कविता: कोरोना से मत घबराओ, लेकिन रहो सतर्क

कोरोना से मत घबराओ, लेकिन रहो सतर्क।
कोविडियट्स (लापरवाह) और आप में, होना चाहिए फर्क।।

By: Sachin

Published: 05 Sep 2020, 05:22 PM IST

कोरोना से मत घबराओ, लेकिन रहो सतर्क।
कोविडियट्स (लापरवाह) और आप में, होना चाहिए फर्क।।

1. मानवता के दुश्मन है वो, जो इसको फैलाते हैं।
लॉकडाउन के बावजूद जो नियम तोड़ बाहर जाते हैं।
हमको सरकारी नियमों का, पालन कर राष्ट्र बचाना है।
उन ना समझों को पुलिस फोर्स के डंडों से समझाना है।।

नियमित रखो साफ सफाई, मत ना करो कुतर्क।
कोविडियट्स और आप में, होना चाहिए फर्क।।

2. कोई रोड पर ना निकले तो, कोरोना भग जायेगा।
लेकिन जब तक मिले निवाला, वो क्यों वापस जायेगा।।
हमको घर में आइसोलेटो, कोरोना को हराना है।
योगा और व्यायाम के साथ ही, हैल्थी डाईट अपनाना है।।

गवर्नमेंट एडवाइजरी पालो, वरना बेडा गर्क।
कोविडियट्स और आप में, होना चाहिए फर्क।।

3. पुलिस, चिकित्सा कर्मी, सब सरकारी अमला लगा हुआ।
हम भारतीय की जान बचाने, राष्ट्र का सेवक जगा हुआा।।
वो कहता है 'तू घर में रह'..मैं खड़ा हूं तेरी सुरक्षा में।।

अरे मास्क लगा, हाथों को धो, पी आयुर्वेदिक अर्क
कोविडियट्स और आप में, होना चाहिए फर्क।।

4. घर में यदि तू बैठा रहा तो, समझदार कहलायेगा।
धर्मग्रन्थों का पठन करेगा, संस्कारित बन जायेगा।
धर में तेरी जान बचेगी, राष्ट्रभक्त कहलायेगा।
गलियों में गर घूमेगा तो, कोरोना ग्रास बन जायेगा।

मानव अब तो सुधर भला, तू सुन ईश्वर का तर्क।
कोविडियट्स और आप में, होना चाहिए फर्क।।

भगवान सहाय शर्मा: वरिष्ठ शिक्षक, राउमावि आभावास, श्रीमाधोपुर

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