घाटे में डूबी रोडवेज टोल पर लुटा रही है लाखों...यू चलता है खेल...

Vishwanath kumar Saini

Publish: Sep, 17 2017 04:09:24 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
घाटे में डूबी रोडवेज टोल पर लुटा रही है लाखों...यू चलता है खेल...

घाटे में चल रही राजस्थान रोडवेज की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। प्रदेशभर में रोडवेज के लाखों रुपए टोल बूथों पर लुटाए जा रहे हैं।

सीकर.

घाटे में चल रही राजस्थान रोडवेज की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। तीन महीने से कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी रोडवेज के ही अधिकारियों की लापरवाही की वजह से रोडवेज का बंटाधार हो रहा है। थोड़ी सी परेशानी से बचने के लिए प्रदेशभर में रोडवेज के लाखों रुपए टोल बूथों पर लुटाए जा रहे हैं। जबकि इस तरफ विभाग का कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा है। एक-एक बूथ पर एक डिपो की बसों के दो-दो लाख रुपए से ज्यादा लुटाए जा रहे हैं। जबकि थोड़ी सी मशक्कत करें तो यह पैसा बच सकता है। रोडवेज की बसें जिस भी टोल बूथ से जितनी बार गुजरती हैं उतनी बार ही टोल दे रही हैं। अगर बस दिन में एक ही चक्कर लगाती है तो उसका रिटर्न टोल भले ही कटवा लिया जाता है लेकिन बस का मासिक पास नहीं बनाया है।


रूट पर फिक्स हैं गाडिय़ां


रोडवेज की ज्यादातर गाडिय़ों का रूट फिक्स होता है। ऐसे में वही गाड़ी रोज उन्हीं टोल बूथ से गुजरती हैं। बहुत कम बार उनकी जगह किसी दूसरी गाड़ी को भेजते हैं।


पड़ौस में...यहां नहीं:

हरियाणा में जो बसें नियमित रूप से एक ही रूट पर चलती हैं उनका मासिक पास बनवाया जाता है।


नहीं बनवा रहे हैं पास:

टोल के मासिक पास रोडवेज भी बनवा सकती है। थोड़ी सी परेशानी से बचने के लिए अधिकारी पास नहीं बनवा रहे हैं। पास बनवाने के लिए केवल इनती सी परेशानी से उठानी पड़ेगी कि डीपो के कर्मचारियों को टोल बूथ पर जाकर पूरी कार्रवाई करनी पड़ेगी। इससे बचने के लिए हर दिन टोल दे रहे हैं।

आंकड़ों में समझिए नुकसान

सीकर से फतेहपुर की तरफ चलने वाली एक लोकल बस एक दिन में तीन चक्कर लगाती है। इन तीनों चक्कर में रसीदपुरा टोल बूथ पर उसे 600 रुपए टोल देना पड़ रहा है। इस प्रकार से एक महीने में यह एक बस ही 18,000 रुपए टोल दे रही है। जबकि इसी बूथ का पास बनाए तो एक बस का एक महीने का पास 6800 रुपए में बनता है। इस प्रकार एक ही गाड़ी पर एक महीने में 11 हजार 800 रुपए की बचत हो सकती है। इस मार्ग पर रोडवेज की 13 लोकल बसें चल रही हैं। हर महीने एक लाख 53 हजार 400 रुपए एक्सट्रा चुकाए जा रहे हैं। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि ये गाडिय़ां हर दिन नहीं चलती है। अगर एक गाड़ी महीने में तीन दिन नहीं भी चली तो भी 10000 रुपए हर गाड़ी पर बच सकते हैं। यह तो एक बानगी है। रोडवेज के हर रूट पर ऐसा ही हो रहा है।

सुझाव अच्छा है। लोकल ही नहीं लंबे रूट पर भी पास बन सकता है। जहां संभव होगा वहां व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। कुलदीप रांका, एमडी, रोडवेज

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