राजस्थान... जहां जेठ की थाली में अचानक परसा जाता है लड्डू...जानिए क्या है पीछे की कहानी

क्या आपने कभी सुनी हैं संक्रांति की ये हैं रोचक परंपराएं...राजस्थान में निभाई जाती हैं अभी भी

सीकर. मकर संक्रांति का त्योहार देशभर में पारम्परिक रूप से मनाया जाता है। लेकिन राजस्थान ऐसा प्रदेश हैं जो अपनी परम्पराओं के लिए पहचान रखता है और मकर संक्रांति के इस त्यौहार पर भी यहां आज भी कई परम्पराएं बदस्तूर जारी हैं।
1. धमकण लाडू, चमकण जेठ
इस रस्म में परिवार के लोग साथ में खाना खाते हैं। इसी समय जेठ की थाली में छोटी बहू अचानक से लड्डू परोस अचंभित करती है। हंसी ठिठोली के बीच होने वाली यह रस्म रिश्तों में मिठास घोल देती है।
2. सीढ़ी उतारना
इसमें बहुएं सास की लंबी आयु की कामना के साथ उन्हें सीढ़ी उतारती है। वे मंगल गीत गाते हुए हर सीढ़ी पर रुपए व भेंट रखने के साथ पैर छूकर आशीर्वाद लेती है।
3. ननद-भौजाई की खूंटी चीर
इसमें भाभी खूंटी पर ननद के कपड़े टांगती है। फिर नए कपड़े देकर अपने पति के लिए पूछेती है। ननद अपने भाई से भाभी को मिलाती है। तब भाभी ननद को कपड़े और श्रीफल भेंट करेगी।
4. देवर का नेग
इस रस्म में भागी अपने देवर को दंडी (गेंद) देकर उसे खुश करती है। आजकल इसकी जगह श्रीफल और कपड़े देने का रिवाज चल पड़ा है।
5. थांको राज अचल रहीजो
थांको राज अचल रहीजो, थांका घर बधावों जी..! इस परंपरा में सास ससुर के उठने से पहले बहू घर के सदस्यों को इक_ा कर ढोल बजाकर मंगल गीत गाते हुए उन्हें जगाती है। इसके बाद मिठाई व कपड़े भेंट करती है। परिवार में खुशी से पर्व मनाया जाता है।

Gaurav Desk
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