बरसों से जमा खुद की लक्ष्मी को तरसे

सीकर. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सीकर अरबन कॉपरेटिव बैंक लिमिटेड के वित्तीय लेन-देन पर ही रोक लगा दी है। नतीजतन इस बैंक में न तो रुपए जमा हो रहे हैं और न ही जमा राशि दी जा रही है

By: Vinod Chauhan

Published: 15 Nov 2018, 06:03 PM IST


आरबीआइ ने सीकर अरबन कॉपरेटिव बैंक लिमिटेड पर लगाई वित्तीय रोक
एक खाते से महज दो हजार निकाल सकते हैं
आठ हजार से ज्यादा खाताधारक की 40 करोड की बचत पर लगा ताला
सीकर. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सीकर अरबन कॉपरेटिव बैंक लिमिटेड के वित्तीय लेन-देन पर ही रोक लगा दी है। नतीजतन इस बैंक में न तो रुपए जमा हो रहे हैं और न ही जमा राशि दी जा रही है। वहीं बैंक में एफडी का नवीनीकरण भी नहीं हो रहा है। न ही नया लोन जारी किया जा रहा है। ऐसे में खून पसीने से कमाई गई बचत पर संकट आ गया है। रही सही कसर बैंक के क्लिीयरिंग हाउस पर रोक लगा देने से हो गई है। जिससे हजारों खाता धारकों के करोड़ों रुपए के चैक अटक गए हैं। मजबूरी में खाते धारकों को बैंक से मोहभंग हो रहा है। वहीं बकाया राशि बढऩे से बैंक की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। गौरतलब है कि सीकर अरबन कॉपरेटिव बैंक की दो शाखाओं ने 32 करोड रुपए का ऋण बांट रखा है। जिसकी एवज में महज 60 प्रतिशत राशि की ही वसूली हो रही है। इसमें से महज 40 फीसदी की ही वसूली हो सकती है।
दो हजार की निकासी
रिजर्व बैंक की रोक के अनुसार इन खातों में जमा शेष राशि में दो हजार रुपए का ही भुगतान हो सकता है। इस समय सीकर अरबन बैंक के आठ हजार से ज्यादा खाताधारक है। इन खातों में अधिकांश बचत खाते हैं। ये खाता धारक व्यवसाय के लिए नियमित रुप से जमा राशि करवाते हैं और इसी के जरिए भुगतान करते हैं। पांच सौ से ज्यादा खाता धारक व्यवसायिक श्रेणी के है।
यह है कारण
1971 से संचालित यह बैंक शुरू से विवादों के घेरे में रहा है। बैंक की ओर से बांटे गए लोन में बंदरबाट होने व नोटबंदी में बचत खातों में कई खातों में ढाई लाख रुपए से ज्यादा राशि जमा कराए जाने के प्रकरण कई बार सामने आ चुके हैं। शिकायत रिजर्व बैंक व आयकर विभाग ने भी इसकी जांच की है। इसके अलावा सख्त वसूली प्रक्रिया नहीं होने के कारण कई ऋणी जानबूझ कर किश्त जमा नहीं कराते हैं। वहीं एनपीए खातों के संबंध में आरबीआई ने किश्तों की संख्या तीन से घटाकर अब दो किश्त ही कर दी है। जिससे भी एनपीए बढ़ता जा रहा है।
ऐसे हुआ खुलासा
बैंकिंग सेक्टर के विशेषज्ञों ने बताया कि बैंक प्रबंधन ने शुरू से वित्तीय प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया है। बैंक ने लोगों की जमा पूंजी के आधार पर जितनी राशि का लोन बांटा है उसकी एवज में राशि इस बैंक में न तो पर्याप्त पूंजी है और न ही बैंक की ओर से बांटे गए लोन की रिकवरी नहीं हो रही थी। कई बार बैंक के प्रबंधन को फटकार लगाकर सुधार के निर्देश दिए थे लेकिन जब बैंक ने बिना गारंटी और सिक्यूरिटी के लोन बांटना जारी रखा। इससे एनपीए बढ़ता गया।
बैंक प्रबंधन का तर्क
रोक लगाने को लेकर प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर कुछ कहने से मना कर दिया लेकिन यह जरूर कहा कि खाताधारकों की ओर से बैंक में जमा कराया गया रुपया सुरक्षित है। किसी प्रकार की वित्तीय अराजकता नहीं हो इसके लिए दो हजार रुपए की निकासी सीमा तय की गई है। हालांकि बैंक के लेन-देन पर रोक लगाने के कारण ऋणदाता का बैंक से विश्वास घटता जा रहा है। इससे वसूली में परेशानी आ रही है।

Vinod Chauhan
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