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राहुल गांधी ने जिस योजना को मुद्दा बनाया, उसे ही भूली उनकी सरकार

राहुल गांधी का मुदृदा भूली राजस्थान सरकार, फाइलों में दबी कुंभाराम पेयजल योजना

सीकर

Updated: January 15, 2022 07:06:22 pm

सीकर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जिस कुंभाराम लिफ्ट परियोजना को पिछले चुनाव में मुद्दा बनाया था, उस योजना को लेकर उनकी ही पार्टी के मंत्री गंभीर नहीं है। सीकर और झुंझुनूं के लोगों की पेयजल की बड़ी आस बनी कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना को लेकर पिछले महीने सीकर की प्रभारी मंत्री शकुन्तला रावत ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को डीपीआर बनाने के फरमान दिए थे। लेकिन अभी तक जलदाय विभाग की ओर से डीपीआर को अंतिम रुप नहीं दिया जा सका है। खास बात यह है कि कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना की दो बार घोषणा भी चुकी है। लेकिन अभी तक योजना का तोहफा जनता को नहीं मिला है। दस साल से चुनावी मुद्दा बनी इस पेयजल परियोजना की लागत भी कई गुणा बढ़ चुकी है। पिछली भाजपा सरकार में इस योजना की डीपीआर बनाने की घोषणा हुई। लेकिन आचार संहिता की बजह से पेंच उलझ गया। फिर कांग्रेस सरकार की ओर से इस योजना को पटरी पर लाने का वादा किया गया। लेकिन सरकार के तीन साल पूरे होने पर भी जनता को राहत नहीं मिल सकी। इस योजना को मंजूरी नहीं मिलने की वजह से सीकर जिले के छह विधानसभा क्षेत्र और झुंझुनूं जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दस साल पहले इस योजना का कुल खर्चा लगभग एक हजार करोड़ रुपए था जो अब सात हजार करोड़ को भी पार कर गया है।

राहुल गांधी ने जिस योजना को मुद्दा बनाया, उसे ही भूली उनकी सरकार
राहुल गांधी ने जिस योजना को मुद्दा बनाया, उसे ही भूली उनकी सरकार

विधायकों ने उठाया था मामला, तब मंत्री ने दिया आश्वासन

प्रभारी मंत्री की बैठक में नीमकाथाना विधायक सुरेश मोदी व दांतारामगढ़ विधायक वीरेन्द्र सिंह ने इलाके में पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया था। इस पर सीकर विधायक राजेन्द्र पारीक ने कहा था कि छोटी पेयजल परियोजनाओं से राहत नहीं मिलने वाली है। कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना के जरिए ही स्थायी राहत मिल सकती है। इस पर प्रभारी मंत्री ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को डीपीआर बनाने के निर्देश दिए थे। बैठक में जलदाय विभाग के दो बार झूठे वादे करने का मामला भी गूंजा था। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा था कि इस बार डीपीआर बनते ही सभी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री से मिलेंगे और प्रस्ताव को मंजूरी भी दिलावाएंगे।

पहले चरण में झुंझुनूं में काम पूरा, दूसरे का इंतजार
कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल में कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना का काम शुरू हुआ था। झुंझुनूं में पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। लेकिन सीकर के पहले चरण में देरी की वजह से झुंझुनूं में दूसरे चरण का काम भी अटक गया। जबकि चूरू जिले के कुछ क्षेत्र और लक्ष्मणगढ़ इलाके में पानी दूसरी योजनाओं से आ चुका है।


सीकर के 864 गांव व 13 कस्बों को मिलना है पानी

इस योजना से सीकर जिले के 864 से अधिक गांव-ढ़ाणियों को इस योजना का फायदा मिलना है। इस योजना में सरकार ने जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया है। इन विधानसभा क्षेत्रों के 13 कस्बों में भी भविष्य में इसी योजना से पेयजल सप्लाई होनी है। इसमें सीकर, धोद, नीमकाथाना, खंडेला, दांतारामगढ़ व श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है।

7 हजार 700 करोड़ होंगे खर्च
कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना पर लगभग सात हजार 700 करोड़ रुपए का खर्चा होना है। सरकार ने कोरोना की वजह से इस योजना का काम अगले से शुरू करने की बात कही है। यदि सरकार इस योजना को धरातल पर लेकर आती है तो सीकर जिले की पेयजल समस्या का समाधान होगा।


चुनाव सभा में राहुल गांधी ने किया था वादा, जुबान फिसलने पर बना मुद्दा

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान शेखावाटी में हुई सभाओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना के लिए सरकार बनने के पहले साल में तीन हजार करोड़ दिलाने का वादा किया था। झुंझुनूं जिले की सभा में राहुल गांधी ने कुम्भाराम लिफ्ट पेजजल परियोजना को कुम्भकरण पेयजल परियोजना बोल दिया था। इसको भाजपा ने शेखावाटी में मुद्दे के तौर पर भुनाया था। लेकिन सरकार बनने के तीन साल बाद भी एक रुपए का भी बजट स्वीकृत नहीं हुआ है।

अगले महीने तक बनेगा प्रस्ताव: जलदाय विभाग
सीकर जिले के सभी क्षेत्रों में फिलहाल जल जीवन मिशन योजना के तहत काम जारी है। इस योजना में कवर नहीं होने वाले क्षेत्र को कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना में शामिल किया जाना है। इसलिए डीपीआर और प्रस्ताव बनाने में दिक्कत आ रही है। अगले महीने तक प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवाया जाएगा।

चुन्नीलाल, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग

आंकड़ोंं में योजना का गणित

कब बनी योजना: 2013

झुंझुनूं जिले में कब पूरा होना था काम: 2016

कब हुआ था प्रोजेक्ट: 2017

अब तक कितना खर्चा: 955 करोड़

अब कितना पैसा और चाहिए: 7700 करोड़

कितने विधानसभा क्षेत्रों को फायदा: 8

कितने गांव-ढाणियों को फायदा: 1014

कितने कस्बे के लोगों को राहत: 16

विधानसभा में मामला गूंजा: 31 बार

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