काम के पहाड़ के नीचे दबे पीईईओ, अब उठी मुक्ति की मांग

सीकर. प्रशासनिक आदेशों की वजह से पंचायत प्रांरभिक शिक्षा अधिकारी पर बढ़ते काम के दवाब के बीच अब प्रधानाचार्य भी लामबंद होने लग गए है।

By: Sachin

Published: 14 Jun 2020, 09:32 AM IST

(PEEO upset due to work load) सीकर. प्रशासनिक आदेशों की वजह से पंचायत प्रांरभिक शिक्षा अधिकारी पर बढ़ते काम के दवाब के बीच अब प्रधानाचार्य भी लामबंद होने लग गए है। पीईईओ का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से राशन वितरण से लेकर अन्य कार्यो में पीईईओ को शामिल किया जा रहा है। इससे स्कूलों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। इस मामले में अब राजस्थान पीईईओ परिषद की ओर से जल्द ज्ञापन मुहिम शुरू की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष मंागीलाल बुगालिया का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में शिक्षा विभाग के अलावा अन्य विभागों के अधिकारी काफी काम थोप रहे है। जबकि बोर्ड परीक्षाएं अभी शुरू होनी है। प्रदेश अध्यक्ष मांगीलाल बुगालिया ने बताया कि पीईईओ मूलत प्रधानाचार्य है जो कि राज्य शिक्षा सेवा का एक उच्च स्तरीय पद है। लेकिन गलत फहमियों के शिकार होकर कुछ अन्य विभागों के अधिकारी लगातार नए आदेश जारी कर रहे है। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने पिछले दिनों कई आदेशों को रद्द भी कराया। इसके बाद मुख्य सचिव ने गैर शैक्षणिक कार्यो में शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगाने के आदेश दिए। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी लगातार ड्यूटी लगाकर मुख्य सचिव के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पीईईओ पद का सृजन मूलत: प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के शैक्षिक उन्नयन के लिए किया गया था। पंचायत क्षेत्र के सभी विद्यालयों का सतत पर्यवेक्षण एवं प्रभावी संबलन करना ही पीईईओ की मूल जिम्मेदारी। लेकिन धीरे-धीरे पीईईओ को उसके मूल कर्तव्य से विमुख करके अनावश्यक कामों में उलझा दिया गया।

स्कूलों को कोरोना जंग से अब करें मुक्त


राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं 18 से शुरू होनी है। इसके लिए बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। शिक्षकों का कहना है कि अब स्कूलों को कोरोना की जंग से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि बच्चों में संक्रमण का खतरा नहीं रहे। वहीं शिक्षकों को भी कोरोना ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की है।

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