10 वीं की छात्रा की स्कूल में ले जाकर लूटी इज्जत, कोर्ट ने ये सुनाया फैसला

पॉक्सो कोर्ट ने दो साल बाद १४ साल की नाबालिग से बलात्कार के आरोपी को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश डा.सीमा अग्रवाल ने साक्ष्य और अहम दस्तावेजों के आधार पर रामलाल उर्फ छोटू पुत्र कुशालचंद बलाई निवासी पुरोहितान मोहल्ला दांतारामगढ़ को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

By: Bhagwan

Published: 27 Nov 2019, 06:28 PM IST

सीकर. पॉक्सो कोर्ट ने दो साल बाद १४ साल की नाबालिग से बलात्कार के आरोपी को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश डा.सीमा अग्रवाल ने साक्ष्य और अहम दस्तावेजों के आधार पर रामलाल उर्फ छोटू पुत्र कुशालचंद बलाई निवासी पुरोहितान मोहल्ला दांतारामगढ़ को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। उस पर १० हजार रुपए का दंड भी लगाया। लोक अभियोजक यशपाल सिंह महला ने बताया कि दांतारामगढ़ थाने में १ अक्टूबर २०१७ को १४ साल की पीडि़ता की मां ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने रिपोर्ट में बताया कि २१ सितम्बर २०१७ दोपहर १२ बजे रामलाल उर्फ छोटू पीडि़ता को बहला फुसला कर पास में ही सरकारी स्कूल में ले गया। वहां पर जबरन बलात्कार किया। पीडि़ता के घर में कोई नहीं था। परिजनों के आने के बाद पीडि़ता ने पूरी घटना की जानकारी दी। आरोपी ने पीडि़ता को किसी को भी घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी। पीडि़ता के पिता केरल में रहकर नौकरी करता है। दांतारामगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के कारण पुलिस ने जांच कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूर्व में लोक अभियोजक रहे शिवरतन शर्मा ने भी कोर्ट में मुकदमे को लेकर बहस कराई।


१६ गवाह व २२ साक्ष्य दस्तावेज पेश किए


पीडि़ता १० वीं कक्षा की छात्रा थी और रामलाल स्कूल में ही साफ सफाई का काम करता था। आरोपी रामलाल पड़ोस में ही रहता था। पुलिस ने पीडि़ता के रिपोर्ट पर कोर्ट में जांच कर १६ गवाह व २२ साक्ष्य दस्तावेज पेश किए। पीडि़ता ने कोर्ट में जुलाई व अगस्त महीने में भी दो बार बलात्कार किए जाने की बात कहीं है। पीडि़ता की जन्मतिथि को लेकर भी कोर्ट में दस्तावेज पेश किए गए। पीडि़ता ने कोर्ट में बयान दिए कि रामलाल ने उसे स्कूल में ले जाकर धमकाया। स्कूल में जाकर पीडि़ता ने शोर भी मचाया। उसका मुंह उसने बंद कर दिया। उसने मां-बाप को जान से मारने की धमकी दी थी।


नारी की लज्जा की रक्षा कठोरता से की जानी चाहिए...


अभियुक्त द्वारा नाबालिग बालिका पीडि़ता के साथ जो कि नासमझ थी उसके साथ घृणित कार्य किया है। लज्जा नारी जाति के साथ ही जुड़ा एक सदगुण है जो नारी होने के नाते उस महिला में अंतनिर्हित है। नारी की लज्जा की रक्षा कठोरता से की जानी चाहिए। नाबालिग बालिका को बहला फुसला कर ले जाकर घृणित कार्य किया है। आए दिन समाज में एेसे अपराधों में वृद्धि हो रही है।
( विशिष्ट न्यायाधीश डा.सीमा अग्रवाल ने फै सले में लिखा)

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