राजस्थान में आंधी, बरसात व ओलावृष्टि का अलर्ट

(rain and hail alert in rajasthan) राजस्थान में दो दिन शुष्क रहा मौसम अब फिर बदलाव की ओर है। नया पश्चिम विक्षोभ सक्रिय (New Western Disturbance)होने से आगामी दिनों में प्रदेश के शेखावाटी (Shekhawati)सहित ज्यादातर इलाकों में फिर से आंधी व बरसात होने की संभावना है।

By: Sachin

Published: 09 May 2021, 05:11 PM IST

सीकर. राजस्थान में दो दिन शुष्क रहा मौसम अब फिर बदलाव की ओर है। नया पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से आगामी दिनों में प्रदेश के शेखावाटी सहित ज्यादातर इलाकों में फिर से आंधी व बरसात होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 11 से 13 मई तक विक्षोभ ज्यादा सक्रिय रहेगा। इस दौरान प्रदेश के कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक दक्षिण पश्चिम राजस्थान व आसपास के पाकिस्तान क्षेत्र के ऊपर एक प्रेरित परिसंचरण तंत्र बना हुआ है जिसका विस्तार सतह से 0.9 किमी ऊपर तक है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में सतह से 3.1 व 5.8 किमी के बीच अपनी धुरी के साथ स्थित है। जो 11 मई से राजस्थान सहित उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। मौसम विभाग के अनुसार इस तंत्र के प्रभाव से आगामी एक सप्ताह के दौरान राज्य के कुछ भागों में आंधी व बरसात की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। जिसका सबसे ज्यादा असर 11 से 13 मई तक रहेगा।

ये है अलर्ट
9 मई: जयपुर, भरतपुर, कोटा, बीकानेर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मेघ गर्जन बिजली चमकने के साथ अचानक 30 से 40 किलोमीटर गति की हवा चल सकती है।
10 मई: बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, जयपुर और भरतपुर संभाग के जिलों में तीव्र मेघ गर्जन के साथ आंधी की संभावना है। जिसमें हवा की गति 40 से 50 किमी हो सकती है।
11 मई: बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, संभाग के जिलों में कहीं-कहीं तीव्र मेघ गर्जन व वज्रपात के साथ 40 से 50 किमी रफ्तार से आंधी तथा कहीं कहीं ओलावृष्टि की संभावना है।

12 मई: बीकानेर, जयपुर, भरतपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं तीव्र मेघ गर्जन/ वज्रपात के साथ तेज अंधड़ की संभावना है।

।13 मई : बीकानेर, जयपुर व भरतपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं मेघ गर्जन व बिजली चमकने के साथ अचानक तेज हवाओं का झोंका चलने की संभावना है।

किसानों की बढ़ी चिंता
आए दिन बूंदाबांदी, अंधड के कारण शेखावाटी में किसान खासे चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि बार-बार बदलते मौसम के कारण खरीफ सीजन में होने वाली फसलों पर असर पड़ेगा। अप्रेल, मई, जून में तेज गर्मी पर ही खरीफ फसलों का उत्पादन निर्भर करता है। लेकिन इस बार मौसम में बदलाव के कारण तापमान असमान हो रहा है। बार-बार बदलते मौसम से तपन कम होने से जमीन में मौजूद कीट नष्ट नहीं हो पा रहे। खरीफ फसल की जुताई में भी परेशानी हो रही है।

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