अमर हमारा भाईचारा, जिसपर हमको नाज है....

दीगर शहरों में दरखत देखें
देखे देख दंग रह जाते हैं।

By: Sachin

Updated: 02 Sep 2020, 05:16 PM IST

दीगर शहरों में दरखत देखें
देखे देख दंग रह जाते हैं।
परिन्दे भी वहां हवा में
हिंदू मुसलमान बन जाते हैं।

पर अपना यह सीकर प्यारा
भरा दरखती मुसकान से।
यहां परिन्दे दिखते नहीं हैं
हिन्दू और मुसलमान से।

इस धरती पर प्यार की दरिया
गंगा जमुना बहती है।
दिल में दुआएं लबों में हकीकत
नेक नीयत यहां बसती है।

राम करे अपने शहर में
फिरदोश जन्नत दिखती रहे।
मजहब भले ही जुदा हमार
अमन हवाएं बहती रहे।

कह दो हम एक थे
एक ही अब आज हैं।
अमर हमारा भाईचारा
जिसपर हमको नाज है।

तू करे प्रार्थना अल्लाह से
मंदिर मेरा बुलंद रहे।
मैं करूं इबादत ईश्वर से
मस्जिद तेरी निद्वन्द्व रहे।

ईद- दीवाली सब्बेरात सभी
यहां अमन से मनती है।
दीपोत्सव वेला सीकर में
मुस्लिम दुकानें भी सजती है।

हमारा सीकर प्यार की बस्ती है
दुश्मनी यहां महंगी है मोहब्बत अति सस्ती है।।

महावीर पुरोहित, लेखक व इतिहासकार, सीकर

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