पंचायत चुनाव से पहले खुलेगा सियासी नियुक्तियों का पिटारा

शहरी सरकार के चुनाव के बाद अब प्रदेश में सियासी नियुक्तियों को लेकर घमासान तेज हो गया है। सरकार पंचायत चुनाव से पहले सियासी नियुक्तियों का पिटारा खोल सकती है। सीकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीएस जाट ने जिला व उपखंड स्तरीय समिति में सदस्यों के मनोनयन के लिए आलाकमान को लगभग १२० पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के नाम भिजवाए हैं।

सीकर. शहरी सरकार के चुनाव के बाद अब प्रदेश में सियासी नियुक्तियों को लेकर घमासान तेज हो गया है। सरकार पंचायत चुनाव से पहले सियासी नियुक्तियों का पिटारा खोल सकती है। सीकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीएस जाट ने जिला व उपखंड स्तरीय समिति में सदस्यों के मनोनयन के लिए आलाकमान को लगभग १२० पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के नाम भिजवाए हैं। सूत्रों के अनुसार, जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक व चुनाव सहित अन्य संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रहने वालों के नाम भिजवाए गए हैं। इधर, सीकर के प्रभारी मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने भी अपनी रिपोर्ट सरकार को भिजवा दी है। यूआइटी अध्यक्ष सहित अन्य नियुक्तियों को लेकर भी सियासी दिग्गजों में घमासान मचा हुआ है। अब तक तीन नाम सबसे आगे है। मंत्रीमण्डल में जगह नहीं बनाने वाले विधायक भी आयोग व बोर्ड की कुर्सी पर टकटकी लगाए हुए है।

पिछले राज में दो लाल बत्ती

कांग्रेस के पिछले शासन काल में सीकर को दो बड़ी राजनैतिक नियुक्ति मिली थी। दांतारामगढ़ के पूर्व विधायक नारायण सिंह को किसान आयोग का अध्यक्ष व परसराम मोरदिया को आवासन मंडल का अध्यक्ष बनाया गया था। राजेन्द्र पारीक के पास उद्योग सहित अन्य विभागों का जिम्मा था। श्रीमाधोपुर विधायक दीपेन्द्र सिंह शेखावत के पास विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी थी।

अभी जिले से एक मंत्री

कांग्रेस मंत्रिमण्डल में जिले से लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा को शिक्षा राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली हुई है। लगातार तीन बार जीतने, पिछले कार्यकाल में सदन में काफी सक्रियता और संगठन पर अच्छी पकड़ की वजह से उनको जगह मिली है।

सीकर का दावा मजबूत इसलिए: एक भी सीट भाजपा को नहीं


राजनीतिक नियुक्तियों में सीकर के दिग्गजों का पलड़ा काफी भारी है। इसके पीछे बड़ी वजह विधानसभा चुनाव का परिणाम है। सीकर जिले की आठों विधानसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई। एेसे में कई बोर्ड व आयोग में अध्यक्ष सहित अन्य नियुक्तियों में यहां के विधायकों का नाम सबसे आगे है। प्रदेश में सीकर जिले में विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी।

पत्रिका फ्लैश: भाजपा राज में कमेटियों को लेकर सबसे ज्यादा हंगामा

पिछली भाजपा की सरकार के समय जिला व ब्लॉक स्तरीय कमेटियों में भाजपा सदस्यों के मनोनयन नहीं होने के मामले में पूरे पांच साल हंगामा रहा। कई बैठकों में प्रभारी मंत्री को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई गई। लेकिन ज्यादातर कमेटियों में भाजपा कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिल सकी। कई कमेटियों में दूसरी विचारधारा के कार्यकर्ताओं को शामिल करने के मामले में तत्कालीन सीएम तक भी शिकायत पहुंची थी।


पहले नाराजगी... अब लॉबिंग के जरिए समीकरण बदलने की जुगत

विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद सीकर के तीन वरिष्ठ विधायकों को पहली सूची में मंत्री बनने की उम्मीद थी। लेकिन जगह नहीं मिलने पर पहले नाराजगी के तेवर भी सामने आए। लेकिन आलाकमान ने कोई संकेत नहीं दिए। अब राजनैतिक नियुक्तियों की कवायद शुरू होते ही तीनों विधायकों ने अपने-अपने पक्ष में लॉबिंग बनाने की जुगत शुरू कर दी है।

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