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रीट में हुए 50 हजार पद तो गिरेगी कट ऑफ, 15 लाख बेरोजगारों को विज्ञप्ति का इंतजार

मुख्यमंत्री की हर सभा में गूंज रहा रीट में पद बढ़ाने का मामला

परिणाम के पेंच सुलझें तो अनलॉक होगी विज्ञप्ति

पत्रिका एक्सक्लूसिव:

सीकर

Published: November 19, 2021 06:36:11 pm

सीकर.
कोरोना की वजह से सरकार ढ़ाई साल में एक भी तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती नहीं करा सकी है। रीट परीक्षा के परिणाम के फिर से उलझने सहित अन्य पेंच की वजह से तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती की विज्ञप्ति अनलॉक नहीं हो पा रही है। ऐसे में अब प्रदेश के 15 लाख बेरोजगारों की ओर से 31 हजार के बजाय 50 हजार पदों पर भर्ती की मांग की जाने लगी है। पिछले 15 दिनों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा की ओर से सात जिलों में प्रशासन गांवों के संग अभियान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। इन सभी सभाओं में भर्तियों का मामला गूंजा है। यदि सरकार की ओर से पदों में बढ़ोतरी की जाती है तो रीट लेवल प्रथम व लेवल द्वितीय में कट ऑफ गिरना तय है।
शिक्षक बनने के लिए प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारों की कतार
शिक्षक बनने के लिए प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारों की कतार
सरकार इसलिए अड़ी है 31 हजार पदों के लिए:

1. आखिरी साल का रिपोर्ट कार्ड:
सरकार फिलहाल 31 हजार पदों पर ही तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती कराने के मूड में नजर आ रही है। इसके पीछे बड़ी वजह आगामी विधानसभा चुनाव है। सरकार की मंशा है कि फिलहाल 31 हजार पदों पर ही तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती की जाए। फिर चुनाव वाले साल में 20 से 30 हजार पदों के लिए एक और भर्ती की जाए, ताकि चुनाव में फायदा मिल सके।
2. वित्तिय प्रावधान:
रीट में पद नहीं बढ़ाने के पीछे सरकार की दूसरी मजबूरी वित्तिय प्रावधानों की है। सरकार की ओर से लगातार तर्क दिया जा रहा है कि बजट में 31 हजार पदों को ही मंजूरी मिली है। इसलिए पदों में बढ़ोतरी संभव नहीं है।
इसलिए पदों में बढ़ोतरी संभव:

1. पहली रीट ही विवादों में:

सरकार की ओर से लगभग ढ़ाई साल में पहली रीट का आयोजन कराया गया। हालांकि भर्ती कोरोना की वजह से एक साल तक उलझी रही। नकल की वजह से रीट परीक्षा काफी विवादों में रही। तीन साल पूरे होने पर सरकार चुनावी मोड की तरफ आगे बढ़ेगी। ऐसे में सरकार इस रीट के जरिए 50 हजार रिक्त पदों को भर सकती है।
2. और बंद स्कूल खुलेंगे, इसलिए बढ़ सकते है पद:
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने घोषणा पत्र में बंद प्राथमिक स्कूलों को खोलने का दावा किया था। लेकिन सरकार अभी तक सभी स्कूलों को नहीं खोल सकी है। सूत्रों का कहना है कि आगामी बजट में 500 से अधिक बंद स्कूलों को खोलने का फैसला हो सकता है। ऐसे में अब 50 हजार पदों पर भर्ती होती है तो आखिरी साल के लिए 10 से 15 हजार पद बचेंगे।
पदों का संभावित गणित:

यदि प्रांरभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से 31 हजार पदों पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी की जाती है तो प्रथम लेवल 16 हजार और द्वितीय लेवल में 15 हजार पदों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। 50 हजार पदों पर आवेदन मांगे जाने पर रीट प्रथम लेवल वालों को ज्यादा फायदा होगा।
110 से 125 रह सकती है कट ऑफ, पद बढ़े तो गिरेगी
एक्सपर्ट की मानें तो इस बार औसत तौर पर दोनों लेवल में 110 से 125 अंकों तक कट ऑफ पहुंच सकती है। द्वितीय लेवल के मुकाबले प्रथम लेवल का प्रश्न पत्र आसान होने से कट ऑफ ज्यादा बढऩे की संभावना है। पुराने रीट व आरटेट प्रमाण पत्रों की वैद्यता समाप्त होने सहित कई कारणों की वजह से इस बार राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने प्रश्न पत्र का स्तर औसत ही रखा था। एक्सपर्ट का कहना है कि यदि पदों की संख्या 31 हजार से 50 हजार होती है तो कट ऑफ सभी विषयों में कम होगी। इसलिए बेरोजगारों की ओर से लगातार पद बढ़ाने की मांग की जा रही है।
फिर पैटर्न बदलने की तैयारी में सरकार, बेरोजगार बोले, अगली बार से हो एक और परीक्षा

तृतीय श्रेणी की शिक्षक भर्ती का पैटर्न फिर से विवादों में है। पिछले दिनों खुद मुख्यमंत्री ने भर्तियों की समीक्षा के दौरान कहा कि रीट के बाद एक और परीक्षा कराने पर विचार किया जाएगा। क्योंकि रीट महज एक पात्रता परीक्षा है। सीएम के संकेत के बाद बेरोजगारों की चिन्ता भी बढ़ गई है। बेरोजगारों की ओर से इस फॉर्मूले को अगली भर्तियों से लागू करने की मांग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि रीट के बाद एक और परीक्षा होने से गुणवत्ता और सुधरेगी।
20 साल में हुई सात शिक्षक भर्ती
वर्ष 2000 से लेकर अब तक सात तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती हुई है। वर्ष 2003 में भाजपा सत्ता में आई तो शिक्षक भर्ती का जिम्मा जिला परिषदों से लेकर आरपीएससी को दिया गया। आरपीएससी ने पहली बार सभी जिलों के बेरोजगारों के लिए एक लिखित परीक्षा कराई। इस दौरान लगभग 35 हजार पदों के लिए भर्ती हुई थी। वर्ष 2006 में फिर एक और बड़ी भर्ती करीब 30 हजार पदों के लिए कराई गई। इसके बाद में संस्कृत शिक्षक विभाग में 2008 में करीब 3 हजार पदों के लिए भर्ती निकाली गई। 2008 में कांग्रेस पार्टी की सरकार सत्ता में आ गई। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावी होने के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (आरटेट) कराई गई और वर्ष 2012 में भर्ती परीक्षा का जिम्मा आरपीएससी से लेकर जिला परिषदों को दिया गया। इस भर्ती परीक्षा में आरटेट के 20 प्रतिशत अंक जोड़कर मेरिट बनाई गई। इसके वर्ष 2013 में 20 हजार पदों के लिए कराई गई। 2013 की शिक्षक भर्ती के साथ ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गई और वर्ष 2016 में भाजपा ने भर्ती का पैटर्न बदल दिया और आरटेट को खत्म कर रीट के माध्यम से भर्ती कराई गई, लेकिन इसमें 70 प्रतिशत रीट परीक्षा के 30 प्रतिशत स्नातक के अंको का वेटेज जोड़ा गया। इस बार होने वाली भर्ती रीट के अंकों का वैटेज बढ़ाया गया है।
हर साल पात्रता परीक्षा का प्रावधान बना मजाक

अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत एनसीटीई ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के लिए हर साल अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू की गई। प्रदेश में सबसे पहले 2011 में शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई थी। पिछले दस साल में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही पार्टियां सत्ता में रही, लेकिन वे हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने में सफल नहीं हो सकी। प्रदेश में महज अब तक चार बार ही पात्रता परीक्षा करवाई गई है। जबकि सीबीएसई की ओर से वर्ष में दो बार पात्रता परीक्षाओं का आयोजन कराया जा रहा है।
विज्ञप्ति इसलिए नहीं हो पा रही अनलॉक

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से महज 36 दिन में रीट का परिणाम जारी कर दिया गया। लेकिन परिणाम के पेंच पूरी तरह नहीं सुलझें है। इस वजह से बोर्ड की ओर से प्रमाण पत्रों की प्रिटिंग शुरू नहीं कराई है। क्योंकि बोनस अंक, बीएड डिग्रीधारियों के प्रथम लेवल में अनुमति व प्रश्न पत्र लीक के मामले न्यायालय में उलझे हुए है। सूत्रों की मानें तो सरकार के विशेष अनुमति देने पर ही इन मुद्दों के बीच में विज्ञप्ति जारी हो सकती है। ऐसा नहीं होने पर विवाद समाप्त नहीं होने तक विज्ञप्ति भी उलझी रहेगी।

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