सेवानिवृत होते ही इस प्रिंसिपल ने सबसे पहले इनसे की दोस्ती, जो बन गई मिसाल

मनोहर लाल वर्मा 1965 में राजकीय हरदयाल स्कूल सीकर. में बतौर विद्यार्थी रहे।

By: vishwanath saini

Published: 22 Aug 2017, 04:10 PM IST

 जोगेन्द्र सिंह गौड़
सीकर. पर्यावरण बचाने के लिए एक सेवानिवृत प्रिंसिपल जी-जान से लगे हुए हैं। सेवानिवृति के बाद भी प्रतिदिन स्कूल पहुंचना और पौधों को सहेजना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। हम बात कर रहे हैं सेवानिवृत प्रिंसिपल मनोहरलाल की। मनोहरलाल का अनूठा पर्यावरण प्रेम देखकर हर कोई उनका कायल है।

अपने गुरु के इस समर्पण को देखकर बच्चे भी पर्यावरण बचाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। जिस स्कूल में पढकऱ शिक्षा हासिल की उसी स्कूल में शिक्षक बन गए। बाद में प्रिंसिपल की जिम्मेदारी मिली और अब रिटायरमेंट के बाद पर्यावरण बचाने में लगे हैं।

बतौर, मनोहर लाल का कहना है कि बच्चों को स्वस्थ जीवन देने वाले इस कार्य से वे कभी पीछे नहीं हटेंगे। जब-तक शरीर में सांस है। वे नियमिति स्कूल आकर पौधों की सुरक्षा की यह लड़ाई जारी रखेंगे।

हर कोई कायल

मनोहरलाल वर्मा 1965 में राजकीय हरदयाल स्कूल में बतौर विद्यार्थी रहे। इसके बाद 1984 से 1997 तक यहां शिक्षक रहे। स्कूल प्रिंसिपल की जिम्मेदारी उन्होंने 2014 से 2017 तक निभाई।
सेवानिवृति के अगले ही दिन से वे यहां बगीचे को संभालने बागवान के रूप में स्वैच्छिक सेवा देने लगे।

निशुल्क सेवा देते देखकर यहां का स्टाफ भी उनका कायल है। स्कूल की प्रिंसिपल सुनीता जोशी के अनुसार उम्र के इस पड़ाव में सरकारी अधिकारी जहां आराम करने की सोचता है।

खींच लाया अपनापन

सेवानिवृति प्रिंसिपल मनोहर लाल का कहना है कि यहीं पढ़ा और अधिकारी बनकर स्कूल का संचालन किया। जिससे स्कूल के प्रति अपनापन की भावना और ज्यादा प्रबल हो गई। देखरेख के अभाव में जब बगीचे की हालत बिगडऩे लगी तो रहा नहीं गया।

सेवानिवृति प्रिंसिपल मनोहर लाल का कहना है कि घर में आराम करने के बजाय प्रतिदिन यहां आता हूं और पेड़-पौधों की छगाई, कटाई, उनमें पानी देने सहित नए पौधे लगाने का प्रयास करता हूं। जिसमें स्कूल का स्टाफ और बच्चे बराबर का सहयोग करते हैं। 

vishwanath saini Desk
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