आचार संहिता हटते ही शुरू हो सकते हैं रीट भर्ती के आवेदन, बस इस हरी झंडी का इंतजार

प्रदेश के बेरोजगारों की नौकरी की खुशियां इस बार निर्वाचन विभाग की आचार संहिता में उलझ गई है।

By: Sachin

Published: 17 Nov 2020, 07:31 PM IST

सीकर. प्रदेश के बेरोजगारों की नौकरी की खुशियां इस बार निर्वाचन विभाग की आचार संहिता में उलझ गई है। राज्य सरकार ने 31 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के जरिए विज्ञप्ति जारी करने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के अलावा नगर निकायों की आचार संहिता की वजह से रीट की विज्ञप्ति अनलॉक नहीं हो सकी। रीट की विज्ञप्ति का प्रदेश के 10 लाख से अधिक बेरोजगारों को इंतजार है। शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भी पिछले दिनों ट्वीट कर कहा कि निर्वाचन विभाग की हरी झंडी मिलते ही विज्ञप्ति जारी कर दी जाएगी। राज्य सरकार की तैयारियां लगभग पूरी हैं। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने फरवरी में रीट कराने की योजना बनाई है। यदि निर्वाचन आयोग से इस महीने हरी झंडी मिलती है तो दिसंबर में आवेदन प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन फिलहाल पूरी तरह गेंद निर्वाचन विभाग के पाले में हैं। सरकार की ओर से रीट भर्ती में किए जाने वाले बदलावों पर भी लगभग मुहर लग गई है। रीट भर्ती 2020 में सरकार ने लेवल द्वितीय में बैटेज कम करने, वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों को रीट में शामिल करने सहित अन्य बदलाव लगभग कर लिए हैं। शिक्षा विभाग अब तक चार बैठक में रीट भर्ती को लेकर कर चुका है।

थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती के हर पांच साल में बदल जाते हंै कायदे
प्रदेश में थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती के हर पांच साल में बदलते कायदे दस लाख से ज्यादा बेरोजगारों की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। स्थायी कायदे तय नहीं होने की वजह से बेरोजगारों की नौकरी की आस उलझी हुई है। कभी आरटेट तो कभी रीट के जरिए थर्ड भर्ती कराने के प्रयोग हो चुके हैं। बेरोजगारों का कहना है कि स्थायी नीति नहीं होने की वजह से तैयारी भी प्रभावित होती है। अब तक प्रदेश में जिला परिषदों के जरिए, आरपीएससी व रीट के अंकों के आधार पर थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती हो चुकी है। वर्ष 2003 में भाजपा सत्ता में आई तो शिक्षक भर्ती का जिम्मा जिला परिषदों से लेकर आरपीएससी को को दे दिया गया। आरपीएससी ने पहली बार भर्ती के लिए लिखित परीक्षा कराई। इसके बाद वर्ष 2006 में फिर एक और बड़ी भर्ती भी आरपीएससी के जरिए ही हुई। 2008 में कांग्रेस पार्टी की सरकार सत्ता में आ गई। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावी होने के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (आरटेट) कराई गई और वर्ष 2012 में भर्ती परीक्षा का जिम्मा आरपीएससी से लेकर जिला परिषदों को वापस दे दिया गया। इस भर्ती परीक्षा में आरटेट के 20 प्रतिशत अंक जोड़कर मेरिट बनाई गई। इसके वर्ष 2013 में 20 हजार पदों के लिए कराई गई उसकी जिम्मेदारी भी जिला परिषदों को दी गई। इन दोनों भर्तियों में आरटेट के 20 प्रतिशत अंक मेरिट में जोड़े गए। 2013 की शिक्षक भर्ती के साथ ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गई और वर्ष 2016 में भाजपा ने भर्ती का पैटर्न बदल दिया और आरटेट को खत्म कर रीट के माध्यम से भर्ती कराई गई, लेकिन इसमें 70 प्रतिशत रीट परीक्षा के 30 प्रतिशत स्नातक के अंको का वेटेज जोड़ा गया। भाजपा ने ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती में यही पेटर्न जारी रखा था। अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस ने रीट भर्ती के नियमों में बदलाव की तैयारी कर ली है।


अब फिर वैटेज बदलने की तैयारी

इस साल जारी होने वाली रीट भर्ती में फिर से नियम बदलने की तैयारी है। इस भर्ती में वैटेज 70- 30 के बजाय 90-10 होने की संभावना है। दूसरी तरफ रीट के अंकों में कई वर्गों को छूट देने का भी प्रस्ताव है। ऐसे में इस भर्ती में नियमों में बदलाव तय हो गया है।

हर चुनाव में बड़ा मुद्दा
पिछले चार विधानसभा चुनावों में थर्ड ग्रेड शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा प्रदेशभर में गूंजा। आरपीएससी के जरिए हुई भर्ती का कांग्रेस नेताओं ने काफी विरोध किया। अपने घोषणा पत्र में सत्ता में आने पर जिला परिषदों से ही भर्ती कराने का वादा किया। इसके बाद भर्ती का पैर्टन भी बदला। वहीं भाजपा ने जिला परिषदों के जरिए दो प्रश्न पत्रों के आधार पर हुई भर्ती का विरोध किया। इसके बाद भाजपा ने सत्ता में आने पर रीट के अंकों के आधार पर भर्ती शुरू कर दी।


इनका कहना है

थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती के स्थायी नियम नहीं होने से बेरोजगारों की मुसीबत बढ़ रही है। सरकार को थर्ड ग्रेड शिक्षकों की भर्ती के लिए स्थायी नियम बनाने चाहिए। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही नियम बदल जाते है।
-उपेन यादव, प्रवक्ता, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ

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