इस कारण भामाशाहों व खुद के सहयोग से ही यह काम हो पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अटके काम
प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रूपान्तरण, पट्टा, पीएम आवास, पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र व विवाह पंजीयन जैसे काम भी अटके हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को नई ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त स्टाफ लगाकर काम को पटरी पर लाने की कवायद शुरू करनी चाहिए।
नई पंचायतों के भवन भी अटके
प्रदेश में नई पंचायतों के भवनों के काम भी अटक गए है। पिछले दिनों सीएम की वीसी में यह मामला गूंजा था। इस पर विभाग ने जल्द कोई योजना बनाने की बात कही थी। लेकिन अभी स्थानीय स्तर पर कोई निर्देश नहीं मिले है।
काम नहीं देने पर भी घिर चुके है अधिकारी
मनरेगा में काम नहीं देने सहित अन्य लापरवाही पर भी गांवों की सरकार घिर चुकी है। अब जिला परिषद सीईओ की ओर से ग्रामसेवक व अभियंता सहित पांच के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी है। कई नई ग्राम पंचायतों को मनरेगा में काम सृजित करने में दिक्कत आ रही थी, जिसका कई पंचायतों में अब जाकर समाधान हुआ है।

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