लोगों ने बिसराया, सरकार ने भी की इस धरोहर की उपेक्षा

लोगों ने बिसराया, सरकार ने भी की इस धरोहर की उपेक्षा

Vinod Singh Chouhan | Publish: May, 17 2019 06:10:38 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

पत्रिका ने उठाया अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे जोहड़ के जीर्णोद्धार का बीड़ा


लक्ष्मणगढ़. कभी कस्बे व आसपास के क्षेत्र के लिए पानी का एकमात्र और पर्याप्त साधन बना 200 साल पुराना जोहड़ अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। अब राजस्थान पत्रिका ने इसके जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है।
गौरतलब है कि उस समय सेठ साहुकार अपने धन का ज्यादातर हिस्सा कुओं, बावड़ी और जोहड़ों का निर्माण करवाते थे। इन्हीं के माध्यम से पानी की आपूर्ति होती थी, लेकिन अब ये माध्यम देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे हैं। बारिश में जोहड़, तालाब वगैर
ह पानी ने लबालब हो जाते थे और वर्षभर लोगो के पीने के पानी की आपूर्ति करते थे। परन्तु सरकारी उदासीनता के चलते जोहड़ व तालाब वर्तमान में अनुपयोगी होते जा रहे है। लक्ष्मणगढ़ में भी इसी ऐतिहासिक महत्व को संजोते हुए व लोगो की प्यास बुझाने के लिए करीब 200 साल पहले तोदी कॉलेज रोड़ स्थित सेठों के जोहड़ का निर्माण करवाया गया था। लक्ष्मणगढ़ कस्बे की बसावट के साथ ही गनेड़ीवाला परिवार के सेठ गुमानीराम गनेड़ीवाला की ओर से बनाए गए इस जोहड़ से कस्बे के सभी परिवारों को वर्षभर पानी मिलता था।
साहित्यकार रामविनोद पुरोहित ने बताया कि आमजन के अलावा पशुओं के पानी के पीने के लिए भी जोहड़ के पूर्वी छोर पर अलग से व्यवस्था की गई है। बाद में घर-घर पानी की सप्लाई होने व सरकारी उदासीनता के चलते इसकी सार संभाल बंद होने से इसमें गंदगी का अंबार रहने लगा। पिछले 10 सालों से राजस्थान पत्रिका ने अमृत जलम अभियान के तहत प्रतिवर्ष इस जोहड़ की सफाई कस्बेवासियों की ओर से की जाती रही है। इस साल भी इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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