scriptprotest against gochar bhoomi lease in sikar | गोचर भूमि पर पट्टों के विरोध में सड़क पर उतरे संत, दी गौशालाओं की 10 लाख गायें छोडऩे की चेतावनी | Patrika News

गोचर भूमि पर पट्टों के विरोध में सड़क पर उतरे संत, दी गौशालाओं की 10 लाख गायें छोडऩे की चेतावनी

सीकर. गोचर भूमि पर पट्टे जारी करने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में राजस्थान गो सेवा समिति सड़क पर उतर आई।

सीकर

Published: December 29, 2021 04:28:01 pm

सीकर. गोचर भूमि पर पट्टे जारी करने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में राजस्थान गो सेवा समिति सड़क पर उतर आई। प्रदेशाध्यक्ष दिनेश गिरी महाराज की अगुआई में जिले के कई साधु संतों व जिलेवासियों ने बुधवार को शहर में मौन जुलूस निकालकर आक्रोश जताया।। रेलवे स्टेशन से कलेक्ट्रेट तक निकाले गए जुलूस के बाद मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें गोचर भूमि पर पट्टे जारी करने की अनुमति को शास्त्र, पर्यावरण व कानून विरोधी बताया। फैसले को जल्द वापस लेने की मांग भी की। जो पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी। गो सेवा समिति के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश गिरी महाराज ने कहा कि यदि सरकार गोचर भूमि पर पट्टा जारी करने का फैसला वापस नहीं लेकर उन्हें अतिक्रमण मुक्त नहीं करवाती है तो प्रदेशभर की 3500 गौशालाओं की 10 लाख गायें उन भूमियों पर छोड़ दी जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

गोचर भूमि पर पट्टों के विरोध में सड़क पर उतरे संत, दी गौशालाओं की 10 लाख गायें छोडऩे की चेतावनी
गोचर भूमि पर पट्टों के विरोध में सड़क पर उतरे संत, दी गौशालाओं की 10 लाख गायें छोडऩे की चेतावनी

शास्त्र, कानून व पर्यावरण का हवाला
इस दौरान दिनेश गिरी महाराज ने राज्य सरकार के फैसले को शास्त्र, परंपरा, कानून व पर्यावरण विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गाय को माता व उसकी भूमि को संरक्षित व सुरक्षित रखने का जिक्र है। कानून भी यही कहता है। हमारे पूर्वजों, सेठ-साहुकारों ने भी गोचर भूमि के संरक्षण व सुरक्षा का जिम्मा उठाया है। इसके अलावा पेड़- पौधों व अन्य वन्य जीवों की वजह से पर्यावरण के लिहाज से भी गोचर भूमि पर पट्टे जारी करना उचित नहीं है। ऐसे में सरकार को ये फैसला वापस लेना चाहिए। फैसले के विरोध में उन्होंने सरकार के खिलाफ कोर्ट की शरण लेने की भी बात कही।

शास्त्र की भाषा नहीं समझती सरकार
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि जिस सरकार से गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन, उल्टे सरकार अतिक्रमियों को उन जमीन का पट्टा जारी कर रही है। कहा कि सरकार कानून के अलावा शास्त्र की भाषा भी नहीं समझती है।

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