प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने का सीकर में यूं घुट रहा दम

सीकर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना सीकर में दम तोड़ रहा है। कम्प्यूटर पर शिक्षा तो दूर की बात स्कूलों में बिजली तक की सुविधा नहीं है।

By: Vinod Chauhan

Published: 24 Jul 2018, 10:39 AM IST

 

रविन्द्र सिंह राठौड़
सीकर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना सीकर में दम तोड़ रहा है। कम्प्यूटर पर शिक्षा तो दूर की बात स्कूलों में बिजली तक की सुविधा नहीं है। नई पीढ़ी अभी भी आजादी से पहले की तरह ही अंधेरे में बिना संसाधनों के ज्ञान प्राप्त कर रही है।
पत्रिका टीम ने सोमवार को जिले के सरकारी विद्यालयों का जायजा लिया तो कुछ ऐसी ही हकीकत नजर आई। कहीं विद्यार्थी बिना पंखे के बैठे नजर आए तो कहीं प्रकाश की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर के कुल 742 राजकीय विद्यालयों में अभी तक बिजली कनेक्शन तक नहीं हैं। आखर ज्ञान से जिंदगी रोशन करने के लिए स्कूल आने वाले विद्यार्थी अंधेरे में पढऩे को मजबूर हैं। जिले में कक्षा एक से आठ तक के कुल 1242 विद्यालय हैं। इनमें 71 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस सत्र में अब तक 6815 विद्यार्थियों का नया नामांकन हुआ है। इन्हें कम्प्यूटर व इंटरनेट का ज्ञान तो दूर सरकार पंखे तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है।

यह है बानगी
शिक्षा विभाग के अधिकारी बिजली कनेक्शन में देरी का कारण गांव ढ़ाणियों में स्थित सरकारी स्कूलों से बिजली पोलों का दूर होना बता रहे है। लेकिन क्या शहर में भी बिजली के पोल इस सरकारी स्कूल से दूर है। शहर के अंबेडकर नगर में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं है। स्कूल में 112 विद्यार्थियों का नामांकन है। संस्था प्रधान का यह भी कहना है कि इस सत्र में और भी नामांकन बढऩे के आसार है। लेकिन स्थिति यह है कि मात्र तीन कमरों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इन कमरों में वेंटिलेशन की कोई सुविधा नहीं है। स्कूल से सटाकर एक मकान बना हुआ है। जिसके चलते कमरों में अंधेरा रहता है। वहीं हवा पास नहीं होती है। गर्मी में विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार विद्यार्थियों को एक साथ छत पर बैठाकर पढ़ाई कराई जाती है। दुसरी समस्या स्कूल का ग्राउंड लेवल सडक़ से नीचे होना है। जिसके चलते आए दिन परिसर में पानी भर जाता है। पिपराली ब्लॉक में पुरोहित का बास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का निर्माण वर्ष 1978 में हुआ। संस्था प्रधान नानूराम मीणा ने बताया कि स्कूल में कक्षा एक से आठवीं तक कुल 80 विद्यार्थियों का नामांकन हैं। स्कूल में बिजली का कनेक्शन अभी तक नहीं हुआ। यह विद्यालय चार कमरों में चल रहा है। एक कमरे में तीन कक्षाओं को पढ़ाया जा रहा है।

बारिश करती है परेशान
राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल ढाणी चौधरी गांव हाथोद ग्राम पंचायत राजपुरा का निर्माण 1992 में हुआ। संस्था प्रधान सलीम खां ने बताया कि स्कूल में आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं है। बारिश के दिनों में रास्ते में पानी भी भर जाता है। आठवीं तक का यह विद्यालय मात्र तीन कक्षा कक्षों में चल रहा है।

अंधेरे में पढ़ाते हैं
सीकर से पांच किलोमीटर दूर राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल हरिजन बस्ती गोकुलपुरा सीकर 1989 से संचालित है। संस्था प्रधान इंद्रा थाकन ने बताया किइस स्कूल में बिजली का कनेक्शन नहीं है। गर्मी के दिनों में बच्चों को पेड़ों के नीचे बिठाया जाता है। बारिश के दिनों में कमरों में अंधेरा होने पर बरामदे में बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता हैं।


जिले के 305 उत्कृष्ट विद्यालय में बिजली कनेक्शन है। शेष स्कूलों में कनेक्शन करवाने के लिए संस्था प्रधान व बीईईओ को निर्देशित कर दिया गया है। बिजली निगम ने जिले की अधिकांश स्कूलों के पास बिजली पोल लगाए हैं जिससे जल्द ही कनेक्शन हो जाएंगे। गांव ढाणियों में स्कूल होने के चलते बिजली पोल नहीं लगे होने के कारण अभी तक कनेक्शन नहीं हो पा रहे थे।

विक्रम सिंह शेखावत, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा, सीकर

Vinod Chauhan
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned