पति की मौत के बाद प्रेम देवी की जिंदगी लॉक

केरपुरा पंचायत के बामरड़ा गांव की ‘शक्ति’ के पास बच्चों को खिलाने के अन्न नहीं
चार दिन पहले पति की हार्टअटैक से मौत
बड़ा बेटा मानसिक रूप से बीमार
लॉकडाउन में परिवार को मदद की आस

By: Suresh

Published: 27 Mar 2020, 06:13 PM IST

जनार्दन शर्मा. खंडेला. जीने की मजबूरी, गरीबी का आलम, मानसिक बीमार बेटे के इलाज की जिम्मेदारी और सहायता को तरसती आंखें। यह कहानी है केरपुरा पंचायत के गांव बामरड़ा निवासी बेवा प्रेम देवी की। प्रेम देवी व उसका पति मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करने के साथ ही बीमार बेटे का इलाज करवा रहे थे, लेकिन होनी को कुछ ओर ही मंजूर था। प्रेम देवी का पति भी चार दिन पहले ही दुनिया से चल बसा। परिवार के मुखिया की मौत के बाद अब वह पूरी तरह टूट चुकी है। अब प्रेम देवी को घर खर्च चलाने के साथ मानसिक बीमार बेटे की चिंता सता रही है।
दरअसल प्रेमदेवी के पति सुरेश कुमार (४५) की २३ मार्च को ही हार्ट अटैक से मौत हो गई। पति बाहर तथा पत्नी मनरेगा में मजदूरी करके जैसे तैसे अपने बच्चों का पालन पोषण कर रहे थे। मध्यप्रदेश में मजदूरी करने गए सुरेश की अचानक वहीं मौत हो जाने से प्रेम पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। तीन बच्चों को खिलाने के लिए घर में अनाज का एक दाना तक नही है। घर में दो बेटे व एक बेटी का अब आखिर कैसे पालन पोषण हो। तीन बच्चों में बड़ा बेटा सोनू मानसिक रोगी है। बेटे के इलाज के लिए पिता सुरेश व माता प्रेम ने मन्दिर मस्जिद में मन्नतें मांगी तथा जिसने भी जिस अस्पताल में उपचार करवाने के लिए कहा वो दोनों इलाज कराने के लिए दौड पड़े और लाखों रुपये कर्ज लेकर बेटे का इलाज करवाया पर भी बेटा ठीक नहीं हुआ। प्रेम ने बिलखते हुए बताया की उसके परिवार से तो राम और राज दोनो रूठ गये। कोरोना वायरस के चलते व पति की मौत के कारण ये परिवार घर मे कैद है। तीन दिन से प्रेम खिचड़ी पकाकर बच्चों का पेट पाल रही है। महिला प्रेम देवी के परिवार में उसकी बड़ी बेटी खामौश (१४) उससे छोटा बेटा सोनू (१२) जो कि मानसिक रूप से बीमारी है तथा सबसे छोटा बेटा राहूल (१०) है।
बीपीएल में नहीं
मनरेगा में मजदूरी करने तथा गरीबी रेखा में जीवन यापन करने के बाद भी इस परिवार की प्रशासन द्वारा अनदेखी के कारण बीपीएल में चयनित भी नही किया गया।
स्वयं सहायता समूहों को भुगतान की मांग
नांगल (नाथूसर) . महिला बाल विकास विभाग की श्रीमाधोपुर परियोजना में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषाहार पंजीरी की आपूर्ति करने वाले महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के सामने भुगतान नहीं मिलने के कारण आर्थिक समस्या गहरा गई है। श्रीमाधोपुर परियोजना में विगत आठ माह से पोषाहार आपूर्ति देने वाले महिला समूहों को बिलों का भुगतान नहीं किया गया है। गत सप्ताह श्रीमाधोपुर महिला बाल विकास कार्यालय ने तीन माह के बिल पास कर ट्रेजरी में दे दिए थे। लेकिन बिल इसीएस नहीं हुए। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपनी बचत व जमाराशि निकलवाकर उसका पोषाहार केन्द्रों पर डाल दिया व बाजार से उधार लेकर भी केन्द्रों में आपूर्ति दी। अब हमारी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।

पोषाहार आपूर्ति करने वाली महिलाएं खुद आहार के सामान खरीदने के लिए लाचार हो रही हैं। दुर्गाा स्वयं यहायता समूह सिहोडी व मनीष समूह आसपुरा व अन्य गांवों के समूह की महिलाओं का कहना है कि बजट होने के उपरान्त भी हमारे पास हुए बिल ट्र्र्र्रेजरी में अटके पड़े है। लॉक डाउन में बाजार में दुकानों से उधार सामान नहीं मिल रहा है। ट्रेजरी विभाग चालू है हमारे बिलों का भुगतान हमारे खाते में आ जाता है तो हमारी परेशानी दूर होगी। इन समूह की महिलाओ ने उच्च अधिकारीयो से स्वयं सहायता समूहो के बिल ट्रेजरी से इसीएस करवाकर भुगतान की मांग की है।

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